
खटीमा/सितारगंज। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवता और वैवाहिक रिश्तों की शुचिता को झकझोर कर रख दिया है। सितारगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत एक विवाहिता ने अपने ही पति पर क्रूरता की सारी हदें पार करने का आरोप लगाया है। पीड़िता का आरोप है कि उसके पति ने न केवल उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उसके साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए और विरोध करने पर उसका गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया। पुलिस ने महिला की तहरीर के आधार पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
निकाह के एक साल के भीतर ही टूटे अरमान
घटनाक्रम के अनुसार, पीड़िता का निकाह 27 अप्रैल 2025 को मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ था। महिला ने पुलिस को बताया कि उसने एक खुशहाल वैवाहिक जीवन का सपना देखा था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उसका सामना कड़वी हकीकत से हुआ। आरोप है कि पति छोटी-छोटी बातों पर आगबबूला हो जाता था और आए दिन गाली-गलौज के साथ मारपीट करता था। महिला लंबे समय तक इस उम्मीद में खामोश रही कि शायद समय के साथ स्थितियां सुधर जाएंगी, लेकिन आरोपी की प्रताड़ना बढ़ती ही गई।
11 अप्रैल की वो खौफनाक सुबह
पीड़िता ने पुलिस को दी गई शिकायत में 11 अप्रैल 2026 की घटना का विस्तार से वर्णन किया है। आरोप है कि सुबह करीब 4 बजे पति ने अचानक क्रूरता की पराकाष्ठा पार कर दी। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने पहले उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसके कारण उसका बायां हाथ टूट गया। शरीर के कई अन्य हिस्सों पर भी गंभीर चोटें आईं।
शिकायत के अनुसार, मारपीट के बाद आरोपी ने महिला की मर्जी के खिलाफ उसके साथ जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाए। जब महिला ने इसका कड़ा विरोध किया, तो आरोपी ने उसका गला घोंटकर उसे जान से मारने की कोशिश की। घटना के बाद आरोपी ने महिला को डराया-धमकाया कि यदि उसने किसी को भी इस बारे में बताया तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
सामाजिक दबाव और समझौते की बेड़ियां
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पीड़िता ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं थी। आरोपी पहले भी कई बार इस तरह की घिनौनी हरकतें कर चुका था। पीड़िता ने एक बार पूर्व में भी इसकी शिकायत की थी, लेकिन सामाजिक मर्यादा और पारिवारिक दबाव के चलते ‘समझौते’ के नाम पर उसे अपनी शिकायत वापस लेनी पड़ी। हालांकि, इस बार आरोपी की हैवानियत जानलेवा स्तर तक पहुंच गई, जिससे मजबूर होकर पीड़िता को कानून की शरण लेनी पड़ी। महिला का दावा है कि उसके पास अपनी चोटों और घटना से जुड़े फोटो व वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिन्हें उसने पुलिस को सौंपने की बात कही है।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी पहलू
सितारगंज घरेलू हिंसा मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी (सीओ) सितारगंज, बीएस धौनी ने मीडिया को बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की गई है।
“पीड़िता की तहरीर के आधार पर आरोपी पति के खिलाफ संबंधित धाराओं (मारपीट, अप्राकृतिक यौन संबंध और हत्या का प्रयास) में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। महिला का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है। साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।” — बीएस धौनी, क्षेत्राधिकारी सितारगंज
विशेषज्ञों की राय: बढ़ता महिला उत्पीड़न एक चिंता
उत्तराखंड के शांत कहे जाने वाले इलाकों में भी इस तरह के अपराधों का बढ़ना चिंता का विषय है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि कई मामलों में ‘समझौता’ करना अपराधी के हौसले बुलंद कर देता है। सितारगंज की यह घटना दर्शाती है कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक चोट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यौन अपराधों और मानसिक उत्पीड़न का एक जटिल जाल बन चुका है।
फिलहाल पीड़िता अपने टूटे हुए हाथ और जख्मी रूह के साथ न्याय की उम्मीद कर रही है। ऊधम सिंह नगर पुलिस के लिए यह मामला साक्ष्यों को मजबूती से कोर्ट के समक्ष रखने की एक चुनौती है, ताकि समाज में ऐसे अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश जाए। पुलिस का कहना है कि जांच टीम साक्ष्यों का संकलन कर रही है और आरोपी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।



