
नई दिल्ली। संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में प्रियंका गांधी ने न केवल महिला आरक्षण के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता दोहराई, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों के जरिए बीजेपी के दावों को ‘आधा सच’ करार दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस महिलाओं के संरक्षण और सशक्तिकरण के पक्ष में हमेशा मजबूती से खड़ी रही है।
‘प्रधानमंत्री ने पेश किया आधा सच, विरोध बीजेपी ने किया था’
अपने भाषण की शुरुआत में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे वे ही महिला आरक्षण के एकमात्र प्रणेता रहे हों। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के भाषण से ऐसा लगा कि बीजेपी महिला आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक रही है, भले ही वह श्रेय न लेने का दावा करें। लेकिन हकीकत यह है कि उन्होंने केवल आधा सच बोला।”
प्रियंका गांधी ने सदन को याद दिलाया कि जब कांग्रेस सरकार महिला आरक्षण लाने का प्रयास कर रही थी, तब इसका असली विरोध किसने किया था। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि विरोध हुआ था, लेकिन यह नहीं बताया कि वह आप (भाजपा) ही थे जिन्होंने इसका कड़ा विरोध किया था। इसके वर्षों बाद, पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस ने ही पंचायत और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए रास्ता साफ किया।”
परिसीमन और लोकतंत्र के अस्तित्व पर सवाल
भाषण के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना की जटिलताओं में उलझाया जाता है, तो यह महिलाओं के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “अगर यह संविधान संशोधन विधेयक (मौजूदा स्वरूप में) पारित हो जाता है, तो इस देश में लोकतंत्र के मूल ढांचे पर संकट आ जाएगा।”
उनका तर्क था कि आरक्षण को भविष्य की अनिश्चित शर्तों के साथ जोड़ना वास्तव में इसे लागू करने की मंशा पर सवाल उठाता है। कांग्रेस की मांग रही है कि महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के और तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।
इतिहास के झरोखे से: 1928 की ‘मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट’ का जिक्र
प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष को इतिहास का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि महिला अधिकारों की लड़ाई 30 साल पुरानी नहीं, बल्कि लगभग एक सदी पुरानी है। उन्होंने कहा, “सत्ता पक्ष के साथियों को यह शायद पसंद न आए, लेकिन इसकी नींव उस नेहरू (जवाहरलाल नेहरू) ने नहीं रखी थी जिनका आप अक्सर नकारात्मक संदर्भों में जिक्र करते हैं। इसकी नींव उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने 1928 में रखी थी।”
उन्होंने विस्तार से बताया कि 1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता वाली समिति ने एक रिपोर्ट कांग्रेस कार्यसमिति को सौंपी थी, जिसमें 19 मौलिक अधिकारों को सूचीबद्ध किया गया था। प्रियंका ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की विचारधारा में महिलाओं को समान दर्जा और अधिकार देने की सोच आजादी से पहले ही स्पष्ट थी।
‘बीजेपी का श्रेय लेने का मोह बनाम कांग्रेस की विचारधारा’
प्रियंका गांधी महिला आरक्षण भाषण के दौरान इस बात पर भी केंद्रित रहीं कि कैसे 2023 में राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के बाद सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जब 2023 में सरकार ने इस अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित करने का प्रस्ताव रखा, तो कांग्रेस ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी विचारधारा के अनुरूप इसका पूरा समर्थन किया।
प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है और श्रेय लेने की होड़ में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आरक्षण कोई राजनीतिक उपहार नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है जिसे कांग्रेस ने हमेशा प्राथमिकता दी है।
महिलाओं के हक की लड़ाई जारी रहेगी
प्रियंका गांधी वाड्रा का यह भाषण न केवल आक्रामक था, बल्कि इसमें कांग्रेस के वैचारिक स्टैंड को मजबूती से रखा गया। उन्होंने अपने संबोधन का समापन यह कहते हुए किया कि कांग्रेस महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और आगे भी रहेगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रियंका गांधी के इस भाषण ने आगामी चुनावों से पहले महिला मतदाताओं के बीच कांग्रेस की छवि को एक ऐतिहासिक रक्षक के रूप में पेश करने का प्रयास किया है। साथ ही, उन्होंने बीजेपी के ‘नारी शक्ति’ कार्ड को चुनौती देते हुए इसे कांग्रेस की विरासत के रूप में परिभाषित करने की कोशिश की है।



