नई दिल्ली: अप्रैल के मध्य में ही सूरज के तीखे तेवरों ने पूरे देश को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के अधिकतर हिस्सों में भीषण गर्मी और लू (Heatwave) को लेकर ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग ने आम जनमानस को दोपहर के समय बेवजह घर से बाहर न निकलने की कड़ी सलाह दी है।
आईएमडी के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर, पश्चिम, मध्य और पूर्व भारत के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहने वाला है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से कुछ पहाड़ी राज्यों में मौसम का मिजाज बदलेगा, लेकिन मैदानी इलाकों को फिलहाल सूरज की तपिश से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत: पारा लगाएगा ‘छलांग’
अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ने वाला है। आईएमडी के मुताबिक, 15 से 18 अप्रैल के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है। 19 से 21 अप्रैल के बीच तापमान स्थिर तो होगा, लेकिन गर्मी का असर कम नहीं होगा।
यही स्थिति मध्य भारत की भी है, जहाँ 15 से 20 अप्रैल के दौरान पारे में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। मध्य और दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में उष्ण लहर (Heatwave) के साथ-साथ गर्म और आर्द्र (Humid) मौसम रहने की आशंका है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दिल्ली का हाल: ‘मध्यम’ हवा और बढ़ती तपिश
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अप्रैल की शुरुआत हल्की ठंडक के साथ हुई थी, लेकिन अब यहाँ गर्मी ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। दिन के समय धूप की चुभन बढ़ने लगी है, हालांकि रातें अभी भी तुलनात्मक रूप से ठंडी बनी हुई हैं। भारत मौसम पूर्वानुमान अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली अब पूरी तरह से शुरुआती गर्मी के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
तापमान के साथ-साथ दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वर्तमान में दिल्ली का AQI 167 दर्ज किया गया है, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे धूल भरी हवाएं चलेंगी, वायु गुणवत्ता में गिरावट आने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: पश्चिमी विक्षोभ लाएगा राहत?
पहाड़ों की रानी हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार (17 अप्रैल) से मौसम करवट लेने वाला है। शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया है कि 15 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से:
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17 से 20 अप्रैल के बीच प्रदेश के 12 में से 7 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है।
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मौसम विभाग ने 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और आकाशीय बिजली को लेकर पीली चेतावनी (Yellow Warning) जारी की है।
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हालांकि, इस बारिश से मैदानी इलाकों की गर्मी में कोई खास कमी नहीं आएगी।
महाराष्ट्र और गुजरात: थोड़ी राहत की उम्मीद
जहाँ उत्तर भारत तप रहा है, वहीं पश्चिमी भारत के राज्यों—महाराष्ट्र और गुजरात—से राहत की खबर आ रही है। आईएमडी के अनुसार, 15-18 अप्रैल के दौरान यहाँ तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होगा। राहत की बात यह है कि 19 से 21 अप्रैल के बीच इन राज्यों के अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी निजात मिल सकती है।
पूर्वोत्तर भारत: भारी वर्षा का पूर्वानुमान
पूर्वोत्तर राज्यों में प्रकृति का अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। जहाँ एक तरफ गर्मी बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ बादलों ने भी डेरा डालना शुरू कर दिया है।
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अरुणाचल प्रदेश: 15, 18 और 19 अप्रैल को बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश का अलर्ट।
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असम और मेघालय: 17 और 18 अप्रैल को गरज-चमक के साथ वर्षा की संभावना।
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नागालैंड: 18 अप्रैल को भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
लगातार बढ़ते तापमान और भारत मौसम पूर्वानुमान अप्रैल 2026 की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सचेत किया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
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हाइड्रेटेड रहें: दिन भर में पर्याप्त पानी, ओआरएस, नींबू पानी और लस्सी का सेवन करें।
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पीक आवर्स से बचें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच सीधे धूप में जाने से बचें।
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सूती कपड़े पहनें: हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को ठंडक मिल सके।
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पशु-पक्षियों का ध्यान रखें: इस भीषण गर्मी में अपने घर की छतों या बालकोनी में पक्षियों के लिए पानी रखना न भूलें।
कुल मिलाकर, अप्रैल का उत्तरार्ध भारत के अधिकांश हिस्सों के लिए अत्यधिक गर्म रहने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ का असर केवल ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित रहने की उम्मीद है। दिल्ली-NCR, राजस्थान, यूपी और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को फिलहाल “लू” के थपेड़ों के लिए तैयार रहना चाहिए।



