
देहरादून। उत्तराखंड वन महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। लंबे समय से पदोन्नति और नई जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे अधीनस्थ अधिकारियों के लिए सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। विभाग ने वरिष्ठता के आधार पर 41 डिप्टी रेंजर्स को प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) के रूप में नई तैनाती दे दी है। इस फैसले को न केवल विभागीय ढांचे को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है, बल्कि इसे चुनावी वर्ष से पहले कर्मचारियों को साधने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।
मीनाक्षी जोशी का ‘विदाई’ उपहार: जिम्मेदारी छोड़ने से ठीक पहले जारी की लिस्ट
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, मानव संसाधन (HR) की जिम्मेदारी संभाल रहीं एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (APCCF) मीनाक्षी जोशी ने यह सूची अपनी इस जिम्मेदारी को छोड़ने से ऐन वक्त पहले जारी की।
विभागीय फेरबदल के तहत मानव संसाधन का प्रभार अब पीके पात्रो को सौंप दिया गया है। ऐसे में मीनाक्षी जोशी द्वारा अपने कार्यकाल के अंतिम क्षणों में इस महत्वपूर्ण फाइल को क्लियर करना उनके कार्य के प्रति समर्पण और अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मीनाक्षी जोशी की देखरेख में इस सूची पर हफ्तों से गहन मंथन चल रहा था।
वरिष्ठता बनी आधार: वन मंत्री सुबोध उनियाल ने दी हरी झंडी
उत्तराखंड वन विभाग पदोन्नति की इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा गया है। अधिकारियों का चयन विशुद्ध रूप से उनकी सीनियरिटी (वरिष्ठता) और उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर किया गया है। विभाग के भीतर लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि जो डिप्टी रेंजर वर्षों से रेंजर का कार्यभार संभाल रहे हैं, उन्हें औपचारिक रूप से जिम्मेदारी दी जाए। वन मंत्री सुबोध उनियाल के अंतिम अनुमोदन के बाद, विभाग ने देर शाम यह आदेश जारी कर दिए।
इन 41 जांबाजों को मिली नई जिम्मेदारी
नई सूची के अनुसार, जिन अधिकारियों को प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी बनाया गया है, उनमें वीरेंद्र दत्त बडोला, देवेंद्र सिंह, ओम प्रकाश, हेमचंद्र आर्य, खीम सिंह संभल और कमल सिंह पवार जैसे अनुभवी नाम शामिल हैं। सूची में त्रिभुवन सिंह बोरा, चंद्रशेखर शर्मा, नेत्र सिंह, उत्तम सिंह रावत, गणेश बहुगुणा, राजेश कुमार और राजेंद्र प्रसाद आर्य को भी महत्वपूर्ण क्षेत्रों की कमान सौंपी गई है।
इसके अलावा दान सिंह हरकोटिया, संजय प्रसाद सेमवाल, विशन दत्त जोशी, ओमप्रकाश वर्मा, संतोष कुमार, दिनेश कुकरेती, सुनील सिंह रावत, भगवत प्रसाद भादुला, अनिल कुमार भादुला, राम सिंह जेठा, अशोक कुमार, पंकज शर्मा, बलबीर सिंह, ललित मोहन आर्य, मनोज कुमार, अनीता रावत, प्रमोद चंद भट्ट, बाबू सिंह, रमेश चंद भट्ट, दीपक कुमार, यशपाल सिंह, दीप चंद जोशी, कुंदन सिंह बिष्ट, धर्मानंद पाठक, मनोज कुमार तिवारी, राकेश सिंह राणा, दिनेश सिंह और अखिलेश रावत को भी नई तैनाती के साथ रेंजर का दायित्व मिला है।
फील्ड में दिखेगा असर: वन्यजीव प्रबंधन और अवैध कटान पर लगेगी लगाम
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय का सीधा असर उत्तराखंड के जंगलों की सुरक्षा पर पड़ेगा। रेंजर का पद क्षेत्रीय प्रबंधन में ‘बैकबोन’ यानी रीढ़ की हड्डी माना जाता है। अब तक कई रेंज प्रभारियों के बिना चल रही थीं या अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे थीं।
41 नए अधिकारियों की तैनाती से निम्नलिखित क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद है:
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वन्यजीव सुरक्षा: मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे।
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अवैध गतिविधियां: लकड़ी तस्करी और अवैध शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
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वनाग्नि प्रबंधन: गर्मियों के सीजन में वनों को आग से बचाने के लिए अब हर रेंज में एक पूर्णकालिक प्रभारी मौजूद होगा।
कर्मचारियों में उत्साह, ढांचे में मजबूती
वन विभाग के भीतर इस निर्णय का जोरदार स्वागत हुआ है। कई डिप्टी रेंजर वर्षों से एक ही पद पर बने हुए थे, जिससे उनमें निराशा का भाव पनप रहा था। औपचारिक रूप से प्रभारी बनाए जाने के बाद उनके मनोबल में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से कार्य प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही तय करना आसान होगा।
उत्तराखंड वन विभाग पदोन्नति का यह आदेश केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह राज्य की बेशकीमती प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखने की दिशा में एक रणनीतिक निवेश है। जब क्षेत्रीय स्तर पर नेतृत्व मजबूत होता है, तो उसका सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देता है। अब देखना होगा कि ये 41 नए प्रभारी अधिकारी अपनी नई भूमिका में देवभूमि के वनों को कितना सुरक्षित रख पाते हैं।



