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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में ‘खेला’ शुरू: कुमारी शैलजा का बड़ा दावा, क्या 2027 से पहले दरकेगा भाजपा का किला?
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में ‘खेला’ शुरू: कुमारी शैलजा का बड़ा दावा, क्या 2027 से पहले दरकेगा भाजपा का किला?

The Hill India News
Last updated: April 12, 2026 3:03 am
The Hill India News
Published: April 12, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड की शांत वादियों में इन दिनों सियासी पारा अपने चरम पर है। सूबे में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस द्वारा उत्तराखंड के 6 नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाए जाने के बाद अब ‘दल-बदल’ की सुगबुगाहट ने एक नए तूफान का संकेत दे दिया है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के ताजा बयान ने भाजपा खेमे में खलबली मचा दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि सत्ताधारी दल के कई ‘दिग्गज’ उनके संपर्क में हैं।

Contents
कुमारी शैलजा का धमाका: ‘संपर्क में हैं भाजपा के छोटे-बड़े नेता’हरक सिंह रावत की रणनीति: ‘सिटिंग विधायकों’ पर नजरभाजपा का पलटवार: ‘कांग्रेस कूड़ेदान बन गई है’2027 की जंग: सेंधमारी की सियासतक्या बदलेगा उत्तराखंड का सियासी समीकरण?

कुमारी शैलजा का धमाका: ‘संपर्क में हैं भाजपा के छोटे-बड़े नेता’

उत्तराखंड के दौरे पर आईं कांग्रेस की कद्दावर नेता और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए एक ऐसा बयान दिया जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। शैलजा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का कुनबा बढ़ने वाला है और भाजपा के कई वरिष्ठ व कनिष्ठ नेता कांग्रेस का हाथ थामने को बेताब हैं।

उन्होंने कहा, “भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। कई सीनियर लीडर और जमीन से जुड़े छोटे कार्यकर्ता हमारे निरंतर संपर्क में हैं। लोग प्रदेश का बदलता माहौल देख रहे हैं और कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ना चाहते हैं। जॉइनिंग की प्रक्रिया सतत चलेगी और जल्द ही आपको बड़े चेहरे कांग्रेस में नजर आएंगे।” कुमारी शैलजा का यह आत्मविश्वास यह संकेत दे रहा है कि कांग्रेस इस बार केवल बचाव की मुद्रा में नहीं, बल्कि आक्रामक होकर भाजपा के गढ़ में सेंधमारी की तैयारी कर चुकी है।

हरक सिंह रावत की रणनीति: ‘सिटिंग विधायकों’ पर नजर

कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और राज्य के कद्दावर नेता हरक सिंह रावत ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। रावत ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दावा किया कि भाजपा के वर्तमान विधायक (सिटिंग एमएलए) भी कांग्रेस में आने के इच्छुक हैं। हालांकि, उन्होंने इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति का भी खुलासा किया।

हरक सिंह रावत के अनुसार, “सिटिंग विधायकों से हमारी बात हो रही है, लेकिन तकनीकी पेंच यह है कि अगर वे अभी इस्तीफा देकर शामिल होते हैं, तो प्रदेश पर उपचुनाव का बोझ पड़ेगा। हम चाहते हैं कि जब विधानसभा चुनाव में महज 6 महीने का वक्त शेष रहे, तब इन चेहरों को पार्टी में शामिल किया जाए ताकि सीधे आम चुनाव में ताकत दिखाई जा सके।” रावत ने पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की गुटबाजी से इनकार करते हुए जोर दिया कि पूरा ‘कांग्रेस परिवार’ एकजुट है और नए साथियों का स्वागत करने के लिए तैयार है।

भाजपा का पलटवार: ‘कांग्रेस कूड़ेदान बन गई है’

कांग्रेस के इन दावों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस के दावों को ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ करार दिया। चमोली ने तर्क दिया कि हाल ही में जिन 6 नेताओं ने दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ली है, उनमें से अधिकांश वे हैं जिन्हें भाजपा अनुशासनहीनता के कारण पहले ही निष्कासित कर चुकी थी।

चमोली ने कहा, “कांग्रेस उन नेताओं को गले लगा रही है जिनकी राजनीतिक संभावनाएं भाजपा में समाप्त हो चुकी हैं। भाजपा का कोई भी समर्पित कार्यकर्ता या विधायक कांग्रेस में जाने की सोच भी नहीं सकता। जो लोग भाजपा के लिए बोझ बन चुके थे, वे अब कांग्रेस की ‘मजबूती’ बन रहे हैं, यह अपने आप में हास्यास्पद है।“ भाजपा का मानना है कि कांग्रेस केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रही है।

2027 की जंग: सेंधमारी की सियासत

उत्तराखंड में 2027 के चुनाव अभी दूर जरूर हैं, लेकिन दोनों प्रमुख दल जानते हैं कि मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने के लिए विपक्षी खेमे में फूट डालना जरूरी है। कांग्रेस जहां अपनी पिछली हारों से सीख लेकर ‘कुनबा विस्तार’ पर जोर दे रही है, वहीं भाजपा अपने ‘अभेद्य किले’ को बचाने के लिए अनुशासन का चाबुक चला रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुमारी शैलजा और हरक सिंह रावत की सक्रियता ने उन असंतुष्ट भाजपा नेताओं को एक विकल्प दे दिया है जो वर्तमान नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। यदि कांग्रेस वास्तव में कुछ सिटिंग विधायकों को तोड़ने में सफल रहती है, तो यह राज्य के सियासी इतिहास में एक बड़ा ‘तख्तापलट’ साबित हो सकता है।

क्या बदलेगा उत्तराखंड का सियासी समीकरण?

फिलहाल, उत्तराखंड की राजनीति उस मोड़ पर है जहां हर बयान के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। कुमारी शैलजा का दावा और भाजपा का उस पर तंज, यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में दलबदल की यह चिंगारी एक बड़ी आग का रूप ले सकती है। क्या वाकई भाजपा के विधायक कांग्रेस का दामन थामेंगे? या फिर यह कांग्रेस की महज एक चुनावी चाल है? इन सवालों के जवाब आने वाले 6 से 8 महीनों में साफ हो जाएंगे, लेकिन इतना तय है कि देवभूमि की राजनीति अब ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है।

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