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उत्तराखंडफीचर्ड

रुद्रप्रयाग जिले के माथे पर ‘बाल विवाह’ का कलंक, खुद अपनी ही शादी रुकवाने को आगे आई नाबालिग; 26 मामलों ने बढ़ाई चिंता

The Hill India News
Last updated: April 15, 2026 12:57 pm
The Hill India News
Published: April 15, 2026
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प्रतीकात्मक फाइल फोटो
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रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड के शांत पहाड़ों में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी एक बानगी रुद्रप्रयाग जिले में देखने को मिली है। प्रशासन और महिला सशक्तिकरण विभाग की तमाम कोशिशों और जागरूकता अभियानों के दावों के बीच, महज 48 घंटों के भीतर बाल विवाह का दूसरा मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार किसी पड़ोसी या मुखबिर ने नहीं, बल्कि खुद उस नाबालिग बेटी ने साहस दिखाया जिसकी उसी रात ‘गुपचुप’ तरीके से शादी होने वाली थी।

Contents
प्रशासन की तत्परता: ऐन वक्त पर पहुंची टीमप्रेम प्रसंग और नशे का हवाला: मां का अजीब तर्ककानून का हंटर: 2 साल की सजा और 1 लाख जुर्मानाUCC के प्रावधानों से कराया रूबरूचिंताजनक आंकड़े: एक साल में 26 शादियां रुकींविशेषज्ञों की राय: मेच्योरिटी की कमी और स्वास्थ्य जोखिम

प्रशासन की तत्परता: ऐन वक्त पर पहुंची टीम

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग को जैसे ही चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से सूचना मिली, विभाग के कान खड़े हो गए। जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम ने तत्काल मोर्चा संभाला। जब टीम मौके पर पहुंची, तो वहां शादी की तैयारियां अंतिम चरण में थीं और उसी रात सात फेरे होने वाले थे।

शुरुआत में परिजनों ने टीम को गुमराह करने और उम्र छिपाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन जब प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्ती दिखाई और दस्तावेजों की मांग की, तो सारा सच शीशे की तरह साफ हो गया।

प्रेम प्रसंग और नशे का हवाला: मां का अजीब तर्क

पूछताछ के दौरान नाबालिग की मां ने जो तर्क दिया, वह आज के आधुनिक समाज में माता-पिता की असुरक्षा और मानसिकता को दर्शाता है। मां का कहना था कि बालिका का देहरादून में किसी युवक के साथ प्रेम प्रसंग था, जो नशे की लत का शिकार है। लड़की द्वारा घर से भागने की धमकी दिए जाने के डर से परिजनों ने जल्दबाजी में यह आत्मघाती फैसला लिया और उसकी शादी कहीं और तय कर दी। परिजनों को लगा कि शादी कर देने से वे अपनी ‘जिम्मेदारी’ से मुक्त हो जाएंगे, भले ही वह कानूनन अपराध क्यों न हो।

कानून का हंटर: 2 साल की सजा और 1 लाख जुर्माना

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की गंभीरता से अवगत कराया। केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट और बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजू खन्ना ने परिजनों को स्पष्ट किया कि रुद्रप्रयाग में बाल विवाह को बढ़ावा देना या उसमें शामिल होना उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेज सकता है। कानून के मुताबिक, इस अपराध में 2 साल तक के कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

प्रशासनिक दबाव और कानूनी कार्रवाई के डर से परिजनों ने तत्काल वर पक्ष को संदेश भेजा और बारात लाने से मना कर दिया। टीम ने न केवल शादी रुकवाई, बल्कि परिवार को सख्त हिदायत भी दी कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति होने पर सीधे कानूनी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

UCC के प्रावधानों से कराया रूबरू

इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब टीम ने उत्तराखंड में लागू होने जा रहे समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रावधानों की भी जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि अब विवाह के पंजीकरण और उम्र को लेकर नियम अत्यंत सख्त हो गए हैं। किसी भी धर्म या समुदाय का व्यक्ति यदि निर्धारित आयु से कम में विवाह करता है, तो वह न केवल शून्य माना जाएगा, बल्कि इसमें शामिल हर व्यक्ति दंड का भागी होगा।

चिंताजनक आंकड़े: एक साल में 26 शादियां रुकीं

रुद्रप्रयाग जिले के आंकड़े डराने वाले हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले एक साल के भीतर जिले में अब तक 26 बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं। यह संख्या केवल उन मामलों की है जो प्रशासन की नजर में आ पाए, न जाने कितनी शादियां आज भी गांवों के बंद कमरों में संपन्न हो रही हैं। विशेषकर रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी जिलों में इस कुप्रथा का ग्राफ ऊंचा बना हुआ है।

विशेषज्ञों की राय: मेच्योरिटी की कमी और स्वास्थ्य जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह एक लड़की के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। कम उम्र में गर्भवती होने से मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, मानसिक रूप से परिपक्व न होने के कारण ऐसी लड़कियां घरेलू हिंसा और मानसिक अवसाद का शिकार अधिक होती हैं।

रुद्रप्रयाग की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि समाज में बदलाव केवल कागजी कानूनों से नहीं आएगा। जब तक ग्रामीण स्तर पर शिक्षा, जागरूकता और बेटियों को सुरक्षित महसूस कराने वाला वातावरण तैयार नहीं होगा, तब तक रुद्रप्रयाग में बाल विवाह के मामले सामने आते रहेंगे। हालांकि, इस नाबालिग बेटी का अपनी शादी के खिलाफ खड़ा होना एक नई उम्मीद की किरण जगाता है कि अब बेटियां अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रही हैं।

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