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उत्तर प्रदेश: साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, लालच देकर खुलवाए खाते, 37 बैंक खातों से 5 करोड़ का लेन-देन, पांच आरोपी गिरफ्तार

संतकबीरनगर जनपद में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिले की पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह गरीब और भोले-भाले लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और फिर उन खातों का इस्तेमाल देशभर में की गई ठगी की रकम को इधर-उधर करने में करता था।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने प्रेसवार्ता के दौरान पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी गांवों में जाकर आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े-लिखे लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। ये आरोपी उन्हें आसान कमाई का झांसा देते थे और उनके दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खुलवाते थे। खाता खुलवाने के बाद आरोपी एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक अपने कब्जे में ले लेते थे, जिससे खाताधारकों को इस बात की जानकारी भी नहीं रहती थी कि उनके खातों का इस्तेमाल किस तरह के लेन-देन में हो रहा है।

जांच के दौरान यह सामने आया कि इन खातों का उपयोग दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार जैसे राज्यों में की गई साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। यानी यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय नेटवर्क के साथ जुड़ा हुआ था। पुलिस के मुताबिक, अब तक 37 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है, जिनके माध्यम से करीब 5 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन की पुष्टि हुई है।

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इन खातों में मौजूद 6 लाख रुपये से अधिक की राशि को फ्रीज करा दिया है, ताकि आगे किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो सके। इसके साथ ही पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक और संदिग्ध सामान भी बरामद किया है। बरामद सामान में 33 एटीएम कार्ड, 29 पासबुक, 18 चेकबुक, 24 सिम कार्ड, 12 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, एक मोटरसाइकिल, 8 अवैध जिंदा कारतूस और 16,750 रुपये नकद शामिल हैं।

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इटावा निवासी एक व्यक्ति, जिसे ‘कमांडर’ के नाम से जाना जाता है, के लिए काम करते थे। यही व्यक्ति पूरे गिरोह को संचालित करता था और अलग-अलग राज्यों में ठगी के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। फिलहाल पुलिस इस मुख्य आरोपी और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान विजय यादव, नीतेश कुमार, शक्ति, विकास पांडेय और आर्यन पाल के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और सभी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब सीधे लोगों के खातों में सेंध लगाने के बजाय नए-नए तरीके अपना रहे हैं। गरीब और अनजान लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर वे बड़ी रकम की हेराफेरी कर रहे हैं, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।

पुलिस अधीक्षक ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लालच में आकर अपने दस्तावेज या बैंक से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। साथ ही, अगर कोई व्यक्ति बैंक खाता खुलवाने या पैसे कमाने के नाम पर संपर्क करता है, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।

संतकबीरनगर पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, इस तरह के मामलों से यह भी साफ है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। यदि लोग सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, तो ऐसे गिरोहों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

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