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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > नारी शक्ति का शंखनाद: देहरादून की सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं, ‘वंदन अधिनियम’ के समर्थन में भाजपा ने दिखाया दम
उत्तराखंडफीचर्ड

नारी शक्ति का शंखनाद: देहरादून की सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं, ‘वंदन अधिनियम’ के समर्थन में भाजपा ने दिखाया दम

The Hill India News
Last updated: April 17, 2026 2:01 pm
The Hill India News
Published: April 17, 2026
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Photo: @deeptirawatbjp X
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देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून आज ‘नारी शक्ति’ के नारों से गुंजायमान रही। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा Nari Shakti Vandan Adhiniyam Campaign Dehradun के अंतर्गत आयोजित विशाल जनजागरण अभियान ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा की, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी महिलाओं की भागीदारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। परेड ग्राउंड से लेकर शहर के मुख्य मार्गों तक आयोजित इस पदयात्रा, स्कूटी रैली और मानव श्रृंखला में हजारों की संख्या में महिलाओं और युवाओं ने शिरकत कर इस ऐतिहासिक अधिनियम के प्रति अपना अटूट समर्थन व्यक्त किया।

Contents
परेड ग्राउंड से शुरू हुआ ‘जागरूकता का कारवां’राजनीतिक प्रतिनिधित्व: नए युग की शुरुआतहस्ताक्षर अभियान: जनसमर्थन की मुहरसशक्तिकरण के तीन स्तंभ: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिकजन-जन तक पहुँचाने का संकल्पअधिनियम के मुख्य आकर्षण जिन्होंने खींचा ध्यान:

परेड ग्राउंड से शुरू हुआ ‘जागरूकता का कारवां’

अभियान का शुभारंभ भाजपा महानगर कार्यालय के समीप परेड ग्राउंड से हुआ। भाजपा महिला मोर्चा और युवा मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिला को उसके संवैधानिक अधिकारों और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के दूरगामी लाभों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पदयात्रा के शुरू होते ही पूरा क्षेत्र तिरंगे और पार्टी के ध्वजों से पट गया। इसके बाद आयोजित स्कूटी रैली ने शहर के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया, जहाँ महिलाओं ने ‘मोदी है तो मुमकिन है’ और ‘नारी शक्ति-राष्ट्र शक्ति’ जैसे नारों के साथ जन-जन को इस कानून के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व: नए युग की शुरुआत

भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने सभा को संबोधित करते हुए इस अधिनियम को भारतीय लोकतंत्र का ‘टर्निंग पॉइंट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि दशकों से भारतीय राजनीति में महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व की मांग लंबित थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इच्छाशक्ति दिखाकर पूरा किया है।

“नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने वाली मेज (Decision Making) पर मुख्य भूमिका में लाने का एक सशक्त माध्यम है। अब महिलाएं केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति निर्माता (Policy Maker) बनेंगी। हमारा लक्ष्य है कि इस अधिनियम की जानकारी देवभूमि के हर घर तक पहुँचे।” — दीप्ति रावत, राष्ट्रीय महामंत्री, भाजपा महिला मोर्चा

हस्ताक्षर अभियान: जनसमर्थन की मुहर

इस महाभियान के दौरान एक विशेष हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। परेड ग्राउंड के पास लगाए गए विशाल कैनवास पर देखते ही देखते हजारों लोगों ने हस्ताक्षर कर अधिनियम के प्रति अपनी सहमति दर्ज कराई। आयोजकों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य यह संदेश देना था कि समाज का हर वर्ग—चाहे वह युवा हो, बुजुर्ग हो या सामाजिक कार्यकर्ता—महिलाओं के इस राजनीतिक सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ा है।

सशक्तिकरण के तीन स्तंभ: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक

महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट ने इस ऐतिहासिक पहल की व्याख्या करते हुए इसे महिलाओं के सर्वांगीण विकास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल सीटों के आरक्षण तक सीमित नहीं है। जब राजनीतिक शक्ति महिलाओं के हाथ में आएगी, तो इसका सीधा असर सामाजिक कुरीतियों के खात्मे और महिलाओं की आर्थिक स्थिति की मजबूती पर पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री की सोच महिलाओं को ‘बेनिफिशियरी’ (लाभार्थी) से ‘पार्टनर’ (भागीदार) बनाने की है।

जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प

अभियान की सफलता पर प्रकाश डालते हुए मोर्चा की प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. दिव्या नेगी ने बताया कि इस रैली में हजारों की संख्या में दोपहिया वाहन और पदयात्री शामिल हुए। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस कार्यक्रम को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया। उन्होंने कहा कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam Campaign Dehradun की गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड की मातृशक्ति अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हो चुकी है।

अधिनियम के मुख्य आकर्षण जिन्होंने खींचा ध्यान:

  1. 33 प्रतिशत आरक्षण: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का ऐतिहासिक आरक्षण।

  2. मानव श्रृंखला: एकता और एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए शहर के मुख्य चौराहों पर बनाई गई विशाल मानव श्रृंखला।

  3. युवा भागीदारी: कॉलेज की छात्राओं और युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने तकनीक और सोशल मीडिया के जरिए अधिनियम के प्रचार-प्रसार का जिम्मा संभाला।

देहरादून में भाजपा का यह जनजागरण अभियान केवल एक दलीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी लकीर खींचने जैसा रहा। जिस उत्साह के साथ महिलाओं ने पदयात्रा और स्कूटी रैली में भाग लिया, उसने यह साबित कर दिया है कि आगामी समय में उत्तराखंड की राजनीति और समाज में महिलाओं की भूमिका और अधिक निर्णायक होने वाली है।

भाजपा ने इस अभियान के जरिए न केवल अपना आधार मजबूत किया है, बल्कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम‘ को लेकर फैले भ्रमों को दूर करने और इसके सकारात्मक पहलुओं को जन-जन तक पहुँचाने में सफलता पाई है। अब देखना यह होगा कि यह जनजागरण आने वाले चुनावों और सामाजिक बदलावों में किस तरह के परिणाम लेकर आता है।

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