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उत्तर प्रदेश: यूपी में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से तबाही, 30 जिलों में फसलें बर्बाद, एक हफ्ते में 20 लोगों की मौत

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से जारी बेमौसम बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राज्य के 30 से अधिक जिलों में तेज हवाओं और भारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह तबाह हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते न केवल खेती-किसानी प्रभावित हुई है, बल्कि जान-माल का भी बड़ा नुकसान हुआ है।

मौसम विभाग के अनुसार, अब प्रदेश में धीरे-धीरे मौसम साफ होने की संभावना है। आने वाले दिनों में मौसम शुष्क रहेगा, जिससे तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। अनुमान है कि अधिकतम तापमान में 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि दर्ज की जाएगी, जबकि न्यूनतम तापमान में खास बदलाव नहीं होगा। इसका मतलब है कि लोगों को एक बार फिर तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

बीते 24 घंटों के दौरान उन्नाव, श्रावस्ती, शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत सहित कई जिलों में तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। तेज हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई, जिससे खड़ी फसलें खेतों में ही गिर गईं। गेहूं, सरसों और दलहन जैसी प्रमुख फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, ऐसे में फसल बर्बाद होने से उनकी आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो गई है।

किसानों का कहना है कि फसल कटाई के समय आई इस बेमौसम बारिश ने उनकी सालभर की मेहनत को बर्बाद कर दिया। खेतों में पानी भर जाने से कटाई रुक गई है और जहां कटाई हो चुकी थी, वहां भी अनाज भीगकर खराब हो गया है। इससे बाजार में फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी और किसानों को उचित मूल्य मिलने में भी परेशानी होगी।

राज्य सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलाधिकारियों को फसलों के नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में आंधी-तूफान और बारिश से 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 33 पशुओं की भी मौत हुई है। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि यह प्राकृतिक आपदा कितनी गंभीर रही है। कई जगह पेड़ गिरने और बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे लोगों की जान गई है।

राजधानी लखनऊ में गुरुवार को मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, कुछ स्थानों पर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। यहां अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। बुधवार को पूरे दिन बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई थी। अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 10 डिग्री कम था, जबकि न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

प्रदेश का उरई जिला बुधवार को सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हालांकि यह भी सामान्य से 5 डिग्री कम था। वहीं, न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 7 डिग्री कम है। इससे साफ है कि मौसम में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। इसके चलते अगले 6 से 7 दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा और तापमान में लगातार बढ़ोतरी होगी। हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कुल मिलाकर, इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने उत्तर प्रदेश के किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की नजरें सरकार द्वारा घोषित मुआवजे और राहत कार्यों पर टिकी हैं, ताकि प्रभावित किसानों को कुछ राहत मिल सके और वे इस संकट से उबर सकें।

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