
देहरादून। उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। गुरुवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और शासन के विभिन्न निर्माण विभागों के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक संपन्न हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में न केवल वर्तमान परियोजनाओं की समीक्षा की गई, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य की रूपरेखा तय करने वाले कई नए और महत्वाकांक्षी प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई गई।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का ध्यान अब केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ और ‘एंप्लॉयमेंट जनरेशन’ को प्राथमिकता दे रही है।
युवाओं के लिए बड़ी सौगात: हर जनपद में ‘मॉडल स्किल सेंटर’
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कौशल विकास रहा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने एडीबी के अधिकारियों से विशेष अनुरोध किया कि वे प्रदेश में कौशल विकास (Skill Development) से संबंधित प्रोजेक्ट्स पर अपना निवेश बढ़ाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कम से कम एक ‘मॉडल स्किल सेंटर’ स्थापित किया जाए।
यह केंद्र पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्रों से अलग होंगे। मुख्य सचिव ने जोर देकर कहा कि इन सेंटर्स का मुख्य फोकस युवाओं के कौशल विकास के साथ-साथ उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर के सर्टिफिकेशन और 100 प्रतिशत प्लेसमेंट पर होगा। उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में एक ‘होलिस्टिक प्लान’ (समग्र योजना) तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उत्तराखंड का युवा स्थानीय और वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार हो सके।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी: टिहरी रिंग रोड को प्राथमिकता
पहाड़ी राज्य होने के नाते उत्तराखंड के लिए सड़कों और पुलों की मजबूती जीवन रेखा के समान है। मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिए कि प्रदेश में नए पुलों के निर्माण और संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन (भूस्खलन क्षेत्रों) के स्थायी उपचार के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर एडीबी को भेजे जाएं।
बैठक में टिहरी झील रिंग रोड का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्य सचिव ने इस परियोजना को राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया। उन्होंने एडीबी के अधिकारियों से इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता पर लेते हुए वित्तपोषित करने की बात कही। रिंग रोड के बनने से न केवल टिहरी में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए आवागमन भी सुगम होगा।
शहरी विकास और अर्बन मोबिलिटी पर जोर
बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों को देखते हुए, बैठक में ‘अर्बन मोबिलिटी’ और ‘अर्बन प्लानिंग’ पर भी गहन मंथन हुआ। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में अब सुनियोजित विकास की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने एडीबी को ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड टाउनशिप डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव सौंपने की बात कही।
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ग्रीनफील्ड टाउनशिप: नए सिरे से बसाए जाने वाले आधुनिक शहर।
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ब्राउनफील्ड टाउनशिप: मौजूदा शहरी क्षेत्रों का पुनर्विकास और आधुनिकीकरण।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों में ट्रैफिक दबाव कम करना और नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है।
उद्यान और कृषि क्षेत्र में नया निवेश
उत्तराखंड की आर्थिकी में उद्यान विभाग (Horticulture) की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्य सचिव ने कहा कि जायका (JICA) द्वारा वित्तपोषित जनपदों को छोड़कर, शेष जनपदों की उद्यान संबंधी योजनाओं को एडीबी के दायरे में लाया जाए। इससे राज्य के फल उत्पादकों और किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार लिंकेज प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
एडीबी की कंट्री डायरेक्टर ने जताई प्रसन्नता
बैठक में एडीबी की कंट्री डायरेक्टर मियो ओका (Mio Oka) ने उत्तराखंड में चल रहे वर्तमान प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की दूरगामी सोच और नए प्रोजेक्ट्स के प्रति उत्साह की सराहना की। मियो ओका ने भरोसा दिलाया कि एडीबी इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करेगा और विभागों द्वारा जल्द प्रस्ताव उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद जताई।
प्रशासनिक तत्परता और भविष्य की राह
मुख्य सचिव ने सभी विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे अपनी योजनाओं की प्राथमिकता (Prioritization) तय करें। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स को चरणवार तरीके से प्रस्तुत किया जाए ताकि वित्तपोषण और क्रियान्वयन में कोई बाधा न आए।
इस अवसर पर शासन के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री नितेश कुमार झा, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, श्री दिलीप जावलकर और एडीबी से श्री अशोक श्रीवास्तव सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की यह पहल दर्शाती है कि उत्तराखंड सरकार अब ‘रिएक्टिव’ के बजाय ‘प्रोएक्टिव’ मोड में काम कर रही है। एडीबी के सहयोग से प्रस्तावित ये उत्तराखण्ड विकास परियोजनाएं यदि समय पर धरातल पर उतरती हैं, तो यह न केवल राज्य के बुनियादी ढांचे को बदल देंगी, बल्कि पलायन जैसी गंभीर समस्या पर अंकुश लगाने में भी मील का पत्थर साबित होंगी।



