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छत्तीसगढ़ वेदांता पावर प्लांट हादसा: अनिल अग्रवाल समेत कई अधिकारियों पर FIR, 20 मजदूरों की मौत से मचा हड़कंप

The Hill India News
Last updated: April 17, 2026 5:49 am
The Hill India News
Published: April 17, 2026
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छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बायलर विस्फोट ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 15 से अधिक घायल मजदूरों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है। घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट प्रबंधक देवेंद्र पटेल समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह हादसा 14 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजकर 33 मिनट पर डभरा थाना क्षेत्र के ग्राम सिंघीतराई स्थित पावर प्लांट में हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना जोरदार था कि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें रायगढ़ मेडिकल कॉलेज, अपेक्स अस्पताल और मेट्रो अस्पताल शामिल हैं। हालांकि, गंभीर रूप से घायल कई श्रमिकों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई। इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रारंभिक जांच में हादसे के पीछे बायलर में अत्यधिक दबाव को मुख्य कारण बताया गया है। बायलर मुख्य निरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, फर्नेस के अंदर जरूरत से ज्यादा ईंधन जमा हो गया था, जिससे अचानक दबाव बढ़ गया और बायलर-1 में विस्फोट हो गया। दबाव इतना अधिक था कि बायलर का निचला पाइप अपनी जगह से हट गया, जिसके चलते यह भयानक दुर्घटना हुई। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट में भी इसी कारण की पुष्टि की गई है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कंपनी और उससे जुड़ी एनजीएसएल एजेंसी द्वारा मशीनरी और उपकरणों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई। सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया और नियमित निरीक्षण में भी चूक हुई, जिसके चलते बायलर में दबाव का असामान्य उतार-चढ़ाव हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते उचित रखरखाव और निगरानी की जाती, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर के निर्देश पर थाना डभरा में अपराध क्रमांक 119/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई है। इस एफआईआर में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से लेकर स्थानीय प्रबंधन तक को आरोपी बनाया गया है।

इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस टीम की अगुवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल कर रहे हैं। टीम में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सुमित गुप्ता, फोरेंसिक अधिकारी सृष्टि सिंह और थाना प्रभारी राजेश पटेल को शामिल किया गया है। यह टीम तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर हादसे के हर पहलू की गहन जांच कर रही है।

वहीं, इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि कंपनी की लापरवाही के कारण निर्दोष मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है।

राज्य सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की सख्ती से समीक्षा करने की बात कही गई है।

यह हादसा न केवल औद्योगिक सुरक्षा में खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि लापरवाही की कीमत कितनी भयावह हो सकती है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

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