
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून इन दिनों राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी चमक बिखेर रही है। परेड ग्राउंड स्थित अत्याधुनिक मल्टीपरपज हॉल में आयोजित 87वीं इंटर स्टेट जूनियर एंड यूथ टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2025 ने न केवल खेल प्रेमियों को रोमांचित किया है, बल्कि प्रदेश की खेल संभावनाओं को एक नई दिशा भी दी है। भारतीय टेबल टेनिस महासंघ (TTFI) के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 15 अप्रैल को किया था, जो आगामी 23 अप्रैल तक जारी रहेगी।
सिंड्रेला दास का स्वर्णिम प्रदर्शन: बंगाल की बेटी ने जीता दिल
चैंपियनशिप के शुरुआती चरणों में महिला वर्ग की प्रतियोगिताओं ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। विशेष रूप से अंडर-17 और अंडर-19 महिला एकल और युगल श्रेणियों में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस पूरे टूर्नामेंट में पश्चिम बंगाल की उभरती हुई खिलाड़ी सिंड्रेला दास सबसे बड़ी स्टार बनकर उभरीं।
सिंड्रेला ने अपने असाधारण खेल कौशल और मानसिक मजबूती का परिचय देते हुए अंडर-17 और अंडर-19 दोनों ही वर्गों के एकल खिताब अपने नाम किए। फाइनल मुकाबलों में उनकी आक्रामक शैली और सटीक शॉट्स का प्रतिद्वंद्वियों के पास कोई जवाब नहीं था। वहीं, महाराष्ट्र की प्रतिभावान खिलाड़ी दिव्यांशी भौमिक ने भी शानदार प्रदर्शन किया, हालांकि उन्हें फाइनल की बाधा पार करने में असफलता मिली और वह दूसरे पायदान (रजत पदक) पर रहीं।
दिव्यांशी भौमिक: हार से नहीं, अनुभव से मिली प्रेरणा
देश की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी दिव्यांशी भौमिक ने मुकाबले के बाद अपनी भावनाओं को साझा किया। उन्होंने स्वीकार किया कि वह अपनी बढ़त को जीत में तब्दील कर सकती थीं, लेकिन फाइनल का दबाव और सिंड्रेला की फॉर्म भारी पड़ी। दिव्यांशी ने कहा, “यहाँ देहरादून में खेलकर एक अद्भुत अनुभव मिला। हालांकि मैं स्वर्ण पदक से चूक गई, लेकिन मैं अपनी मेहनत और अभ्यास को और तेज करूंगी ताकि अगले साल परिणाम बदल सकूं। मेरा अंतिम लक्ष्य भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतना है।”
उत्तराखंड का बदलता खेल परिदृश्य: अमित कुमार सिन्हा
खेल विभाग के विशेष प्रमुख सचिव और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमित कुमार सिन्हा ने इस चैंपियनशिप को उत्तराखंड के लिए एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि 87वीं इंटर स्टेट जूनियर एंड यूथ टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2025 का देहरादून में आयोजन होना इस बात का प्रमाण है कि राज्य अब बड़े राष्ट्रीय आयोजनों के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमित सिन्हा ने प्रेस से बातचीत में कहा, “राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के बाद उत्तराखंड में जो खेल का माहौल बना है, उसने हमें एक विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान किया है। अब हमारे पास ऐसे स्टेडियम और हॉल हैं जहाँ हम किसी भी राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप को सफलतापूर्वक आयोजित कर सकते हैं।” उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों का मूल उद्देश्य राज्य के स्थानीय बच्चों में खेलों के प्रति रुझान पैदा करना और एक प्रभावी ‘टैलेंट हंट’ मुहिम चलाना है।
टैलेंट हंट और भविष्य की योजनाएं
खेल विभाग की रणनीति अब बच्चों को 5 से 6 साल की कम उम्र से ही खेलों से जोड़ने की है। सिन्हा के अनुसार, टेबल टेनिस जैसे लोकप्रिय खेल को अब स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम और दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। खेल विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि स्कूलों में टेबल टेनिस की मेजें और कोच उपलब्ध कराए जाएं ताकि जमीनी स्तर से प्रतिभाएं निकल सकें।
विशेष प्रमुख सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में चैंपियनशिप की संख्या बढ़ाना ही खिलाड़ियों को तैयार करने का एकमात्र तरीका है। जितने अधिक टूर्नामेंट होंगे, उतने ही नए बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा और प्रदेश को नए नेशनल चैंपियन मिलेंगे।
अब पुरुष वर्ग पर टिकीं नजरें
महिला वर्ग की प्रतियोगिताओं के समापन के बाद, अब खेल प्रेमियों की निगाहें पुरुष वर्ग पर टिक गई हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 20 अप्रैल से इसी मल्टीपरपज हॉल में अंडर-17 और अंडर-19 पुरुष समूह की प्रतियोगिताएं शुरू होने जा रही हैं। देशभर के शीर्ष वरीयता प्राप्त पुरुष खिलाड़ी इस खिताब के लिए देहरादून में अपना दमखम दिखाएंगे।
यह प्रतियोगिता 23 अप्रैल को अपने फाइनल मुकाबलों के साथ संपन्न होगी। आयोजकों को उम्मीद है कि पुरुष वर्ग में भी उसी स्तर का रोमांच देखने को मिलेगा जो महिला वर्ग में सिंड्रेला दास और दिव्यांशी भौमिक के बीच देखने को मिला था।
देवभूमि बनेगा ‘स्पोर्ट्स हब’
देहरादून में 87वीं इंटर स्टेट जूनियर एंड यूथ टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2025 का सफल संचालन मुख्यमंत्री धामी के ‘विज़न 2030’ की ओर एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड को देश का प्रमुख खेल हब बनाना है। आधुनिक सुविधाओं से लैस परेड ग्राउंड का यह हॉल अब न केवल टेबल टेनिस, बल्कि बैडमिंटन और अन्य इंडोर खेलों के लिए भी राष्ट्रीय केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।
निश्चित रूप से, इन नौ दिनों के महाकुंभ से जो ऊर्जा निकलेगी, वह उत्तराखंड के स्थानीय खिलाड़ियों को ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंचों के लिए तैयार करने में संजीवनी का काम करेगी।



