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कॉर्बेट के 90 गौरवशाली वर्ष: ₹5.01 लाख के ‘कॉर्बेट अवॉर्ड’ की घोषणा, ईको-टूरिज्म और संरक्षण के लिए सरकार का मास्टर प्लान

देहरादून: भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित वन्यजीव गंतव्य, ‘जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व’ के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। अपनी स्थापना के 90 वर्ष पूरे करने की दहलीज पर खड़े इस रिजर्व के संरक्षण और वैश्विक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने बड़े फैसलों की झड़ी लगा दी है। प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में हुई ‘कॉर्बेट टाइगर फाउंडेशन’ की उच्च स्तरीय बैठक में न केवल भविष्य का रोडमैप तैयार किया गया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है।

‘कॉर्बेट अवॉर्ड’: संरक्षण के नायकों को मिलेगा ₹5.01 लाख का सम्मान

इस बैठक का सबसे क्रांतिकारी फैसला ‘कॉर्बेट अवॉर्ड’ की शुरुआत करना रहा। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने घोषणा की कि प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिए इस विशेष पुरस्कार की स्थापना की गई है।

यह सम्मान उन लोगों को दिया जाएगा जिन्होंने जैव विविधता के संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया है। पुरस्कार के विजेता को ₹5 लाख 1 हजार की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। विभाग का मानना है कि यह कदम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व संरक्षण योजना 2026 के तहत जमीनी स्तर पर काम करने वाले पर्यावरणविदों को एक नई पहचान देगा।

90वीं वर्षगांठ पर सजेगा तीन दिवसीय ‘कॉर्बेट फेस्टिवल’

कॉर्बेट के नौ दशकों के सफर को यादगार बनाने के लिए राज्य सरकार एक भव्य ‘कॉर्बेट फेस्टिवल’ आयोजित करने जा रही है। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में देश-दुनिया के विशेषज्ञ, पर्यावरणविद् और प्रकृति प्रेमी जुटेंगे। इस फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य कॉर्बेट की समृद्ध जैव विविधता और इसके गौरवशाली इतिहास से युवा पीढ़ी को रूबरू कराना है। यह आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का एक बड़ा मंच भी बनेगा।

वास्तुकला में दिखेगी ‘पहाड़’ की झलक: गेस्ट हाउसों का कायाकल्प

पर्यटन अनुभव को और अधिक जीवंत बनाने के लिए वन विभाग ने रिजर्व के भीतर स्थित सरकारी गेस्ट हाउसों के सौंदर्यीकरण का निर्णय लिया है। अब ये गेस्ट हाउस आधुनिक कंक्रीट के ढांचों के बजाय पारंपरिक पर्वतीय वास्तुकला के अनुरूप विकसित किए जाएंगे। इससे पर्यटकों को उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक शैली का अनुभव मिल सकेगा, साथ ही ये भवन वन क्षेत्र के नैसर्गिक सौंदर्य के साथ सामंजस्य बिठा पाएंगे।

हाई-टेक निगरानी और सौर ऊर्जा पर जोर

वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता न करते हुए, बैठक में पुराने वॉच टावरों को पुनर्जीवित करने का फैसला लिया गया है। इन टावरों को केवल मरम्मत ही नहीं दी जाएगी, बल्कि इन्हें आधुनिक सेंसर, हाई-टेक कैमरे और नाइट विजन उपकरणों से लैस किया जाएगा।

इसके साथ ही, ईको-फ्रेंडली दृष्टिकोण अपनाते हुए टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर लाइटें लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यह पहल कार्बन फुटप्रिंट कम करने के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने में भी मददगार साबित होगी।

बजट को मंजूरी और CSR की सहभागिता

प्रशासनिक स्तर पर, कॉर्बेट टाइगर फाउंडेशन के पिछले दो वर्षों के वित्तीय लेखों को भी हरी झंडी दी गई है।

  • वर्ष 2024 के लिए: ₹29 लाख का बजट स्वीकृत।

  • वर्ष 2025 के लिए: ₹27 लाख का बजट स्वीकृत।

यह धनराशि मुख्य रूप से संरक्षण कार्यों, जागरूकता अभियानों और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च की जाएगी। इसी कड़ी में, कॉर्बेट को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत मिले 4 नए वाहनों को भी वन मंत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वाहन गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Team) की क्षमता को बढ़ाने में उपयोग किए जाएंगे।

संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन: वन मंत्री का निर्देश

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट किया कि सरकार का प्राथमिकता क्षेत्र संरक्षण है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पर्यटन की गतिविधियों को इस तरह प्रबंधित किया जाए जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में न्यूनतम दखल हो। उन्होंने कहा:

“कॉर्बेट केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं है, यह हमारी वैश्विक धरोहर है। इसकी 90 साल की विरासत हमें जिम्मेदारी का अहसास कराती है कि हम विकास और प्रकृति के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करें।”

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व संरक्षण योजना 2026 के तहत लिए गए ये निर्णय दर्शाते हैं कि उत्तराखंड सरकार अब केवल बाघों की गिनती बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संरक्षण को एक सामाजिक आंदोलन बनाने की दिशा में काम कर रही है। ‘कॉर्बेट अवॉर्ड’ जैसी पहल और आधारभूत ढांचे का आधुनिकीकरण निश्चित रूप से इस वैश्विक धरोहर को आने वाली सदियों के लिए सुरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित होगा।

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