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चांद की दहलीज चूमकर सुरक्षित लौटे ‘आर्टेमिस 2’ के जांबाज, नासा ने फहराया सफलता का परचम

वॉशिंगटन/सैन डिएगो: मानव जाति के अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक नासा आर्टेमिस 2 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। चंद्रमा के सुदूर और अंधेरे हिस्सों की परिक्रमा कर चारों अंतरिक्ष यात्री शनिवार सुबह (भारतीय समयानुसार) सुरक्षित धरती पर वापस लौट आए हैं। नासा के ओरियन कैप्सूल ने प्रशांत महासागर के सैन डिएगो कोस्ट पर सटीक लैंडिंग की, जिसके साथ ही 50 साल से अधिक समय बाद शुरू हुआ पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन अपने पहले पड़ाव में पूर्णतः सफल रहा।

6.9 लाख मील का सफर और जांबाज वापसी

नासा ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष के अथाह विस्तार में 6,90,000 मील से अधिक की दूरी तय की। 10 दिनों तक चले इस मिशन में यान ने चंद्रमा के चारों ओर एक जटिल कक्षा में उड़ान भरी। लैंडिंग के तुरंत बाद नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी, आपका घर में स्वागत है! आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्री 11 अप्रैल को सफलतापूर्वक लौट आए हैं, जिससे चंद्रमा के चारों ओर उनका ऐतिहासिक मिशन संपन्न हुआ।

चुनौतियों को मात देकर हासिल की कामयाबी

नासा आर्टेमिस 2 मिशन की यह सफलता इतनी आसान नहीं थी। मिशन को शुरू करने से पहले नासा को कई तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा। पूर्व में यह मिशन फरवरी माह के लिए निर्धारित था, लेकिन रॉकेट के मुख्य इंजन में हाइड्रोजन ईंधन के रिसाव (Leakage) के कारण इसे टालना पड़ा। इसके बाद हीलियम प्रेशर लाइन में आई रुकावट ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी थी।

करीब डेढ़ सप्ताह तक चली गहन मरम्मत के बाद जब 32 मंजिला विशालकाय रॉकेट को फिर से केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड पर लाया गया, तब जाकर इस ऐतिहासिक उड़ान का मार्ग प्रशस्त हुआ। नासा के पास इस प्रक्षेपण के लिए अप्रैल के पहले छह दिनों का सीमित समय था, और टीम ने इसी ‘विंडो’ का सटीक उपयोग करते हुए सफलता की कहानी लिखी।

अपोलो से अलग: विविधता और आधुनिकता का संगम

यह मिशन 1968 से 1972 के बीच चले ‘अपोलो’ कार्यक्रम से कई मायनों में भिन्न और प्रगतिशील है। जहाँ अपोलो युग में केवल श्वेत पुरुषों को चंद्रमा पर भेजा गया था, वहीं नासा आर्टेमिस 2 मिशन समावेशी मानवता का प्रतिनिधित्व करता है। इस दल में:

  • क्रिस्टीना कोच: चंद्रमा के करीब पहुँचने वाली पहली महिला अंतरिक्ष यात्री।

  • विक्टर ग्लोवर: पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री जिन्होंने इस मिशन का हिस्सा बनकर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

  • जेरेमी हैनसेन: कनाडा के पहले अंतरिक्ष यात्री जो इस अमेरिकी अभियान का हिस्सा बने।

  • रीड वाइजमैन: मिशन कमांडर, जिन्होंने “चलो चांद पर चलते हैं!” के उद्घोष के साथ इस यात्रा का नेतृत्व किया।

सैन डिएगो कोस्ट पर लैंडिंग का अद्भुत दृश्य

जब ओरियन यान ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, तो घर्षण के कारण इसकी गति और तापमान चरम पर था। पैराशूट के माध्यम से यान की गति को धीमा किया गया और इसने सैन डिएगो के पास समुद्र में छप (Splashdown) किया। अमेरिकी नौसेना और नासा की रिकवरी टीमों ने तत्काल मौके पर पहुँचकर चारों अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस नजारे को देखने के लिए तटों पर हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे, जो 1960 और 70 के दशक के अपोलो अभियानों की यादें ताजा कर रहे थे।

अब ‘आर्टेमिस 3’ की बारी: चांद पर कदम रखने की तैयारी

नासा आर्टेमिस 2 मिशन की सफलता ने अगले बड़े कदम यानी ‘आर्टेमिस-3’ का रास्ता साफ कर दिया है। वर्तमान मिशन में यात्री केवल चंद्रमा की कक्षा तक गए और उसकी परिक्रमा की, लेकिन अगला लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर उतरना है। नासा का लक्ष्य अगले दो वर्षों के भीतर मानव को एक बार फिर चंद्रमा की धूल पर चलने के लिए तैयार करना है। यह मिशन न केवल चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) तक पहुँचने के लिए एक महत्वपूर्ण ‘टेस्ट बेड’ भी साबित होगा।

फ्लोरिडा से शुरू हुआ था ‘न्यू एरा’

इस मिशन ने फ्लोरिडा के उसी ऐतिहासिक लॉन्च पैड से उड़ान भरी थी, जहाँ से दशकों पहले नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद की यात्रा पर निकले थे। लॉन्चिंग के वक्त केनेडी स्पेस सेंटर के पास करीब 10 हजार लोग इस नए युग की शुरुआत के गवाह बने थे। अपोलो मिशन के जीवित अंतरिक्ष यात्रियों ने भी नई पीढ़ी का उत्साहवर्धन किया, जो पुरानी और नई तकनीक के बीच एक सेतु की तरह नजर आया।

नासा आर्टेमिस 2 मिशन की सफलता केवल अमेरिका की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की वैज्ञानिक प्रगति का प्रमाण है। 53 साल बाद मानव की चांद तक पहुँचने की यह कोशिश अब एक निर्णायक मोड़ पर है। जिस तरह से सुरक्षित लैंडिंग के साथ यह मिशन समाप्त हुआ है, उससे यह साफ है कि वह दिन दूर नहीं जब इंसान चांद पर अपनी स्थायी कॉलोनी बसाने की दिशा में काम करेगा। फिलहाल, पूरा विश्व इन चार नायकों की वापसी का जश्न मना रहा है।

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