
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी ने जिला चिकित्सालय कोरोनेशन का सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डीएम का सख्त तेवर देख अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। व्यवस्थाओं में ढिलाई और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर डीएम ने मौके पर ही ‘चंदन लैब’ का आधा भुगतान रोकने के निर्देश दिए, साथ ही मरीजों की सुविधा के लिए पैथोलॉजी का समय एक घंटा बढ़ा दिया।
चंदन लैब पर बड़ी कार्रवाई: 24 घंटे सेवा न मिलने पर रुकेगा भुगतान
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल ने निजी अनुबंध पर संचालित ‘चंदन लैब’ की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। अनुबंध के अनुसार, लैब को 24×7 यानी दिन-रात सेवाएं देनी अनिवार्य हैं। जब डीएम ने लैब इंचार्ज से रात्रि में लिए गए सैंपल का विवरण मांगा, तो संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।
इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम ने निर्देश दिए:
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जांच रिपोर्ट तलब: एसडीएम सदर और सीएमओ को पिछले 3 महीनों की दिन-रात की सैंपल रिपोर्ट की संयुक्त जांच करने को कहा गया है।
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भुगतान पर रोक: यदि जांच में अनुबंध का उल्लंघन पाया जाता है, तो चंदन लैब का 50 प्रतिशत भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा।
मरीजों को राहत: पैथोलॉजी का समय बढ़ा, 10 लाख का बजट स्वीकृत
अस्पताल की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब के बाहर मरीजों की लंबी कतार देख जिलाधिकारी ने मौके पर ही समाधान निकाला। उन्होंने लैब के बंद होने का समय सुबह 11 बजे से बढ़ाकर 12 बजे करने का आदेश दिया। डीएम ने स्पष्ट कहा कि जितने भी मरीज सैंपल देने के लिए लाइन में लगे हैं, उन सभी का सैंपल आज ही लिया जाए।
इसके अलावा, अस्पताल के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए डीएम ने अपनी वित्तीय शक्तियों का प्रयोग करते हुए 10 लाख रुपये की धनराशि मौके पर ही स्वीकृत की। इस बजट से निम्नलिखित कार्य तुरंत शुरू किए जाएंगे:
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किचन और ओपीडी मरम्मत
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गायनी ओटी (Gynae OT) का सुदृढ़ीकरण
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वेयरहाउस का नवीनीकरण
ब्लड बैंक के लिए ‘डेडलाइन’ तय, रेफरल केस पर मांगी रिपोर्ट
कोरोनेशन अस्पताल में निर्माणाधीन ब्लड बैंक का जायजा लेते हुए जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को 15 मार्च 2026 तक हर हाल में कार्य पूर्ण करने की डेडलाइन दी है। जिला प्रशासन ने ब्लड बैंक के लिए डॉक्टर, स्टाफ और अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था जिला स्तर से ही सुनिश्चित कर दी है। डीएम ने इस निर्माण कार्य का ‘थर्ड पार्टी निरीक्षण’ कराने के भी निर्देश दिए ताकि गुणवत्ता से समझौता न हो।
वहीं, अस्पताल में गायनी (स्त्री रोग) विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर किए जाने की शिकायतों पर डीएम ने सख्त संज्ञान लिया। उन्होंने एसडीएम और सीएमओ को संयुक्त आख्या प्रस्तुत करने को कहा है ताकि रेफरल के खेल पर रोक लग सके।
बाल वार्ड में अनोखी पहल: फोन छोड़ें, पेंटिंग से जुड़ें बच्चे
निरीक्षण के दौरान डीएम सविन बंसल का एक संवेदनशील पक्ष भी सामने आया। बाल चिकित्सा वार्ड में एक बच्चे को मोबाइल फोन देखते देख डीएम ने अभिभावकों से मार्मिक अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को फोन की लत से दूर रखना जरूरी है। इसके विकल्प के रूप में उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए:
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बाल वार्ड की लाइब्रेरी को सक्रिय किया जाए।
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बच्चों को ड्राइंग बुक्स और कलर उपलब्ध कराए जाएं ताकि उनकी रचनात्मकता (Creativity) बढ़े।
हिलांस कैंटीन और पार्किंग: व्यवस्था देख हुए संतुष्ट
जहां एक तरफ डीएम ने कमियों पर फटकार लगाई, वहीं अस्पताल में संचालित एसएचजीएस हिलांस कैंटीन और ऑटोमेटेड मैकेनिकल पार्किंग की सफलता पर संतोष भी जताया।
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हिलांस कैंटीन: प्रतिदिन 500 उपभोक्ताओं की क्षमता वाली इस कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता से तीमारदार और स्टाफ अत्यंत संतुष्ट दिखे।
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पार्किंग व्यवस्था: अस्पताल में बनी आधुनिक पार्किंग अपनी 100% क्षमता के साथ चल रही है, जिससे परिसर में जाम की स्थिति खत्म हुई है और मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
“मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बदलेगी सूरत”
जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधीक्षक (PMS) को सख्त निर्देश दिए कि फार्मेसी में जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक हमेशा उपलब्ध रहना चाहिए और दवा कंपनियों के साथ हुए एग्रीमेंट का सख्ती से पालन हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में कोरोनेशन अस्पताल को एक मॉडल अस्पताल बनाने की कवायद जारी है और व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कोताही अक्षम्य होगी।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक मन्नू जैन सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।



