
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के जसपुर क्षेत्र से एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक टकराव की खबर सामने आई है, जहां मूर्ति स्थापना को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि दो प्रमुख नेताओं के समर्थक आपस में भिड़ गए। स्थिति तनावपूर्ण हो गई और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और फिलहाल मूर्ति स्थापना का कार्य रुकवा दिया गया है।
पूरा मामला जसपुर के ठाकुर मंदिर के सामने रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति स्थापना से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस विधायक आदेश चौहान अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और मूर्ति स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी। इस दौरान वहां पहले से लगी टाइल्स को हटवाया जाने लगा, जिससे स्थानीय दुकानदारों और क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी फैल गई।
स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए भाजपा के पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल को सूचना दी। सूचना मिलते ही सिंघल अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने बिना प्रशासनिक अनुमति के हो रहे कार्य का विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही समय में वहां भारी भीड़ इकट्ठा हो गई और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। समर्थकों के बीच नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ती देख किसी ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर विवाद को शांत कराया और फिलहाल मूर्ति स्थापना का काम रुकवा दिया गया है। हालांकि, इलाके में अब भी तनाव की स्थिति बनी हुई है और प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।
इस पूरे मामले पर कांग्रेस विधायक आदेश चौहान ने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से महिलाओं और ब्राह्मण समाज की मांग रही है कि वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति स्थापित की जाए। उनका कहना है कि यह स्थान पहले अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है और इसके लिए प्रशासन को प्रस्ताव भी भेजा गया था। उन्होंने इस पहल को महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यह कदम समाज में प्रेरणा देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर भाजपा के पूर्व विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंघल ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के जबरन निर्माण कार्य किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कई लोग वहां महाराज अग्रसेन की मूर्ति स्थापित करना चाहते हैं और इस संबंध में जिलाधिकारी को आवेदन भी दिया गया है, जिस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सिंघल ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक अपने समर्थकों के साथ मिलकर जबरदस्ती प्लेटफॉर्म तैयार करवाने की कोशिश कर रहे थे, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में सभी पक्षों की राय लेकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पक्षों से बातचीत की जा रही है और जल्द ही कोई संतुलित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थलों पर मूर्ति स्थापना जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेप और आपसी सहमति की कमी किस तरह बड़े विवाद का रूप ले सकती है। स्थानीय स्तर पर संवाद और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन न होने से ऐसे हालात पैदा होते हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाते हैं।
फिलहाल पुलिस की मौजूदगी से स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इलाके में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। प्रशासन की अगली कार्रवाई और निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



