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उत्तराखंड युवा कांग्रेस चुनाव में ‘वोट कांड’: 70 साल के बुजुर्गों को कागजों पर ‘युवा’ बना डाले गए हजारों वोट, विवाद गहराया

देहरादून: भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम घोषित होते ही खुशियों से ज्यादा विवादों के स्वर तेज हो गए हैं। नवनियुक्त अध्यक्ष विशाल भोसक की ताजपोशी के साथ ही संगठन के भीतर एक ऐसा ‘वोटिंग स्कैम’ सामने आया है, जिसने चुनावी पारदर्शिता और डिजिटल सदस्यता अभियान पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अल्मोड़ा से जिला अध्यक्ष पद के प्रत्याशी शुभांशु रौतेला ने साक्ष्यों के साथ चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और डेटा मैन्युपुलेशन के आरोप लगाए हैं।

चुनावी नतीजों के बाद बगावत की आहट

हाल ही में घोषित परिणामों के अनुसार, विशाल भोसक को उत्तराखंड युवा कांग्रेस की कमान सौंपी गई है, जबकि सौरभ ममगाईं और अंशुल रावत को वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। लेकिन जीत के जश्न के बीच अल्मोड़ा के शुभांशु रौतेला ने मोर्चा खोल दिया है। शुभांशु का दावा है कि यह चुनाव लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि तकनीकी हेराफेरी का परिणाम है। उनके अनुसार, हजारों फर्जी वोटों के जरिए जनादेश को हाईजैक किया गया है।

‘एज फ्रॉड’: 77 साल के बुजुर्ग बने 35 के युवा

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला खुलासा वोटर आईडी कार्ड की एडिटिंग से जुड़ा है। शुभांशु ने आरोप लगाया कि सदस्यता अभियान के दौरान एपिक (EPIC) नंबरों का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया।

“जांच में पाया गया कि जिन आईडी कार्ड्स से वोट डाले गए, उनके एपिक नंबर तो असली थे, लेकिन उन पर लगी फोटो और दर्ज उम्र पूरी तरह फर्जी थी। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जिस व्यक्ति की उम्र 70 से 77 साल के बीच दर्ज है, उसे फोटोशॉप या एडिटिंग टूल्स के जरिए 35 साल का दिखाकर युवा कांग्रेस का सदस्य बना दिया गया और उनके नाम पर वोट डाले गए।” — शुभांशु रौतेला, प्रत्याशी

आरोपों के मुताबिक, चुनाव के दौरान इस्तेमाल की गई कई आईडी पहली नजर में ही फैब्रिकेटेड और डुप्लीकेट लग रही थीं। यह न केवल संगठन के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ का भी गंभीर मामला है।

होटल मैनेजमेंट संस्थानों और गांवों में ‘ओटीपी का खेल’

शुभांशु ने उत्तराखंड युवा कांग्रेस चुनाव विवाद की तह में जाते हुए बताया कि कुछ लोगों ने चुनिंदा होटल मैनेजमेंट संस्थानों और ग्रामीण इलाकों में जाकर युवाओं को निशाना बनाया। वहां लोगों से उनकी आईडी नहीं मांगी गई, बल्कि पहले से तैयार एडिटेड आईडी कार्ड्स का उपयोग कर सिर्फ उनके फोन नंबर और ओटीपी (OTP) हासिल किए गए। स्थानीय स्तर पर हुई इस संदिग्ध गतिविधि की भनक लगते ही शुभांशु ने एसएसपी अल्मोड़ा को लिखित शिकायत सौंपकर जांच की मांग की है।

अपनों के दबाव में संगठन, आलाकमान मौन?

शुभांशु का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने इस धांधली के खिलाफ आवाज उठाई, तो पार्टी के भीतर के ही कुछ कद्दावर नेताओं ने उन पर मामला दबाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने दिल्ली स्थित पार्टी आलाकमान और केंद्रीय नेतृत्व को साक्ष्यों सहित ईमेल भेजे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी की छवि धूमिल होने के डर से इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की प्रतिक्रिया

इस हाई-प्रोफाइल विवाद पर जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से संपर्क किया गया, तो उन्होंने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, “फिलहाल मुझे इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। लेकिन यदि किसी भी कार्यकर्ता के पास अनियमितता के ठोस तथ्य हैं, तो उन्हें पार्टी मुख्यालय में अपनी बात रखनी चाहिए।” गोदियाल ने आगे कहा कि पार्टी का एक आंतरिक मंच है और कार्यकर्ताओं को अनुशासन के भीतर रहकर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि भविष्य में संगठन की शुचिता पर सवाल न उठें।

संगठन की साख पर संकट

उत्तराखंड युवा कांग्रेस का यह चुनाव विवाद अब केवल संगठन के भीतर का मसला नहीं रह गया है। सरकारी वोटर डेटा के साथ छेड़छाड़ और डिजिटल धोखाधड़ी के आरोपों ने इसे कानूनी रंग दे दिया है। यदि शुभांशु के दावों की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई सफेदपोश चेहरों पर गाज गिर सकती है। फिलहाल, पूरे प्रदेश की नजरें अब कांग्रेस आलाकमान के अगले कदम पर टिकी हैं— क्या वे विशाल भोसक की नियुक्ति को बरकरार रखेंगे या इस ‘डिजिटल धांधली’ की जांच के आदेश देंगे?

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