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आगरा में आस्था पर ‘अराजकता’ का साया: परशुराम चौक पर हंगामे के बाद तनाव, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

आगरा। ताजनगरी आगरा में संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के पावन अवसर पर निकाली जा रही शोभायात्रा के दौरान कुछ अराजक तत्वों की हरकतों ने सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया। आवास विकास कॉलोनी स्थित परशुराम चौक पर हुई इस घटना के बाद ताजनगरी में तनाव व्याप्त हो गया है। भगवान परशुराम की प्रतिमा के समीप जूते-चप्पल पहनकर चढ़ने और वहां नीला झंडा फहराने के वायरल वीडियो ने ब्राह्मण समाज के आक्रोश को भड़का दिया है। पुलिस ने देर रात अज्ञात दंगाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कवायद तेज कर दी है।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अनुयायी भव्य रैली निकाल रहे थे। रैली जब आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-6 स्थित परशुराम चौक पर पहुँची, तो भीड़ में शामिल कुछ हुड़दंगियों ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ये अराजक तत्व जूते-चप्पल पहनकर भगवान परशुराम के फरसे वाले स्थान पर चढ़ गए। वहां उन्होंने न केवल नारेबाजी की, बल्कि प्रतिमा स्थल पर नीला झंडा भी लगा दिया। इतना ही नहीं, आरोप है कि साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ भी तोड़फोड़ की गई।

ब्राह्मण समाज का आक्रोश और पुलिस का विरोधाभासी बयान

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग और स्थानीय नेता परशुराम चौक पर एकत्रित हो गए। माहौल तब और गरमा गया जब एसीपी छत्ता शेषमणि उपाध्याय ने प्रारंभिक बयान में कहा कि वहां केवल झंडे लगाकर फोटो खिंचवाई गई है और कोई तोड़फोड़ नहीं हुई है।

इस बयान पर आक्रोश जताते हुए ब्राह्मण नेता मदन मोहन शर्मा और पार्षद गौरव शर्मा ने कहा कि पुलिस तथ्यों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जूते पहनकर पूज्य प्रतिमा पर चढ़ना और वहां पहले से मौजूद झंडों के साथ छेड़छाड़ करना महज “सेल्फी लेना” नहीं हो सकता। उग्र भीड़ ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषियों की शिनाख्त कर गिरफ्तारी नहीं हुई, तो समाज बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा।

कानूनी कार्रवाई: अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज

मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते दबाव को देखते हुए देर रात पुलिस के आला अधिकारी हरकत में आए। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने स्पष्ट किया कि आगरा परशुराम चौक विवाद के माध्यम से माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

सिकंदरा थाना पुलिस ने देर रात अज्ञात अराजक तत्वों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और शांति भंग करने की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की मदद से आरोपियों के चेहरे पहचानने की कोशिश कर रही है।

सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रबुद्ध वर्ग ने चिंता व्यक्त की है। ब्राह्मण नेता मदन मोहन शर्मा ने कहा, “हम बाबा साहब का हृदय से सम्मान करते हैं और उनकी जयंती की खुशियों में शामिल हैं। लेकिन किसी एक महापुरुष के सम्मान के नाम पर दूसरे आराध्य का अपमान करना कतई स्वीकार्य नहीं है।”

प्रशासन ने भी ताजनगरी के नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर भ्रामक तथ्य या नफरत फैलाने वाली पोस्ट साझा करेगा, उसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

वर्तमान में आवास विकास कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। परशुराम चौक के आसपास एहतियातन गश्त बढ़ा दी गई है। आगरा परशुराम चौक विवाद के बाद शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी आंबेडकर जयंती की रैलियों के दौरान अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है ताकि अराजक तत्व दोबारा ऐसी हिमाकत न कर सकें।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि उत्सवों के बीच कुछ शरारती तत्व हमेशा सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की फिराक में रहते हैं। अब सबकी नजरें आगरा पुलिस पर टिकी हैं कि वह कितनी जल्दी इन ‘चेहरों’ को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजती है।

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