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उत्तराखंडफीचर्ड

डीएवी कॉलेज देहरादून बवाल: ‘सांस्कृतिक बारूद’ पर सियासी संग्राम, हरीश रावत ने जताई गहरी चिंता

The Hill India News
Last updated: April 13, 2026 11:11 am
The Hill India News
Published: April 13, 2026
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देहरादून के प्रतिष्ठित डीएवी पीजी कॉलेज में 11 अप्रैल को आयोजित छात्रसंघ समारोह के दौरान हुए बवाल ने न केवल शैक्षणिक माहौल को झकझोर दिया, बल्कि प्रदेश की राजनीति और सांस्कृतिक विमर्श को भी गरमा दिया है। इस घटना को लेकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे राज्य में “सांस्कृतिक बारूद” लाए जाने की संज्ञा दी है।

घटना के अनुसार, छात्रसंघ समारोह में बाहरी राज्य से बुलाए गए गायक मासूम शर्मा पर मंच से अभद्र भाषा और गाली-गलौज करने के आरोप लगे हैं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कार्यक्रम के दौरान माहौल बिगड़ता साफ नजर आ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून पुलिस ने गायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

इस कार्यक्रम में निर्दलीय विधायक उमेश कुमार की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वायरल वीडियो में वे भी कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें करते सुने जा सकते हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है। इस पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि वे एक दिन पहले इसी मंच पर कार्यक्रम में शामिल हुए थे और छात्रों से संवाद किया था। उन्होंने कहा कि डीएवी कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस प्रकार की घटनाएं होना बेहद चिंताजनक है। रावत ने सवाल उठाया कि जिस प्रकार के गीत और भाषा का प्रयोग मंच से किया जा रहा है, वह उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और मूल्यों के लिए खतरा बन सकता है।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि “उत्तराखंड की संस्कृति प्रकृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़ी हुई है। यहां की बोली-भाषा, लोकगीत और संगीत लोगों के जीवन के सुख-दुख से उपजे हैं। ऐसे में यदि गाली-गलौच और अशोभनीय अभिव्यक्तियों को संस्कृति के नाम पर बढ़ावा दिया जाएगा, तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।” रावत ने इसे “सांस्कृतिक अपभ्रंश” करार देते हुए कहा कि इस दिशा में तुरंत गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।

हरीश रावत ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य सरकार और संस्कृति विभाग को ऐसे आयोजनों के लिए एक स्पष्ट एसओपी (Standard Operating Procedure) बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि अन्य संस्कृतियों का समागम होना चाहिए, लेकिन वह स्वस्थ और सकारात्मक होना चाहिए, न कि अश्लीलता और गाली-गलौच पर आधारित।

इस पूरे मामले पर भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विधायक उमेश कुमार के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने गायक को रोकने की कोशिश की थी। मैखुरी ने कहा कि वायरल वीडियो से साफ प्रतीत होता है कि विधायक ने स्थिति को संभालने के बजाय उसे और बढ़ावा दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि “अगर विधायक वास्तव में रोकना चाहते, तो वे माइक लेकर गायक को गाली देने से रोकते और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाते। लेकिन इसके विपरीत वे खुद भी बयानबाजी में लगे नजर आए, जिससे स्थिति और बिगड़ी।” मैखुरी ने कहा कि अब केवल निंदा करने से यह मामला खत्म नहीं होगा, बल्कि जिम्मेदारी तय करनी होगी।

घटना के बाद से स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भी आक्रोश देखा जा रहा है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार की घटनाएं छात्रों के भविष्य और समाज के मूल्यों के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और कॉलेज परिसरों में अनुशासन बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

यह घटना केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसने उत्तराखंड में सांस्कृतिक पहचान और उसके संरक्षण को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग इसे सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं के खिलाफ मान रहे हैं।

कुल मिलाकर, डीएवी कॉलेज देहरादून का यह बवाल अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार, प्रशासन और समाज इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, ताकि शिक्षा के मंदिरों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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