
नई दिल्ली: कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर असम पुलिस की टीम पहुंचने के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। पुलिस टीम के साथ दिल्ली पुलिस के अधिकारी भी मौजूद थे। हालांकि, जब टीम पूछताछ के लिए पहुंची तो खेड़ा घर पर नहीं मिले। इस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जो कल तक गिरफ्तारी की बात कर रहे थे, आज पुलिस पहुंची तो वह हैदराबाद चले गए—हमारे हिसाब से वह भाग गए हैं।”
दरअसल, यह पूरा मामला पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए उन गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जो उन्होंने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री सरमा और उनकी पत्नी पर लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि सरमा की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके समर्थकों को विदेश से ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो उनके अनुसार स्वतंत्र भारत की राजनीति में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ सबसे बड़े खुलासों में से एक हो सकते हैं।
खेड़ा के इन आरोपों के बाद सियासी माहौल गर्मा गया था। भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया। मुख्यमंत्री सरमा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित झूठ” बताया। उन्होंने साफ कहा कि इन आरोपों का मकसद असम की जनता को गुमराह करना है और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है।
इसी बीच, सरमा ने पवन खेड़ा को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यदि वे अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाते हैं, तो उनके खिलाफ आपराधिक और दीवानी, दोनों तरह के मानहानि के मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और मानहानिकारक बयानों के लिए खेड़ा को पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाएगा।
अल्टीमेटम के महज 48 घंटे के भीतर ही असम पुलिस की टीम दिल्ली पहुंच गई और पवन खेड़ा के घर पर दबिश दी। इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, पुलिस को खेड़ा घर पर नहीं मिले, जिससे इस पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।
मुख्यमंत्री सरमा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह व्यवहार संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि “अगर कोई व्यक्ति अपने आरोपों को लेकर आश्वस्त है, तो उसे जांच का सामना करना चाहिए, न कि उससे बचना चाहिए।” उनके इस बयान को कांग्रेस पर सीधा हमला माना जा रहा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और अधिक तूल पकड़ सकता है। एक तरफ जहां पवन खेड़ा के आरोपों की सत्यता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर असम पुलिस की त्वरित कार्रवाई को लेकर भी बहस छिड़ गई है। कई लोग इसे कानून का सामान्य पालन मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बता रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुके हैं। यदि सरमा अपने बयान के अनुसार मानहानि का मुकदमा दर्ज कराते हैं, तो यह मामला अदालत तक पहुंच सकता है, जहां दोनों पक्षों को अपने-अपने दावों को साबित करना होगा।
फिलहाल, पवन खेड़ा कहां हैं और आगे क्या कदम उठाएंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। वहीं, असम पुलिस की अगली कार्रवाई क्या होगी, यह भी देखना दिलचस्प होगा। इस विवाद ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी कार्रवाई के बीच बढ़ती खाई को उजागर कर दिया है।



