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देहरादून: मानसून की चुनौतियों से निपटने को प्रशासन तैयार, 28 संवेदनशील नदी तटों और लैंडस्लाइड जोन के लिए मास्टर प्लान मंजूर

The Hill India News
Last updated: March 27, 2026 1:56 pm
The Hill India News
Published: March 27, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आगामी मानसून सीजन के दौरान संभावित खतरों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गया है। शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की महत्वपूर्ण बैठक में जिलाधिकारी सविन बंसल ने आपदा न्यूनीकरण (Mitigation) के लिए कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाई। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु जिले की संवेदनशील नदियों का चैनलाइजेशन, ड्रेजिंग और क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन का उपचार रहा, ताकि जन-धन की हानि को शून्य किया जा सके।

Contents
नदियों का चैनलाइजेशन और ड्रेजिंग: बाढ़ सुरक्षा के लिए ‘सशर्त’ हरी झंडीयमुना तट और लैंडस्लाइड जोन पर विशेष फोकसजाखन और चंद्रभागा नदी: मलबे की सफाई के लिए बनी संयुक्त समितिअधिकारियों को सख्त निर्देश: 31 मार्च की डेडलाइन और नियमित समीक्षाबैठक में मुख्य उपस्थिति

नदियों का चैनलाइजेशन और ड्रेजिंग: बाढ़ सुरक्षा के लिए ‘सशर्त’ हरी झंडी

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की प्रासंगिक धाराओं के तहत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आपदा न्यूनीकरण के कार्य सुधारात्मक प्रकृति के होते हैं और इन्हें टालना जनसुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा।

प्रशासन ने जिले के विभिन्न नदी तटों पर 28 ऐसे संवेदनशील स्थलों की पहचान की है, जहां मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा सबसे अधिक रहता है। इन स्थलों पर नदियों के मार्ग को व्यवस्थित करने (चैनलाइजेशन) और मलबे की सफाई (ड्रेजिंग) के कार्यों को सशर्त मंजूरी दी गई है। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि ये कार्य पूरी पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएं ताकि बारिश शुरू होने से पहले सुरक्षा दीवारें और तटबंध मजबूत हो सकें।

यमुना तट और लैंडस्लाइड जोन पर विशेष फोकस

बैठक में विशेष रूप से कालसी और चकराता जैसे पर्वतीय क्षेत्रों की सुरक्षा पर चर्चा हुई।

  • हरिपुर कालसी क्षेत्र: यमुना नदी के तट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए घाट निर्माण और नदी चैनलाइजेशन को मंजूरी दी गई है।

  • कालसी-चकराता मोटर मार्ग: इस मार्ग पर स्थित ‘जजरेड’ नामक स्थान, जो एक ‘क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन’ (पुराना भूस्खलन क्षेत्र) बन चुका है, वहां संरचनात्मक सुधार कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

  • व्यासी और बोसाना: राष्ट्रीय राजमार्ग-507 पर किमी 24 और 26 (व्यासी व बोसाना) में भूस्खलन उपचार के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।

जाखन और चंद्रभागा नदी: मलबे की सफाई के लिए बनी संयुक्त समिति

देहरादून और ऋषिकेश के बीच महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े फैसले लिए गए। जाखन ब्रिज के अपस्ट्रीम में जमा हुए भारी मलबे को हटाने और भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग पर चंद्रभागा नदी के किनारे ‘रिवर ड्रेसिंग’ के लिए एक उच्च स्तरीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है।

इस समिति में संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM), प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता शामिल होंगे। यह समिति स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करेगी, जिसके तुरंत बाद कार्य शुरू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राजमार्ग-507 पर यमुना नदी के सेतु की सुरक्षा के लिए ‘कर्टेन वॉल’ और एबटमेंट स्कप्पर निर्माण जैसे तकनीकी कार्यों को भी हरी झंडी मिली है।

अधिकारियों को सख्त निर्देश: 31 मार्च की डेडलाइन और नियमित समीक्षा

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा ने बताया कि मार्च माह में ही इन कार्यों को स्वीकृति देने का उद्देश्य विभागों को पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है। जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी विभाग के पास आपदा सुरक्षा से संबंधित अतिरिक्त प्रस्ताव हैं, तो उन्हें बिना देरी किए प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने घोषणा की कि भविष्य में आपदा प्रबंधन समिति की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाएंगी ताकि कार्यों की प्रगति की निरंतर मॉनिटरिंग हो सके।

बैठक में मुख्य उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सुखविंदर सिंह कौर (सह-अध्यक्ष समिति), प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ओपी सिंह, एनएच के अधिशासी अभियंता सुरेश तोमर और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दूरस्थ क्षेत्रों के उपजिलाधिकारी इस बैठक में वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे।

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