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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में बड़ा मौका: RBI ने खोली प्रीमैच्योर निकासी विंडो, निवेशकों को 200% से ज्यादा रिटर्न

The Hill India News
Last updated: April 20, 2026 11:35 am
The Hill India News
Published: April 20, 2026
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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 सीरीज-VII के निवेशकों को समय से पहले यानी प्रीमैच्योर निकासी का अवसर दिया है। खास बात यह है कि इस सीरीज में निवेश करने वालों को अब अपने मूल निवेश पर 200% से भी ज्यादा का शानदार रिटर्न मिल रहा है, जो इसे एक बेहद आकर्षक निवेश विकल्प साबित करता है।

दरअसल, यह बॉन्ड अक्टूबर 2020 में जारी किया गया था, उस समय इसकी कीमत 5,051 रुपये प्रति यूनिट थी। अब RBI द्वारा तय किया गया रिडेम्पशन प्राइस 15,254 रुपये प्रति यूनिट है। इस तरह निवेशकों को करीब 202% का सीधा लाभ मिल रहा है। जिन निवेशकों ने ऑनलाइन आवेदन करते समय प्रति ग्राम 50 रुपये की छूट का फायदा उठाया था, उनका रिटर्न और भी अधिक यानी लगभग 205% तक पहुंच गया है।

रिडेम्पशन प्राइस का निर्धारण इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के औसत के आधार पर किया जाता है। निकासी से पहले के तीन कार्यदिवसों के औसत मूल्य को ध्यान में रखते हुए यह कीमत तय की गई है। यही कारण है कि सोने की कीमतों में तेजी का सीधा फायदा SGB निवेशकों को मिला है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने से ही लाभ नहीं मिलता, बल्कि निवेशकों को सालाना 2.5% की निश्चित ब्याज दर भी दी जाती है। यह ब्याज हर छह महीने में निवेशकों के बैंक खाते में जमा किया जाता है। यानी निवेशक को दोहरी कमाई का फायदा मिलता है—एक ओर सोने की कीमत में वृद्धि और दूसरी ओर नियमित ब्याज आय।

इस बॉन्ड की कुल अवधि 8 साल की होती है, लेकिन निवेशकों को 5 साल पूरा होने के बाद प्रीमैच्योर निकासी का विकल्प दिया जाता है। यह निकासी केवल ब्याज भुगतान की तारीखों पर ही संभव होती है। इसी नियम के तहत अब SGB 2020-21 सीरीज-VII के निवेशकों को यह मौका मिला है, जो 20 अप्रैल से प्रभावी है।

जो निवेशक समय से पहले अपना पैसा निकालना चाहते हैं, उन्हें उसी बैंक शाखा, डाकघर या स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) के कार्यालय में आवेदन करना होगा, जहां से उन्होंने यह बॉन्ड खरीदा था। निकासी की राशि सीधे निवेशक के रजिस्टर्ड बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। RBI ने यह भी सलाह दी है कि निवेशक अपनी बैंक डिटेल, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को अपडेट रखें, ताकि भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।

टैक्स के नजरिए से भी SGB एक महत्वपूर्ण निवेश विकल्प है। यदि कोई निवेशक बॉन्ड को पूरी 8 साल की अवधि तक होल्ड करता है, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। हालांकि, अगर निवेशक समय से पहले निकासी करता है, तो उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा, बशर्ते बॉन्ड 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा गया हो। यदि होल्डिंग अवधि 12 महीने से कम है, तो मुनाफा निवेशक की सामान्य आय में जोड़कर टैक्स लगाया जाता है।

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यदि किसी निवेशक ने SGB को सेकेंडरी मार्केट से खरीदा है, तो उसे मैच्योरिटी पर भी टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में कैपिटल गेन पर टैक्स देना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, SGB पर मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज भी पूरी तरह टैक्सेबल होता है और इसे निवेशक की आय के अनुसार टैक्स स्लैब में जोड़ा जाता है।

वर्तमान में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की नई सीरीज जारी करने का कोई कैलेंडर घोषित नहीं किया है। ऐसे में यह योजना आगे जारी रहेगी या नहीं, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। लेकिन मौजूदा निवेशकों के लिए यह प्रीमैच्योर निकासी का अवसर निश्चित रूप से एक बड़ा मुनाफा कमाने का मौका बनकर आया है।

कुल मिलाकर, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह पारंपरिक सोने के निवेश की तुलना में अधिक सुरक्षित, लाभदायक और सुविधाजनक विकल्प है। निवेशकों के लिए यह सही समय है कि वे अपने निवेश का आकलन करें और बाजार की स्थिति को देखते हुए समझदारी से निर्णय लें।

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