
रुद्रपुर (उधम सिंह नगर)। उत्तराखंड में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और युवा पीढ़ी को खोखला कर रहे ड्रग्स सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जनपद उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय गणपति के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘उत्तराखंड में नशे के खिलाफ अभियान’ के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और कोतवाली ट्रांजिट कैंप पुलिस की संयुक्त टीम ने “ऑपरेशन प्रहार” के अंतर्गत एक अंतरराज्यीय नशा तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से लाखों रुपये की स्मैक बरामद की है।
सिडकुल ढाल पर बिछाया गया जाल
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मुखबिर की सटीक सूचना पर ANTF और ट्रांजिट कैंप पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया था। टीम ने ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के अटरिया-सिडकुल रोड स्थित सिडकुल ढाल के पास सघन चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार पुलिस को देखकर हड़बड़ा गया और भागने का प्रयास करने लगा। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और संदिग्ध को दबोच लिया।
तलाशी लेने पर अभियुक्त के पास से 150 ग्राम अवैध स्मैक बरामद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की अनुमानित कीमत करीब 45 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने मौके से तस्करी में प्रयुक्त होंडा शाइन मोटरसाइकिल और एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी जब्त किया है।
फैक्ट्री कर्मचारी की आड़ में तस्करी का गंदा खेल
गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान 36 वर्षीय सुनील कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से ग्राम कैमुआ, थाना भमोरा, जिला बरेली (उत्तर प्रदेश) का निवासी है। वर्तमान में वह रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में ही रह रहा था। जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ वह यह था कि आरोपी रुद्रपुर की एक फैक्ट्री में काम करता था।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह फैक्ट्री में काम करने की आड़ में नशीले पदार्थों की सप्लाई करता था। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए उसने एक सामान्य कर्मचारी का चोला ओढ़ा हुआ था, जबकि पर्दे के पीछे वह उत्तराखंड में नशे के खिलाफ अभियान को चुनौती देते हुए युवाओं तक जहर पहुंचा रहा था।
बरेली से रुद्रपुर तक फैला है नेटवर्क
पुलिसिया पूछताछ में सुनील कुमार ने अपने पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। उसने बताया कि वह स्मैक की यह खेप अपने साथी आशु ठाकुर (निवासी फुलसुंगी, रुद्रपुर) से लेकर आता था। एसएसपी अजय गणपति ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मास्टरमाइंड्स और स्थानीय सप्लायर्स की पहचान की जा रही है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि बरेली से स्मैक की इतनी बड़ी मात्रा उत्तराखंड की सीमाओं के भीतर कैसे दाखिल हुई और इसके पीछे कौन सा बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
पुराना अपराधी है सुनील कुमार
पकड़े गए तस्कर सुनील कुमार का आपराधिक इतिहास भी खंगाला गया है। यह पहली बार नहीं है जब वह सलाखों के पीछे पहुंचा है। आरोपी साल 2014 में थाना पंतनगर क्षेत्र में चोरी के संगीन मामलों में जेल जा चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने अपराध का तरीका बदला और ड्रग्स की तस्करी में उतर गया। फिलहाल, पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ कोतवाली ट्रांजिट कैंप में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हथियार तस्करों पर भी चला एसटीएफ का डंडा
नशे के साथ-साथ उत्तराखंड पुलिस अवैध हथियारों के सौदागरों पर भी काल बनकर टूटी है। राज्य में अवैध हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए एसटीएफ (STF) और पुलभट्टा पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (STF) अजय सिंह के कुशल निर्देशन में गठित टीम ने एक शातिर अंतरराज्यीय हथियार तस्कर को दबोचने में कामयाबी हासिल की है।
तस्कर के पास से अवैध हथियार बरामद किए गए हैं, जो वह राज्य के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई करने की फिराक में था। एसटीएफ की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी चाहे नशे का व्यापार करें या हथियारों का, देवभूमि की पुलिस उन्हें किसी भी सूरत में बख्शने वाली नहीं है।
एसएसपी की अपील: “समाज को नशामुक्त बनाना सामूहिक जिम्मेदारी”
इस बड़ी कामयाबी पर एसएसपी अजय गणपति ने पुलिस टीम की पीठ थपथपाई है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“जिले में ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत नशे के सौदागरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। हमारा लक्ष्य केवल तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि नशे की सप्लाई चेन को जड़ से उखाड़ना है। उत्तराखंड में नशे के खिलाफ अभियान तब तक थमेगा नहीं, जब तक देवभूमि पूरी तरह नशामुक्त न हो जाए।”
उन्होंने आम जनता से भी भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि उनके आसपास कोई भी व्यक्ति नशा बेचता है या संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।
अपराधियों के लिए कड़ा संदेश
रुद्रपुर में हुई यह गिरफ्तारी ड्रग्स माफियाओं के लिए एक चेतावनी है। 150 ग्राम स्मैक की बरामदगी छोटी बात नहीं है, यह हजारों युवाओं की जिंदगी बर्बाद होने से बचाने जैसा है। पुलिस की सक्रियता और उत्तराखंड में नशे के खिलाफ अभियान की तीव्रता यह दर्शाती है कि आने वाले दिनों में अपराधियों के लिए राज्य में छिपने की कोई जगह नहीं बचेगी।
प्रशासन अब संपत्ति कुर्क करने जैसी कठोर कार्रवाई पर भी विचार कर रहा है, ताकि नशा तस्करों के आर्थिक तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।


