देहरादून: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। जहाँ एक ओर 19 अप्रैल से धामों के कपाट खुलने जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी सुविधा ‘हेली सेवा’ की बुकिंग 15 अप्रैल से शुरू होने वाली है। लेकिन इस यात्रा की आड़ में सक्रिय साइबर ठगों के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस बार अभूतपूर्व ‘डिजिटल स्ट्राइक’ की है।
मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद एसटीएफ ने अभियान चलाकर अब तक 180 फर्जी सोशल मीडिया लिंक और 52 संदिग्ध मोबाइल नंबरों को ब्लॉक करवा दिया है। प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है—श्रद्धालुओं की आस्था सुरक्षित रहे और उनका पैसा ठगों के हाथ न लगे।
साइबर अपराधियों का ‘हब’ रडार पर: 147 लिंक संचालकों के खिलाफ मुकदमा
एसएसपी एसटीएफ के नेतृत्व में गठित विशेष सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और एक्शन टीम ने इस बार केवल रक्षात्मक ही नहीं, बल्कि आक्रामक रुख अपनाया है। जांच में सामने आया है कि साइबर ठग संगठित रूप से एक ही राज्य से संचालित होकर फर्जी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया पेजों के जरिए जाल बिछा रहे थे।
एसटीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 147 लिंक संचालकों और 27 फर्जी मोबाइल सिम कार्ड धारकों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके अलावा, हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग के नाम पर संचालित 10 हाई-प्रोफाइल संदिग्ध वेबसाइट्स को चिन्हित कर उनके डोमेन रजिस्ट्रार के माध्यम से निष्क्रिय (Deactivate) करा दिया गया है।
केदारनाथ हेली सेवा: ठगों का सॉफ्ट टारगेट
चारधाम यात्रा में सबसे अधिक मांग केदारनाथ धाम के लिए हेलीकॉप्टर सेवा की रहती है। इसी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी गूगल एड्स, फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी विज्ञापन चलाते हैं। ये विज्ञापन देखने में बिल्कुल आधिकारिक लगते हैं, जहाँ ‘भारी डिस्काउंट’ या ‘तत्काल बुकिंग’ का झांसा देकर श्रद्धालुओं से ऑनलाइन भुगतान करा लिया जाता है। एक बार भुगतान होने के बाद ये ठग मोबाइल नंबर बंद कर देते हैं और श्रद्धालु ठगा सा रह जाता है।
एसटीएफ की जीरो टॉलरेंस नीति और डिजिटल निगरानी
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निरंतर निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा, “साइबर अपराध के खिलाफ हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है। हमने डीओटी (DoT) को उन संदिग्ध नंबरों की सूची सौंपी है जिनका उपयोग ठगी के लिए किया जा रहा था। हमारी टीम 24 घंटे सोशल मीडिया और सर्च इंजन के परिणामों को स्कैन कर रही है ताकि कोई भी नई फर्जी वेबसाइट सक्रिय न हो सके।”
सावधान! केवल यहाँ से करें बुकिंग: आधिकारिक गाइडलाइंस
एसटीएफ और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने श्रद्धालुओं के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार के भ्रम से बचाने के लिए केवल एक ही अधिकृत पोर्टल की सलाह दी गई है:
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आधिकारिक वेबसाइट: हेली सेवा की बुकिंग केवल www.heliyatra.irctc.co.in के माध्यम से ही की जानी चाहिए।
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आधिकारिक संपर्क नंबर: किसी भी पूछताछ के लिए केवल आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर +91-8394833833 पर ही संपर्क करें।
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व्हाट्सएप से बचें: कोई भी आधिकारिक एजेंसी व्हाट्सएप मैसेज भेजकर पैसे की मांग या टिकट बुकिंग नहीं करती है।
ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
प्रशासन ने अपील की है कि यदि कोई श्रद्धालु अनजाने में किसी फर्जी लिंक पर क्लिक कर देता है या आर्थिक धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। समय पर सूचना देने से ठगी गई राशि के फ्रीज होने की संभावना बढ़ जाती है।
आस्था और सुरक्षा का समन्वय
19 अप्रैल से शुरू हो रही यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार इस बार तकनीक आधारित सुरक्षा चक्र पर जोर दे रही है। यात्रा मार्ग पर डेंजर जोन्स की निगरानी के साथ-साथ डिजिटल स्पेस को सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे ‘सस्ते’ और ‘शॉर्टकट’ के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई साइबर ठगों को न सौंपें और केवल सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का ही पालन करें।



