
देहरादून/पौड़ी गढ़वाल: देश के विभिन्न हिस्सों में आज सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में डेढ़ घंटे के भीतर दो बार धरती हिलने की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि राहत की बात यह रही कि इन झटकों से किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
जानकारी के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल में पहला भूकंप सुबह 5 बजकर 02 मिनट पर आया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.3 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप की गहराई जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे बताई गई है। सुबह-सुबह आए इस झटके से कई लोग नींद से जाग गए और घरों से बाहर निकल आए।
इसके बाद करीब डेढ़ घंटे के अंतराल पर एक बार फिर धरती कांपी। दूसरा भूकंप सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता पहले झटके से थोड़ी अधिक 3.6 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। इस बार भी भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर ही रही। लगातार दो बार आए झटकों से स्थानीय लोगों में डर का माहौल देखा गया, हालांकि किसी प्रकार की क्षति की सूचना नहीं मिली है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कम तीव्रता वाले भूकंप आमतौर पर बड़े नुकसान का कारण नहीं बनते, लेकिन बार-बार आने वाले झटके भूगर्भीय गतिविधियों की ओर संकेत करते हैं। उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जो भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील जोन में आता है। यही कारण है कि यहां समय-समय पर हल्के से मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।
उधर, उत्तराखंड के अलावा महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में भी आज सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह भूकंप सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता 4.7 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। यह तीव्रता उत्तराखंड में आए भूकंप से अधिक थी, जिससे कुछ इलाकों में लोगों ने कंपन को स्पष्ट रूप से महसूस किया। हालांकि यहां से भी किसी प्रकार के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है।
इसके साथ ही पूर्वोत्तर भारत के नागालैंड राज्य में भी भूकंप आया। नागालैंड के तुएनसांग क्षेत्र में सुबह 5 बजकर 25 मिनट पर भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप की तीव्रता 2.7 मैग्नीट्यूड रही, जो काफी कम मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी कम तीव्रता के भूकंप सामान्यतः किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाते।
बताया जा रहा है कि नागालैंड का यह इलाका म्यांमार सीमा के करीब स्थित है, जहां भूकंपीय गतिविधियां अक्सर देखी जाती हैं। इसी क्रम में म्यांमार में भी सुबह करीब 3 बजकर 40 मिनट पर 3.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप दर्ज किया गया। यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से सक्रिय माना जाता है, जिसके कारण आसपास के भारतीय इलाकों में भी इसके प्रभाव देखने को मिलते हैं।
भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत के कई हिस्से, विशेषकर हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर राज्य, भूकंप के लिहाज से संवेदनशील जोन में आते हैं। इन क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियां लगातार होती रहती हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति सामान्य बताई गई है और किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
ऐसे में विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर रहें, मजबूत फर्नीचर के नीचे शरण लें और खुले स्थानों की ओर जाएं। साथ ही अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।



