
नई दिल्ली/डेस्क। नेशनल हाईवे पर सफर करना अब पहले से कहीं ज्यादा सुगम हो गया है, लेकिन टोल प्लाजा पर लगने वाला लंबा जाम आज भी यात्रियों के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं है। अक्सर हम घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं और चुपचाप टोल टैक्स का भुगतान कर देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के नियमानुसार, कुछ खास स्थितियों में आप बिना एक भी रुपया दिए टोल प्लाजा पार करने के हकदार हैं?
जी हां, ‘पीली रेखा’ (Yellow Line) और ’10 सेकंड’ का नियम ऐसे ही दो हथियार हैं जो यात्रियों को अनावश्यक देरी से बचाने के लिए बनाए गए हैं। आइए जानते हैं कि एक जागरूक नागरिक के तौर पर आपके पास हाईवे पर क्या अधिकार हैं।
क्या है ‘येलो लाइन’ नियम?
NHAI की गाइडलाइंस के अनुसार, देश के हर टोल प्लाजा की प्रत्येक लेन में टोल बूथ से ठीक 100 मीटर की दूरी पर एक स्पष्ट पीली रेखा (Yellow Line) खींची जाती है। इस रेखा का उद्देश्य ट्रैफिक के दबाव को मापना होता है।
नियम यह कहता है कि यदि वाहनों की कतार इतनी लंबी हो जाए कि वह इस 100 मीटर की पीली रेखा को पार कर जाए, तो यह टोल ऑपरेटर की विफलता मानी जाती है। ऐसी स्थिति में, जब तक कतार वापस पीली रेखा के अंदर नहीं आ जाती, तब तक टोल ऑपरेटर को बैरियर खोलना होगा और पीली रेखा के भीतर मौजूद सभी वाहनों को बिना टोल लिए जाने की अनुमति देनी होगी। यह नियम सुनिश्चित करता है कि हाईवे पर ट्रैफिक का प्रवाह सुचारू बना रहे और यात्रियों का समय बर्बाद न हो।
10 सेकंड का जादुई नियम
पीली रेखा के अलावा एक और महत्वपूर्ण मानक है जिसे ‘सर्विसेज टाइम’ कहा जाता है। टोल प्लाजा येलो लाइन नियम के साथ-साथ ’10 सेकंड रूल’ भी बेहद प्रभावी है। NHAI के अनुसार, टोल बूथ पर एक वाहन को प्रोसेस करने का समय (यानी भुगतान और बैरियर खुलने का समय) 10 सेकंड से अधिक नहीं होना चाहिए।
यदि आप टोल बूथ पर पहुंच चुके हैं और आपको अपनी बारी के लिए 10 सेकंड से ज्यादा का इंतजार करना पड़ रहा है (चाहे कतार 100 मीटर से कम ही क्यों न हो), तो तकनीकी रूप से आप बिना टोल दिए आगे बढ़ने के पात्र हो सकते हैं। हालांकि, फास्टैग (FASTag) के आने के बाद इस नियम के उल्लंघन की संभावनाएं कम हुई हैं, लेकिन तकनीकी खामियों की स्थिति में यह नियम आज भी यात्रियों का बचाव करता है।
फास्टैग की तकनीकी खराबी और आपकी जेब
डिजिटल इंडिया के दौर में फास्टैग ने टोल संग्रह को तेज जरूर किया है, लेकिन अक्सर स्कैनर की खराबी या सर्वर डाउन होने की खबरें आती रहती हैं। NHAI का नियम स्पष्ट है: यदि आपके फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस है और वह सक्रिय है, लेकिन टोल प्लाजा का स्कैनर उसे रीड नहीं कर पा रहा है या वहां का सिस्टम खराब है, तो इसकी जिम्मेदारी यात्री की नहीं है। ऐसी स्थिति में टोल कर्मचारी आपसे नकद (Cash) भुगतान की मांग नहीं कर सकते। सिस्टम की खराबी की स्थिति में यात्री को ‘जीरो ट्रांजैक्शन’ पर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
टोल ऑपरेटर की आनाकानी पर क्या करें?
अक्सर देखा जाता है कि नियमों की जानकारी न होने के कारण टोल कर्मचारी यात्रियों पर दबाव बनाते हैं या विवाद की स्थिति पैदा करते हैं। अगर आपके साथ ऐसी स्थिति आती है, तो इन कदमों का पालन करें:
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शांत रहें और नियमों का हवाला दें: टोल मैनेजर से बात करें और उन्हें NHAI के 100 मीटर और पीली रेखा के नियम की याद दिलाएं।
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शिकायत दर्ज करें: हर टोल प्लाजा पर एक हेल्पलाइन नंबर और शिकायत पुस्तिका होना अनिवार्य है।
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1033 पर कॉल करें: NHAI ने यात्रियों की सहायता के लिए ‘1033’ हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। आप मौके से ही इस नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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साक्ष्य रखें: यदि संभव हो, तो पीली रेखा से बाहर खड़ी अपनी गाड़ी का वीडियो या फोटो साक्ष्य के तौर पर लें।
जागरूकता ही है समाधान
NHAI का प्राथमिक उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और निर्बाध यात्रा प्रदान करना है। टोल टैक्स का भुगतान सड़क के रख-रखाव के लिए आवश्यक है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि यात्री को घंटों जाम में फंसाकर मानसिक प्रताड़ना दी जाए।
अगली बार जब आप नेशनल हाईवे पर निकलें, तो अपनी नजरें टोल प्लाजा की उस ‘पीली रेखा’ पर जरूर रखें। आपके अधिकारों की जानकारी न केवल आपका समय बचाएगी, बल्कि टोल ऑपरेटरों को भी अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मजबूर करेगी। याद रखें, एक जागरूक यात्री ही देश के सिस्टम को पारदर्शी बनाने में मदद कर सकता है।



