
नैनीताल: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कथित ‘एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग’ (EVCL) के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले ने अब कानूनी तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को नैनीताल हाईकोर्ट में इस मामले के मुख्य आरोपी विकास ढाका की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
जांच में अब तक क्या हुआ? कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली और अब तक की गई तफ्तीश पर सवाल उठाए। न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि इस बहुचर्चित धोखाधड़ी मामले में अब तक की जांच की क्या प्रगति है? कोर्ट ने आदेश दिया है कि 17 अप्रैल तक जांच की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (Progress Report) शपथ पत्र के माध्यम से पेश की जाए।
खेल सचिव की पेशी: ‘हमारा काम सिर्फ मैदान देना’
कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में उत्तराखंड के खेल सचिव अमित सिन्हा शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। उन्होंने विभाग का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि खेल विभाग का उत्तरदायित्व केवल आयोजनों के लिए बुनियादी ढांचा और मैदान उपलब्ध कराना है। उन्होंने तर्क दिया कि लीग का आयोजन निजी फ्रेंचाइजी कंपनियों द्वारा किया जाता है, जिसमें विभाग की कोई सीधी भागीदारी नहीं होती। सचिव ने कहा कि यदि किसी आयोजन में वित्तीय अनियमितता या धोखाधड़ी होती है, तो यह पुलिस और कानून व्यवस्था का विषय है, न कि खेल विभाग का।
क्या है EVCL स्कैम? कैसे बुना गया ठगी का जाल
यह मामला हल्द्वानी के गौलापार स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से जुड़ा है। आरोपी विकास ढाका ने ‘एपिक विक्ट्री क्रिकेट लीग’ (EVCL) के नाम से एक टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट का खाका तैयार किया था। प्रचार किया गया कि इस लीग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिग्गज खिलाड़ी शिरकत करेंगे।
इसी चमक-धमक का झांसा देकर कई रसूखदार लोगों और व्यवसायियों को फ्रेंचाइजी बेची गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सितारगंज के पूर्व विधायक नारायण पाल और हरियाणा के एक युवक ने मुख्य आरोपी पर 32 लाख रुपये की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद न तो लीग का आयोजन हुआ और न ही वादे के मुताबिक सुविधाएं दी गईं।
गिरफ्तारी पर विवाद: पुलिस की कार्यशैली कटघरे में
मुख्य आरोपी विकास ढाका को नैनीताल पुलिस ने 6 फरवरी को काठगोदाम क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। हालांकि, अब ढाका ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी गिरफ्तारी को ‘अवैध’ बताया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज है, उनमें सजा 7 साल से कम है, ऐसे में गिरफ्तारी की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है। आरोपी पक्ष ने पुलिस पर दबाव में काम करने और एफआईआर व रिमांड शीट में समय के हेरफेर का भी आरोप लगाया है।
अब सबकी नजरें 17 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ सरकार की रिपोर्ट यह तय करेगी कि ‘क्रिकेट के नाम पर ठगी’ के इस खेल में कौन-कौन शामिल है।



