देहरादून: डिजिटल निवेश के नाम पर मासूम निवेशकों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाले गिरोहों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर से शुरू हुए बहुचर्चित बिटकॉइन घोटाले में ईडी की टीम ने आज एक साथ तीन बड़े शहरों—देहरादून, दिल्ली और रुड़की—में छापेमारी (Red) की। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र बिंदु मुख्य आरोपी हेमंत मोहन शर्मा और उनके करीबियों से जुड़े ठिकाने रहे।
तीन शहरों में एक साथ ‘स्ट्राइक’
प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने गुरुवार सुबह एक साथ हेमंत मोहन शर्मा के विभिन्न ठिकानों पर दस्तक दी। राजधानी देहरादून के पॉश इलाके मोहिनी रोड स्थित हेमंत शर्मा के आवास पर जब ईडी की गाड़ियाँ रुकीं, तो इलाके में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह छापेमारी केवल देहरादून तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड के रुड़की में भी संदिग्ध ठिकानों को खंगाला जा रहा है। बिटकॉइन निवेश ठगी ईडी छापेमारी के इस अभियान में दर्जनों अधिकारी शामिल हैं, जो आरोपी के वित्तीय लेन-देन और बेनामी संपत्तियों के कच्चे चिट्ठे तलाश रहे हैं।
दिनेशपुर थाने से शुरू हुई थी जांच की आंच
इस पूरे प्रकरण की जड़ें उधम सिंह नगर के दिनेशपुर थाना क्षेत्र से जुड़ी हैं। दरअसल, हेमंत मोहन शर्मा के खिलाफ दिनेशपुर थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया था। पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि हेमंत ने उन्हें बिटकॉइन में निवेश कर रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाया और मोटा रिटर्न मिलने का लालच देकर करोड़ों रुपए ऐंठ लिए। जब निवेशकों को न तो उनका मूलधन मिला और न ही मुनाफा, तब जाकर इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ। पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद मामले की गंभीरता और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने केस अपने हाथ में लिया था।
करोड़ों की संपत्ति पहले ही हो चुकी है अटैच
हेमंत मोहन शर्मा ईडी के रडार पर काफी समय से था। जांच एजेंसी की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस छापेमारी से पहले ही ईडी आरोपी की लगभग 4 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर चुकी है। आज की कार्रवाई का उद्देश्य उन गुप्त दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को जुटाना है, जो इस घोटाले की गहराई तक पहुँचने में मदद कर सकें। मोहिनी रोड स्थित आवास पर छापेमारी के दौरान टीम ने कई लैपटॉप, बैंक पासबुक, डायरियाँ और अचल संपत्तियों के कागजात जब्त किए हैं।
मोहिनी रोड आवास पर घंटों चली तलाशी
देहरादून का मोहिनी रोड आवास हेमंत शर्मा का मुख्य निवास बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ईडी के अधिकारियों ने घर के हर कोने की तलाशी ली और परिवार के सदस्यों से वित्तीय स्रोतों के बारे में पूछताछ की। जांच एजेंसी को संदेह है कि बिटकॉइन के नाम पर जुटाई गई रकम को रियल एस्टेट और अन्य शेल कंपनियों के माध्यम से सफेद करने की कोशिश की गई है। छापेमारी के दौरान टीम ने डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता दी है, क्योंकि बिटकॉइन जैसे अपराधों में ट्रांजेक्शन के डिजिटल पदचिह्न (Digital Footprints) ही सबसे अहम सबूत होते हैं।
निवेशकों को भारी रिटर्न का ‘मायाजाल’
आरोपी हेमंत शर्मा की कार्यप्रणाली वैसी ही थी जैसी आमतौर पर ‘पोंजी स्कीम्स’ की होती है। वह लोगों को यह समझाने में सफल रहा कि बिटकॉइन एक ऐसी जादुई मुद्रा है जो कम समय में निवेश को दोगुना या तिगुना कर सकती है। भोले-भाले निवेशकों ने अपनी जमापूंजी इस उम्मीद में लगा दी कि उनका भविष्य सुरक्षित होगा, लेकिन अंत में उनके हाथ केवल आश्वासन और खाली बैंक खाते लगे। ईडी अब उन ‘एजेंटों’ की भी तलाश कर रही है जो हेमंत के लिए क्लाइंट ढूंढने का काम करते थे।
ED की सलाह: सतर्क रहें निवेशक
इस कार्रवाई के बीच ईडी और स्थानीय पुलिस ने आम जनता के लिए भी चेतावनी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की डिजिटल करेंसी या अनधिकृत निवेश स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें। डिजिटल निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी में रिकवरी की संभावना बेहद कम होती है, इसलिए लालच में आकर अपनी मेहनत की कमाई जोखिम में न डालें।
आज की छापेमारी में बरामद दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ईडी हेमंत मोहन शर्मा को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही उत्तराखंड के कुछ अन्य सफेदपोशों और बिल्डरों के नाम भी सामने आने की संभावना है, जिनके साथ आरोपी के व्यापारिक संबंध रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय की इस आक्रामक कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि आर्थिक अपराधों में लिप्त लोगों के लिए अब बचने की राह आसान नहीं होगी।



