
देहरादून: उत्तराखंड ने डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ‘जनगणना 2027’ के अंतर्गत अपनी ‘स्व-गणना’ (Self Enumeration) की प्रक्रिया पूरी कर राज्य में इस महा-अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। देश में पहली बार हो रही पूरी तरह से डिजिटल जनगणना को लेकर मुख्यमंत्री ने उत्साह जताया और इसे पारदर्शी शासन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया।
मुख्यमंत्री आवास से हुई शुरुआत, अधिकारियों ने दी डिजिटल जानकारी
शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जनगणना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सीएम धामी ने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार का विवरण दर्ज किया। इस अवसर पर निदेशक (जनगणना संचालन) श्रीमती ईवा श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को डिजिटल जनगणना की बारीकियों और पोर्टल की सुरक्षा विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी श्रीमती गीता धामी भी इस प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहीं।
‘हाउस लिस्टिंग’ के साथ प्रथम चरण का आगाज़
जनगणना 2027 का यह पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ (HLO) के रूप में जाना जा रहा है। इसके तहत मुख्य रूप से आवासीय स्थिति, घर में उपलब्ध सुविधाओं और घरेलू विवरणों से संबंधित डेटा एकत्र किया जा रहा है। इस बार की सबसे बड़ी विशेषता ‘स्व-गणना’ है, जहाँ नागरिकों को यह सुविधा दी गई है कि वे स्वयं पोर्टल पर जाकर बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपने परिवार की जानकारी सटीक रूप से दर्ज कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण बताया।

सटीक डेटा से बनेगी भविष्य की नीतियां: सीएम धामी
प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत पहली बार डिजिटल जनगणना की ओर बढ़ रहा है। यह प्रक्रिया न केवल डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ को अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाने में भी सहायक होगी।” मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि इस पूरे कार्य को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न किया जाए।
जनता से अपील: “स्वयं बनें अपनी गणना के भागीदार”
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के समस्त नागरिकों से इस राष्ट्रीय अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि नागरिक स्व-गणना पोर्टल का उपयोग करें और अपने परिवार की सही जानकारी दर्ज करें। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में एकत्रित किया गया डेटा पूरी तरह सुरक्षित है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और कल्याणकारी नीतियों के निर्माण के लिए किया जाएगा।

डिजिटल जनगणना के लाभ और सुरक्षा
इस डिजिटल मुहिम से न केवल कागजी कार्यवाही कम होगी, बल्कि जनगणना के परिणाम भी पहले की तुलना में बहुत जल्दी सामने आएंगे। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से मानवीय त्रुटियों की संभावना नगण्य हो जाती है। रीयल-टाइम डेटा अपडेट होने से राज्य की आर्थिक और सामाजिक नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से डिजाइन किया जा सकेगा।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि स्व-गणना पोर्टल को बेहद सरल बनाया गया है ताकि सामान्य नागरिक भी आसानी से इसका उपयोग कर सकें। यह पहल उत्तराखंड में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ विकास की आधारशिला को भी मजबूत करेगी।



