हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र से धोखाधड़ी और जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक प्रतिष्ठित आश्रम के महंत को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के फर्जी नोटिस का डर दिखाकर न केवल लाखों रुपए ऐंठ लिए गए, बल्कि उनकी संपत्ति पर भी अवैध रूप से कब्जा जमाने का प्रयास किया गया। आरोपियों ने कथित तौर पर महंत की सरलता का लाभ उठाते हुए उन्हें कानूनी पचड़ों में फंसाने की धमकी दी और आश्रम का सौदा करने तक की जुर्रत की। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भरोसे की आड़ में बुना गया साजिश का जाल
मामला नगर कोतवाली क्षेत्र के भूपतवाला स्थित ‘मोक्षधाम सत्संग भजनानंद हरि ट्रस्ट’ का है। आश्रम के महंत गोपाल हरि द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, इस पूरी साजिश की पटकथा उनके पड़ोसी हरीश बंसल ने लिखी। हरीश ने आश्रम के ‘बेहतर प्रबंधन’ और विकास का झांसा देकर महंत का विश्वास जीता। उसने सुझाव दिया कि आश्रम को एक व्यवस्थित ट्रस्ट के रूप में चलाया जाना चाहिए।
महंत ने पड़ोसी होने के नाते हरीश पर भरोसा किया, जिसका फायदा उठाकर हरीश ने अपने दो परिचितों—नजफगढ़ (दिल्ली) निवासी सुनील कुमार और रोहतक (हरियाणा) निवासी सुमित कालिया—को ट्रस्टी के रूप में शामिल करवा दिया। देखते ही देखते, ट्रस्ट के संचालन की पूरी कमान इन तीनों आरोपियों के हाथ में आ गई। आरोपियों ने बैंक कार्यों और कागजी औपचारिकताओं का बहाना बनाकर महंत से कई कोरे चेक और महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए, जो बाद में ठगी का मुख्य हथियार बने।
CBI के फर्जी नोटिस से पैदा किया ‘खौफ’
साजिश का सबसे चौंकाने वाला पहलू अप्रैल 2025 में सामने आया। आरोपियों ने महंत गोपाल हरि को अंग्रेजी में लिखा एक आधिकारिक दिखने वाला पत्र थमाया और दावा किया कि यह सीबीआई की ओर से जारी किया गया नोटिस है। महंत को डराया गया कि सीबीआई उनके और आश्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने वाली है।
जांच और कानूनी कार्रवाई से बचने का ‘समाधान’ बताते हुए आरोपियों ने ‘सीबीआई जांच खर्च’ के नाम पर करीब 20 लाख रुपए की मांग की। डरे हुए महंत ने आरोपियों की बातों में आकर मोटी रकम उन्हें सौंप दी। इसके बाद भी आरोपियों का लालच कम नहीं हुआ; वे हाउस टैक्स और आश्रम के अन्य रखरखाव खर्चों का बहाना बनाकर लगातार महंत की जेब खाली करते रहे।
70 लाख में आश्रम बेचने की कोशिश और ब्लैकमेलिंग
ठगी की यह सीमा तब पार हो गई जब 21 नवंबर 2025 को आरोपी एक बाहरी व्यक्ति को लेकर आश्रम पहुँचे और सरेआम 70 लाख रुपए में आश्रम की संपत्ति का सौदा करने की बात करने लगे। आरोपियों ने 10 दिसंबर तक रजिस्ट्री कराने का दबाव बनाया। जब महंत ने इसका विरोध किया, तो सौदा रद्द कराने के बदले में और पैसों की मांग की गई।
दबाव में आकर महंत ने तीन लाख रुपए नकद और केनरा बैंक के पांच हस्ताक्षरित कोरे चेक आरोपियों को दे दिए। हालांकि, बार-बार की जा रही वसूली और आरोपियों के व्यवहार ने महंत के मन में संदेह पैदा कर दिया।
निर्मल अखाड़े से खुला राज
सच्चाई का पता लगाने के लिए महंत गोपाल हरि ने गुप्त रूप से जांच-पड़ताल शुरू की। उन्होंने निर्मल अखाड़ा और अन्य कानूनी विशेषज्ञों से संपर्क कर उस कथित सीबीआई नोटिस की वैधता जांची। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि सीबीआई द्वारा ऐसा कोई नोटिस कभी जारी ही नहीं किया गया था। वह पत्र पूरी तरह फर्जी और कंप्यूटर द्वारा एडिट किया गया था।
जब महंत ने अपनी रकम वापस मांगी और विरोध दर्ज कराया, तो आरोपियों ने अपना असली रंग दिखा दिया। आरोपियों ने न केवल पैसे लौटाने से इनकार किया, बल्कि महंत को जान से मारने की धमकी भी दी। आरोप है कि अब आरोपी व्हाट्सएप के जरिए महंत को ब्लैकमेल कर रहे हैं।
पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी रुख
नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि पीड़ित महंत की तहरीर के आधार पर हरीश बंसल, सुनील कुमार और सुमित कालिया के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें ट्रांजेक्शन हुए हैं और फर्जी सीबीआई नोटिस के स्रोत का भी पता लगाया जा रहा है।
हरिद्वार के संतों और स्थानीय निवासियों ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। धर्मनगरी में इस तरह की धोखाधड़ी ने आश्रमों की सुरक्षा और ट्रस्टियों के चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।



