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उत्तराखंड: आपदा के समय जीवनरेखा बनी हेली सेवाएं, चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड में व्यापक मॉक ड्रिल

देहरादून/रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में हेली सेवाएं अब सिर्फ सुविधा का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि आपदा के समय जीवन बचाने वाली सबसे बड़ी ताकत बन चुकी हैं। आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर आपदा से निपटने की अपनी तैयारियों का अभ्यास किया। इस बार की मॉक ड्रिल में खासतौर पर हेली दुर्घटनाओं और हेली रेस्क्यू ऑपरेशन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान हेली सेवाओं की भूमिका बेहद अहम रही है। खासकर दुर्गम पहाड़ी इलाकों में, जहां सड़क मार्ग बाधित हो जाते हैं, वहां हवाई सेवाएं ही एकमात्र प्रभावी विकल्प बन जाती हैं। पिछले साल हुई धराली आपदा इसका बड़ा उदाहरण है, जब खराब मौसम, टूटे रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हेली रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए हजारों लोगों की जान बचाई गई थी। करीब एक सप्ताह तक चले इस अभियान में सैकड़ों शटल उड़ानें संचालित की गईं और लगभग 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) ने पहले से ही कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। UCADA के सीईओ आशीष चौहान के अनुसार, आपदा प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए एक हेलीकॉप्टर को विशेष रूप से आपात स्थितियों के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है। यह हेलीकॉप्टर न केवल आपदा के समय बल्कि मेडिकल इमरजेंसी में भी उपयोगी साबित होगा। हालांकि यह पूरी तरह एयर एंबुलेंस नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को पर्वतीय क्षेत्रों से ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल तक पहुंचाने में इसकी मदद ली जाएगी।

आपदा के दौरान हेली सेवाएं उपलब्ध कराने में निजी कंपनियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। ‘विक्रांत एविएशन’ कंपनी राज्य में लगातार हेली सेवाएं प्रदान कर रही है। खास बात यह है कि ऋषिकेश एम्स की एयर एंबुलेंस सेवा बाधित होने के बावजूद यह कंपनी अपनी सेवाएं जारी रखे हुए है। इस डिजास्टर रिलीफ हेली सेवा का खर्च 60:40 के अनुपात में आपदा प्रबंधन विभाग और UCADA द्वारा वहन किया जाता है। पिछले एक वर्ष में इस सेवा के माध्यम से 100 से अधिक लोगों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है।

धराली आपदा के दौरान हेली सेवाओं ने न केवल रेस्क्यू कार्यों में बल्कि राहत सामग्री पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। प्रभावित क्षेत्रों में कई टन खाद्य सामग्री, दवाइयां और आवश्यक सामान एयरड्रॉप या लैंडिंग के जरिए पहुंचाए गए। विषम मौसम, सीमित दृश्यता और कठिन लैंडिंग जोन जैसी चुनौतियों के बावजूद पायलट्स और रेस्क्यू टीमों ने लगातार ऑपरेशन जारी रखा। यही कारण रहा कि इतनी बड़ी आपदा में जनहानि को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सका।

मॉक ड्रिल के दौरान हेली ऑपरेशन की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी गहन समीक्षा की गई। विशेषज्ञों की टीम ने देहरादून स्थित सहस्त्रधारा हेलीपैड का निरीक्षण करते हुए हेलीकॉप्टर संचालन से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), वेदर मॉनिटरिंग सिस्टम, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली और एयर ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम का जायजा लिया। साथ ही आपात स्थिति में हवाई राहत और निकासी की तैयारियों को भी परखा गया।

यह मॉक ड्रिल केवल हेली ऑपरेशन तक सीमित नहीं रही, बल्कि मैदानी इलाकों में भी आपदा की काल्पनिक स्थितियों पर अभ्यास किया गया। देहरादून के सपेरा बस्ती क्षेत्र में भारी बारिश के कारण रिस्पना नदी में संभावित बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। इस दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधनों के उपयोग की क्षमता का परीक्षण किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं को भी इस मॉक ड्रिल का अहम हिस्सा बनाया गया। कोरोनेशन अस्पताल में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए ट्रायेज सिस्टम, इमरजेंसी सेवाएं, अतिरिक्त बेड, ऑक्सीजन सपोर्ट और रेफरल सिस्टम की तैयारियों का परीक्षण किया गया। अस्पताल प्रशासन के साथ आपदा के समय स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा की गई।

रुद्रप्रयाग जिले में भी व्यापक स्तर पर आपदा प्रबंधन मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। इस दौरान केदारनाथ धाम और चीड़बासा हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास किया गया। क्लाउडबर्स्ट, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना और खराब मौसम जैसी विभिन्न आपदा परिस्थितियों को शामिल करते हुए राहत कार्यों का प्रदर्शन किया गया।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि जिले के सात चिन्हित स्थानों पर यह मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों ने मिलकर भाग लिया। उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान कुछ कमियां सामने आई हैं, जिन्हें दूर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया समय को और कम किया जा सके।

चारधाम यात्रा से पहले इस तरह की व्यापक तैयारियां यह दर्शाती हैं कि उत्तराखंड सरकार और संबंधित एजेंसियां किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। खासतौर पर हेली सेवाओं की मजबूत व्यवस्था इस बार यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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