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शिमला की वादियों से चलेगा देश: 27 अप्रैल से ‘द रिट्रीट’ में शिफ्ट होगा राष्ट्रपति कार्यालय; 175 साल पुरानी लकड़ी की इमारत बनेगी सत्ता का शिखर

The Hill India News
Last updated: April 23, 2026 2:24 pm
The Hill India News
Published: April 23, 2026
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@Rashtrapatiniwas
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शिमला: आगामी 27 अप्रैल से देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी कहे जाने वाले शिमला की फिजाओं में एक अलग ही हलचल दिखने वाली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने छह दिवसीय हिमाचल प्रवास के लिए शिमला आ रही हैं। इस दौरे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन छह दिनों के लिए भारत का राष्ट्रपति कार्यालय अस्थाई रूप से दिल्ली के रायसीना हिल्स से शिफ्ट होकर शिमला के मशोबरा की पहाड़ियों में स्थित ‘राष्ट्रपति निवास’ में संचालित होगा।

Contents
दिल्ली से बाहर सत्ता का दूसरा केंद्र175 साल पुराना इतिहास: मिट्टी और लकड़ी का बेजोड़ संगमप्राकृतिक वैभव: सेब के बागान और ट्यूलिप गार्डनपर्यटकों के लिए फिलहाल ‘नो एंट्री’प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा घेरा

हिमाचल प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने इस हाई-प्रोफाइल दौरे के लिए अपनी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर प्रोटोकॉल तक, हर पहलू पर बारीक नजर रखी जा रही है।

दिल्ली से बाहर सत्ता का दूसरा केंद्र

भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास दिल्ली के बाहर केवल दो ही स्थानों पर हैं—एक दक्षिण में हैदराबाद (राष्ट्रपति निलयम) और दूसरा उत्तर में शिमला (द रिट्रीट)। यही कारण है कि राष्ट्रपति का शिमला दौरा न केवल एक औपचारिक प्रवास है, बल्कि यह प्रशासनिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

27 अप्रैल से 2 मई तक राष्ट्रपति सचिवालय का पूरा कामकाज यहीं से होगा। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति भवन की तमाम जरूरी फाइलें और दस्तावेज विशेष सुरक्षा के बीच शिमला लाए जाएंगे। इस दौरान राष्ट्रपति देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक कार्यों का निपटारा इसी शांत और सुरम्य वातावरण के बीच करेंगी।

175 साल पुराना इतिहास: मिट्टी और लकड़ी का बेजोड़ संगम

शिमला से लगभग 12 किलोमीटर दूर मशोबरा की पहाड़ियों में स्थित यह ‘राष्ट्रपति निवास’ वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है। 175 साल से भी अधिक पुरानी इस इमारत को ‘द रिट्रीट’ के नाम से जाना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘धज्जी निर्माण शैली’ (Dhajji Construction Style) है।

यह इमारत पूरी तरह से लकड़ी और मिट्टी की दीवारों से बनी है। धज्जी शैली की खासियत यह है कि यह भूकंपरोधी होती है। हिमालय के संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में होने के बावजूद, लकड़ी के फ्रेम और मिट्टी के भराव वाली यह तकनीक इस इमारत को मजबूती प्रदान करती है। साथ ही, यह प्राकृतिक इन्सुलेशन का काम करती है, जिससे भवन गर्मियों में ठंडा और कड़ाके की सर्दियों में भीतर से गर्म रहता है।

प्राकृतिक वैभव: सेब के बागान और ट्यूलिप गार्डन

राष्ट्रपति निवास मशोबरा केवल अपनी बनावट के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:

  • सेब का बागीचा: परिसर में एक विशाल और व्यवस्थित सेब का बगीचा है, जिसमें 300 से अधिक फलदार पौधे हैं। यहाँ सेब की कई दुर्लभ और विदेशी किस्में उगाई जाती हैं।

  • ट्यूलिप गार्डन: तीन साल पहले स्वयं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यहाँ एक भव्य ट्यूलिप गार्डन का उद्घाटन किया था। वर्तमान में यहाँ डेनमार्क, वेलेमार्क और जंबोपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय किस्मों के ट्यूलिप खिले हुए हैं, जो सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

  • 360 डिग्री व्यू: ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ से हिमालय की चोटियों का 360 डिग्री नजारा दिखाई देता है। चारों तरफ फैली हरियाली और देवदार के ऊंचे वृक्ष इसे किसी जन्नत जैसा अहसास देते हैं।

पर्यटकों के लिए फिलहाल ‘नो एंट्री’

राष्ट्रपति की सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने फिलहाल ‘द रिट्रीट’ को आम जनता और पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है। यह प्रतिबंध 2 मई तक लागू रहेगा। राष्ट्रपति का दौरा संपन्न होने के बाद, 3 मई से इसे पुनः पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विशेष निर्देशों के बाद ही तीन साल पहले इस ऐतिहासिक इमारत के दरवाजे आम जनता के लिए खोले गए थे। अब पर्यटक टिकट लेकर इस ऐतिहासिक विरासत को करीब से देख सकते हैं और यहाँ के बागानों की सुंदरता का लुत्फ उठा सकते हैं।

प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा घेरा

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए ‘थ्री-लेयर’ सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। सड़कों की मरम्मत से लेकर बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभागों को अलर्ट पर रखा गया है।

राष्ट्रपति का शिमला दौरा हिमाचल के पर्यटन के लिए भी एक बड़ा बूस्ट माना जा रहा है, क्योंकि जब राष्ट्रपति जैसी हस्तियाँ यहाँ प्रवास करती हैं, तो वैश्विक मानचित्र पर इन स्थलों की चर्चा बढ़ जाती है। 27 अप्रैल को राष्ट्रपति के आगमन के साथ ही शिमला एक बार फिर भारतीय राजनीति और शासन के केंद्र बिंदु के रूप में चमकने को तैयार है।

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