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मायावती का सपा पर तीखा हमला: ‘दलित महापुरुषों के नाम बदलना ही क्या PDA की राजनीति?’

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष Mayawati ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। दलित और पिछड़े वर्ग की राजनीति को लेकर सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले पर सवाल उठाते हुए मायावती ने आरोप लगाया कि सपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान जिन जिलों और स्थानों का नाम दलित महापुरुषों के नाम पर रखा गया था, सपा सरकार ने उन्हें बदल दिया—क्या यही उनका PDA है?

दरअसल, Jyotiba Phule की जयंती के अवसर पर मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह बयान जारी किया। उन्होंने फुले को सामाजिक परिवर्तन का अग्रदूत बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। मायावती ने लिखा कि महात्मा फुले ने शिक्षा के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों, खासकर महिलाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक कार्य किया। इस संदर्भ में उन्होंने Savitribai Phule का भी उल्लेख किया, जिन्होंने महिला शिक्षा की नींव रखी।

मायावती ने अपने संदेश में फुले के प्रसिद्ध कथन को भी उद्धृत किया—“विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी, नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शूद्र हताश हुए और गुलाम बनकर रह गए।” उन्होंने कहा कि यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने यह भी कहा कि B. R. Ambedkar ने भी फुले के विचारों से प्रेरणा लेकर शिक्षा को सामाजिक उत्थान का मुख्य आधार बनाया।

सपा पर निशाना साधते हुए मायावती ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने दलित महापुरुषों के सम्मान में कई जिलों का नामकरण किया था, लेकिन सपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद उन नामों को बदल दिया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमरोहा जिले का नाम ‘ज्योतिबा फुले नगर’ रखा गया था, जिसे बाद में बदल दिया गया। इसी तरह कासगंज को ‘कांशीराम नगर’, कानपुर देहात को ‘रमाबाई नगर’, संभल को ‘भीमनगर’, शामली को ‘प्रबुद्ध नगर’ और हापुड़ को ‘पंचशील नगर’ नाम दिया गया था।

मायावती का आरोप है कि सपा ने इन सभी जिलों के नाम बदलकर दलित महापुरुषों का अपमान किया और यह उनकी संकीर्ण राजनीति और जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सपा का PDA केवल एक राजनीतिक नारा है, जिसका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। अगर सपा वास्तव में दलितों और पिछड़ों के हित में काम करती, तो वह इन नामों को नहीं बदलती।

बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा सामाजिक न्याय और समानता को प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों के सम्मान को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए गए थे, जबकि अन्य दल केवल दिखावे की राजनीति करते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़े वर्ग की राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। ऐसे में मायावती का यह बयान सपा पर सीधा हमला माना जा रहा है, जिससे राज्य की सियासत और गरमाने की संभावना है।

फिलहाल, सपा की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।

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