
नासिक: देश की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक कार्यालय से जुड़ा एक गंभीर और विवादास्पद मामला सामने आया है, जिसने कॉर्पोरेट जगत में कार्यस्थल की सुरक्षा, नैतिकता और संस्कृति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया है। आरोपों में यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, और जबरन धर्मांतरण जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं।
पूर्व कर्मचारी ने एक मीडिया बातचीत में दावा किया कि नासिक स्थित TCS कार्यालय में कुछ टीम लीडर्स और कर्मचारियों का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक था। उनके अनुसार, महिला कर्मचारियों को अक्सर टीम लीडर की डेस्क पर बुलाकर उनसे अश्लील और अभद्र भाषा में बातचीत की जाती थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें किसी भी पेशेवर कार्यस्थल के मानकों के पूरी तरह खिलाफ हैं और इससे महिलाओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
इतना ही नहीं, आरोपों में धार्मिक अपमान का मुद्दा भी प्रमुख रूप से सामने आया है। पूर्व कर्मचारी के मुताबिक, कुछ आरोपी कर्मचारी खास तौर पर हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं का मजाक उड़ाते थे। त्योहारों के दौरान जब महिला कर्मचारी साड़ी पहनकर या बिंदी लगाकर ऑफिस आती थीं, तो उनका सार्वजनिक रूप से उपहास किया जाता था। इससे कार्यस्थल का माहौल न केवल असहज बल्कि असुरक्षित भी हो गया था।
पूर्व कर्मचारी ने एक सहकर्मी के बारे में भी खुलासा किया, जो पहले रुद्राक्ष की माला पहनता था, लेकिन बाद में उसने इस्लाम धर्म अपना लिया। इस मामले को भी उन्होंने संदिग्ध परिस्थितियों से जोड़ते हुए जबरन धर्मांतरण की आशंका जताई है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इस दिशा में पड़ताल कर रही हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपों में शामिल एक महिला कर्मचारी, निदा खान, को लेकर भी भ्रम की स्थिति पैदा की गई थी। पूर्व कर्मचारी के अनुसार, निदा खान को मानव संसाधन (HR) अधिकारी बताया जा रहा था, जबकि वह वास्तव में एक प्रोसेस एसोसिएट थी और विभाग बदलवाने की कोशिश कर रही थी। इस तरह की जानकारी से यह संकेत मिलता है कि ऑफिस के भीतर पद और जिम्मेदारियों को लेकर भी अस्पष्टता थी।
सुरक्षा के नाम पर भी कई सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कर्मचारियों को ऑफिस कैंपस में प्रवेश से पहले अपने मोबाइल फोन, बैग और यहां तक कि लंच बॉक्स भी बाहर छोड़ने के लिए कहा जाता था। इससे कर्मचारियों के पास अंदर होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड करने का कोई साधन नहीं रहता था। इस प्रथा को लेकर भी संदेह जताया गया है कि इसका इस्तेमाल कथित गलत गतिविधियों को छिपाने के लिए किया जाता था।
पूर्व कर्मचारी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ महिला कर्मचारियों पर होटल में मिलने का दबाव बनाया जाता था। यह दावा इस मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इससे कार्यस्थल के बाहर भी उत्पीड़न की संभावना सामने आती है। उन्होंने कहा कि यह पूरा नेटवर्क एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें कई लोग शामिल थे।
इस मामले में नासिक पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए अब तक कुल 9 शिकायतों को दर्ज किया है, जो फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच की घटनाओं से संबंधित हैं। इन शिकायतों में आठ महिला कर्मचारियों ने यौन और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम का गठन किया है।
जांच के दौरान अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और निदा खान के नाम शामिल हैं। इन सभी को कंपनी द्वारा निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एक अन्य महिला कर्मचारी फिलहाल लापता बताई जा रही है, जिसकी तलाश जारी है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे को लेकर एक याचिका दायर की गई है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को धोखे से या दबाव डालकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यदि इस तरह की गतिविधियां संगठित रूप से चलाई जाती हैं, तो यह न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरा है।
हालांकि, इस पूरे मामले में अभी जांच जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। TCS की ओर से आधिकारिक रूप से इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी ने आरोपियों को निलंबित कर कार्रवाई का संकेत दिया है।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि कॉर्पोरेट संस्थानों में केवल प्रोफेशनलिज्म और प्रोडक्टिविटी ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आने वाले समय में जांच के निष्कर्ष इस पूरे विवाद की सच्चाई को सामने लाएंगे।



