UK-Pakistan Row Over Shabir Ahmed: ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक ऐसे मामले को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिसमें बच्चों के साथ बलात्कार और यौन अपराधों के दोषी ठहराए गए पाकिस्तान मूल के शबीर अहमद को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन चाहता है कि 73 वर्षीय शबीर अहमद को उसकी सजा पूरी करने के बाद पाकिस्तान भेजा जाए, लेकिन पाकिस्तान कथित तौर पर उसे वापस लेने से इनकार कर रहा है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि अगर ब्रिटेन उस पर शबीर अहमद को वापस लेने का दबाव बनाता है तो इसका असर दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग पर पड़ सकता है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शबीर अहमद को ब्रिटेन में बच्चों के साथ बलात्कार और यौन अपराधों के 30 मामलों में दोषी ठहराया गया था और उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह इस सजा में से करीब 14 साल जेल में काटने के बाद पिछले महीने रिहा हुआ है। अब उसकी रिहाई के बाद ब्रिटेन उसे अपने देश से बाहर भेजने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं बताया जा रहा।
क्या है पूरा विवाद?
ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन पाकिस्तान से शबीर अहमद को वापस लेने के लिए कह रहा है। वहीं पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच प्रत्यावर्तन और आव्रजन से जुड़े मामलों में पहले से सहयोग होता रहा है।
पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक साल में पाकिस्तान ने करीब 1,500 ऐसे लोगों को वापस लेने में ब्रिटेन के साथ सहयोग किया, जिनकी ब्रिटेन में शरण की अर्जी खारिज हो गई थी, जिनका वीजा खत्म हो चुका था या जिन्होंने इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन किया था।
पाकिस्तान का कथित तर्क है कि जब वह इन मामलों में ब्रिटेन के साथ सहयोग कर रहा है, तो शबीर अहमद को लेकर उस पर अलग तरह का दबाव क्यों बनाया जा रहा है।
पाकिस्तान ने सहयोग रोकने की धमकी क्यों दी?
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने कथित तौर पर संकेत दिया है कि अगर ब्रिटेन शबीर अहमद को वापस लेने के लिए उस पर दबाव बढ़ाता है तो इसका असर दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग पर पड़ सकता है।
इसमें इंटेलिजेंस, सुरक्षा और संगठित अपराध से निपटने में सहयोग भी शामिल है। पाकिस्तान की ओर से यह भी संकेत दिए जाने की बात कही गई है कि वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने में सहयोग कम या बंद कर सकता है।
यानी एक दोषी अपराधी को वापस लेने का विवाद अब सिर्फ इमिग्रेशन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि दोनों देशों के व्यापक संबंधों से जोड़कर देखा जाने लगा है।
ब्रिटेन क्यों भेजना चाहता है शबीर को पाकिस्तान?
ब्रिटेन की सरकार विदेशी नागरिकों द्वारा किए गए गंभीर अपराधों के मामलों में सजा पूरी होने के बाद उन्हें उनके मूल देश भेजने की नीति पर जोर दे रही है। ब्रिटिश जेलों में क्षमता का दबाव भी एक बड़ी चुनौती है।
रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून तक ब्रिटेन की जेलों में 306 पाकिस्तानी नागरिक बंद थे। सरकार विदेशी अपराधियों को सजा पूरी होने के बाद उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया तेज करना चाहती है।
शबीर अहमद का मामला इसी नीति के तहत महत्वपूर्ण बन गया है। ब्रिटेन में उसकी नागरिकता भी पहले ही खत्म की जा चुकी है, जिसके बाद उसे पाकिस्तान भेजने का रास्ता तलाशा जा रहा है।
शबीर अहमद का आपराधिक रिकॉर्ड क्या है?
शबीर अहमद को ब्रिटेन में बच्चों के खिलाफ गंभीर यौन अपराधों के मामले में दोषी ठहराया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उसे 2012 में कई मामलों में दोषी पाया गया और कुल 22 साल की सजा सुनाई गई।
वह रोचडेल और ओल्डम से जुड़े उस ग्रूमिंग गैंग मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में शामिल था, जिसमें कम उम्र की लड़कियों के यौन शोषण के गंभीर आरोप और मामले सामने आए थे।
शबीर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता भी उससे छीन ली गई थी। इससे पहले उसके पास ब्रिटेन और पाकिस्तान दोनों की नागरिकता होने की जानकारी सामने आई थी।
अब समस्या यह है कि ब्रिटेन उसे अपना नागरिक नहीं मानता, जबकि पाकिस्तान भी कथित तौर पर यह कह रहा है कि उसने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर शबीर अहमद को किस देश में रखा जाए।
पाकिस्तान का दावा- ‘वह हमारा नागरिक ही नहीं’
पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर यह तर्क दिया जा रहा है कि शबीर अहमद ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी है। उसने अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा ब्रिटेन में बिताया है और उसके अपराध भी ब्रिटेन में हुए हैं।
इसी आधार पर पाकिस्तान उसे अपनी जिम्मेदारी मानने से इनकार कर रहा है।
दूसरी ओर, ब्रिटेन का तर्क यह है कि शबीर की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त की जा चुकी है और उसे देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। ऐसे में अब दोनों पक्ष अपने-अपने कानूनी और प्रशासनिक तर्कों के आधार पर मामले को देख रहे हैं।
ब्रिटेन में अभी कैसी जिंदगी जी रहा है शबीर?
जेल से रिहा होने के बावजूद शबीर अहमद पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश प्रशासन उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है।
उसके ऊपर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। उसकी इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग की गई है और उसे ओल्डहैम तथा रोचडेल जैसे कुछ इलाकों में जाने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा उसे एक ऐसे हॉस्टल में रखा गया है जहां उसकी गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाती है।
कुछ लोगों से संपर्क रखने पर भी उस पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की सरकार उसकी रहने और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था पर हर साल हजारों पाउंड खर्च कर रही है। यही वजह है कि ब्रिटिश सरकार उसे देश से बाहर भेजने का रास्ता तलाश रही है।
ब्रिटिश सरकार इमिग्रेशन कानून में करेगी बदलाव
इस विवाद के बीच ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने इमिग्रेशन कानूनों में बदलाव की बात कही है। सरकार का मानना है कि करीब 50 साल पुराने कुछ कानूनों के कारण ऐसे मामलों में डिपोर्टेशन की प्रक्रिया मुश्किल हो रही है।
शबीर अहमद का मामला इसी कानूनी पेचीदगी का उदाहरण बन गया है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता खत्म कर चुका है, लेकिन अब उसके निर्वासन के लिए उस देश की सहमति जरूरी है जहां उसे भेजा जाना है। पाकिस्तान उसे स्वीकार नहीं कर रहा, इसलिए मामला और जटिल हो गया है।
मामला सिर्फ एक अपराधी का नहीं, दो देशों के रिश्तों का भी
शबीर अहमद का मामला अब ब्रिटेन-पाकिस्तान संबंधों के लिए भी संवेदनशील बनता जा रहा है। एक तरफ ब्रिटेन गंभीर अपराधों के दोषियों को देश से बाहर भेजने की कोशिश कर रहा है, वहीं पाकिस्तान अपनी नागरिकता और जिम्मेदारी से जुड़े सवाल उठा रहा है।
अगर दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है तो इसका असर इमिग्रेशन सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा और संगठित अपराध के खिलाफ साझा प्रयासों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि गंभीर अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की जिम्मेदारी आखिर किस देश की होगी, जब एक देश उसे अपना नागरिक मानने को तैयार नहीं है और दूसरा उसे अपने यहां रखने को तैयार नहीं?
फिलहाल ब्रिटेन शबीर अहमद को पाकिस्तान भेजने के विकल्प पर आगे बढ़ना चाहता है, जबकि पाकिस्तान उसे वापस लेने से इनकार कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और कानूनी प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।
शबीर अहमद का मामला ब्रिटेन की इमिग्रेशन नीति, विदेशी अपराधियों के निर्वासन और नागरिकता के सवालों के बीच फंसा एक बेहद गंभीर विवाद बन चुका है। अब देखना होगा कि ब्रिटेन पाकिस्तान पर कितना दबाव बनाता है और पाकिस्तान इस मामले में अपने रुख पर कितना कायम रहता है।
