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ट्रंप की धमकी से हिला वैश्विक बाजार, सेंसेक्स 1600 अंक टूटा—निवेशकों में मचा हड़कंप

सोमवार, 13 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते की शुरुआत बेहद खराब नोट पर की। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल के चलते बाजार खुलते ही भारी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों ही बड़े इंडेक्स शुरुआती मिनटों में ताश के पत्तों की तरह बिखर गए, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये कुछ ही पलों में डूब गए।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच विफल हुई शांति वार्ता और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की धमकी को माना जा रहा है। इससे मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा और बढ़ गया है, जिसने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।

बाजार खुलते ही भारी गिरावट

सुबह 9:15 बजे जैसे ही बाजार खुला, सेंसेक्स 1,446 अंकों की गिरावट के साथ 76,103 के स्तर पर आ गया। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 373 अंक टूटकर 23,677 पर खुला। हालांकि गिरावट यहीं नहीं रुकी—सिर्फ कुछ ही मिनटों में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया, जिससे सेंसेक्स 1,624 अंकों तक लुढ़ककर 75,926 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी भी करीब 471 अंक गिरकर 23,579 के आसपास ट्रेड करता नजर आया।

प्री-ओपनिंग सेशन में ही संकेत मिल चुके थे कि बाजार में आज बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि उस दौरान सेंसेक्स 1600 अंकों तक नीचे चला गया था।

हर सेक्टर में बिकवाली का दबाव

आज की गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही। बैंकिंग, फाइनेंशियल, ऑटो, रियल्टी और एनर्जी—लगभग सभी सेक्टर के शेयर लाल निशान में नजर आए। खासकर HDFC Bank, Maruti Suzuki, Eicher Motors, Shriram Finance और Bajaj Finance जैसे बड़े शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।

सिर्फ लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का भी बुरा हाल रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब 2% तक गिर गया, जो यह दर्शाता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई है।

गिरावट की मुख्य वजहें

इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। Middle East में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता का बिना किसी नतीजे के खत्म होना निवेशकों के लिए नकारात्मक संकेत साबित हुआ। इसके तुरंत बाद United States की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की योजना ने हालात को और बिगाड़ दिया।

इसके अलावा Israel द्वारा Iran पर हमले की खबरों ने तनाव को और बढ़ा दिया, जिससे वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बन गया।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है।

महंगा कच्चा तेल देश के इम्पोर्ट बिल को बढ़ाता है, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और भारतीय रुपये पर दबाव बनता है। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों (FIIs) ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे गिरावट और तेज हो गई।

वैश्विक बाजारों में भी गिरावट

भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य प्रमुख बाजारों में भी गिरावट देखी गई। जापान का Nikkei 225, दक्षिण कोरिया का Kospi और हांगकांग का Hang Seng करीब 1% तक नीचे कारोबार कर रहे हैं।

इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स भी कमजोर संकेत दे रहे हैं। S&P 500 और Dow Jones Industrial Average के फ्यूचर्स लगभग 0.80% की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं। वहीं, गिफ्ट निफ्टी ने भी सुबह ही संकेत दे दिया था कि भारतीय बाजार की शुरुआत कमजोर रहने वाली है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब मिडिल ईस्ट के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी।

इसके अलावा आने वाले समय में कंपनियों के तिमाही नतीजे और महंगाई के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक इस समय घबराकर फैसले लेने से बचें और लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान दें।

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