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पाकिस्तान में ‘लॉकडाउन जैसे’ हालात: ईंधन संकट के चलते रात 8 बजे बाजार बंद, 10 बजे के बाद शादियों पर रोक

The Hill India News
Last updated: April 7, 2026 11:38 am
The Hill India News
Published: April 7, 2026
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान में बढ़ते ईंधन संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच सरकार ने बड़े स्तर पर सख्त कदम उठाए हैं, जिनके चलते देश के कई हिस्सों में ‘लॉकडाउन जैसे’ हालात बन गए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक के बाद सरकार ने 7 अप्रैल से नई पाबंदियां लागू करने का फैसला किया है। इन पाबंदियों के तहत अब देशभर में बाजार, शॉपिंग मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर रात 8 बजे तक ही खुले रहेंगे, जबकि रेस्टोरेंट, बेकरी और शादी समारोह से जुड़े स्थानों को रात 10 बजे तक बंद करना अनिवार्य कर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि यह फैसला ऊर्जा बचाने के उद्देश्य से लिया गया है, क्योंकि पाकिस्तान इस समय गंभीर ईंधन संकट से जूझ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में तेज उछाल और सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने देश की आर्थिक स्थिति को और अधिक दबाव में डाल दिया है। खासतौर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों पर साफ देखा जा रहा है।

सरकारी आदेश के अनुसार पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान और आजाद जम्मू-कश्मीर में ये नियम सख्ती से लागू किए जाएंगे। हालांकि खैबर पख्तूनख्वा के कुछ डिविजनल मुख्यालयों में बाजारों को रात 9 बजे तक खोलने की सीमित छूट दी गई है। आवश्यक सेवाओं जैसे मेडिकल स्टोर और फार्मेसी को इन पाबंदियों से बाहर रखा गया है ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई परेशानी न हो।

नई गाइडलाइन के तहत शादी समारोहों पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। अब मैरिज हॉल रात 10 बजे तक ही खुले रहेंगे और निजी घरों में होने वाली शादियों को भी इसी समय सीमा के भीतर समाप्त करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा खपत में कमी आएगी और देश के सीमित संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।

इस बीच आम लोगों को कुछ राहत देने के लिए सरकार ने गिलगित और मुजफ्फराबाद में एक महीने के लिए मुफ्त इंटरसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की घोषणा भी की है। यह कदम खासतौर पर उन लोगों के लिए उठाया गया है जो ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण परिवहन खर्च वहन करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

दरअसल, 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति में बाधा उत्पन्न की। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।

इसी वैश्विक उथल-पुथल का असर पाकिस्तान पर भी पड़ा है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 6 मार्च को सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद 2 अप्रैल तक पेट्रोल की कीमत 458.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। हालांकि बाद में सरकार ने पेट्रोलियम लेवी में कटौती करते हुए पेट्रोल की कीमत को एक महीने के लिए घटाकर 378 रुपये प्रति लीटर कर दिया, लेकिन इसके बावजूद आम जनता पर आर्थिक बोझ बना हुआ है।

सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए हैं। इनमें सरकारी कार्यालयों के लिए सप्ताह में केवल चार कार्यदिवस लागू करना, फ्यूल अलाउंस में कटौती और विभिन्न विभागों के खर्चों में 20 प्रतिशत तक कमी करना शामिल है। इन उपायों का मकसद सरकारी खर्च को कम करना और ऊर्जा संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में जल्द स्थिरता नहीं आती है, तो पाकिस्तान को और भी कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। वहीं आम नागरिकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि महंगाई पहले ही उच्च स्तर पर है और अब ऊर्जा संकट ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान में लागू की गई ये नई पाबंदियां देश की बिगड़ती आर्थिक और ऊर्जा स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार के ये कदम संकट को कितना नियंत्रित कर पाते हैं और जनता को इससे कितनी राहत मिलती है।

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