
पश्चिम बंगाल के रायगंज में आयोजित एक चुनावी रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को लेकर तीखे बयान दिए। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र आयोजित इस रैली में राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति, केंद्र सरकार की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर कई गंभीर आरोप लगाए, जिनमें “एपस्टीन मामला” भी प्रमुख रूप से शामिल रहा।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में दावा किया कि “एपस्टीन मामले” के कारण डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को “बंदी” बना रखा है। हालांकि, यह आरोप राजनीतिक बयानबाज़ी का हिस्सा माना जा रहा है और इस पर किसी आधिकारिक पुष्टि या ठोस सबूत का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जब भी प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप से मिलते हैं, तो वे उन्हें “सर” कहकर संबोधित करते हैं, जबकि दूसरी ओर ट्रंप कथित तौर पर उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। राहुल ने यह भी कहा कि ट्रंप दो मिनट में प्रधानमंत्री का राजनीतिक करियर खत्म करने की बात करते हैं, फिर भी मोदी उन्हें गले लगाते रहते हैं।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल पर देश में नफरत फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारती जनता पार्टी देश में धार्मिक आधार पर विभाजन की राजनीति कर रहे हैं, जिससे संविधान की मूल भावना को नुकसान पहुंच रहा है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की विचारधारा इसके विपरीत है और वह सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
रैली के दौरान राहुल गांधी ने संसद में हुई एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वे लोकसभा में “एपस्टीन मुद्दे” पर बोल रहे थे, तो प्रधानमंत्री मोदी उनकी बातों से असहज हो गए और उन्हें रोकने की कोशिश की गई। राहुल के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को बीच में हस्तक्षेप करने के लिए कहा गया, लेकिन जब ऐसा संभव नहीं हुआ, तो प्रधानमंत्री सदन छोड़कर चले गए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर देश के साथ “धोखा” करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए कुछ समझौतों से देश के किसानों और छोटे व्यापारियों को नुकसान हो सकता है। उनके अनुसार, इन समझौतों के तहत भारतीय कृषि बाजार को विदेशी कंपनियों और किसानों के लिए खोल दिया गया है, जिससे भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर खेती होती है और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि भारत में छोटे किसान सीमित संसाधनों के साथ काम करते हैं।
इसके अलावा, राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी और केंद्र सरकार के बीच कथित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में अडाणी समूह के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, जिसके कारण अडाणी विदेश जाने से डरते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत के अंदर उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है। इन आरोपों पर अडाणी समूह या सरकार की ओर से इस रैली के संदर्भ में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में ऐतिहासिक नेताओं का भी जिक्र किया और कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और बी. आर. अम्बेडकर जैसे नेताओं ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने देश के लिए संघर्ष किया और अपने मूल्यों को सर्वोपरि रखा, जबकि वर्तमान सरकार इन आदर्शों से दूर जा रही है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बात करते हुए राहुल गांधी ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में भी कई समस्याएं हैं, जिनका समाधान जरूरी है। राहुल ने मतदाताओं से कांग्रेस उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी राज्य के विकास और जनता की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है।
यह रैली आगामी चुनावों के मद्देनज़र राजनीतिक बयानबाज़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। जहां एक ओर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर इन बयानों की सत्यता और राजनीतिक उद्देश्य को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल को गर्माने और मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से दिए जाते हैं।
कुल मिलाकर, रायगंज की इस रैली में राहुल गांधी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर व्यापक हमला बोला। आने वाले दिनों में इन आरोपों पर सत्तारूढ़ दल और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक तेज हो सकता है।


