By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तराखंड में 16 साल बाद ‘डिजिटल महाकुंभ’: 30 हजार नक्शों और 34 हजार कर्मियों के साथ शुरू होगी जनगणना
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में 16 साल बाद ‘डिजिटल महाकुंभ’: 30 हजार नक्शों और 34 हजार कर्मियों के साथ शुरू होगी जनगणना
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में 16 साल बाद ‘डिजिटल महाकुंभ’: 30 हजार नक्शों और 34 हजार कर्मियों के साथ शुरू होगी जनगणना

The Hill India News
Last updated: March 2, 2026 3:07 am
The Hill India News
Published: March 2, 2026
Share
SHARE

देहरादून। उत्तराखंड की सामाजिक और आर्थिक दिशा को नई पहचान देने के लिए राज्य में जनगणना का बिगुल बज चुका है। साल 2011 के एक लंबे अंतराल के बाद, देवभूमि एक ऐसी ऐतिहासिक प्रक्रिया का गवाह बनने जा रही है, जो न केवल तकनीक से लैस होगी, बल्कि राज्य के भविष्य के नीति-निर्माण का आधार भी बनेगी। इस बार की उत्तराखंड जनगणना 2027 कई मायनों में खास है—यह पूरी तरह पेपरलेस होगी और मोबाइल एप के जरिए घर-घर की जानकारी जुटाएगी।

Contents
डिजिटल बदलाव: कागज की जगह अब एप का दौर30 हजार डिजिटल मानचित्र: जनगणना की नई ‘रीढ़’भौगोलिक चुनौतियां: बर्फबारी से पहले ‘ऊंचाई’ पर गणना16 साल का अंतराल: विकास और बदलाव का विश्लेषण2027 का मुख्य अभियान: 9 से 28 फरवरी तक की समय-सीमानीति निर्माण में डेटा की शक्ति

डिजिटल बदलाव: कागज की जगह अब एप का दौर

पिछले दशकों में जनगणना की प्रक्रिया भारी-भरकम रजिस्टरों और कागजी फॉर्मों के इर्द-गिर्द घूमती थी, जिसमें मानवीय त्रुटि की संभावना बनी रहती थी। लेकिन इस बार, जनगणना निदेशालय ने इसे पूरी तरह डिजिटल जनगणना का स्वरूप दिया है। राज्य भर में लगभग 34 हजार कर्मियों को इस कार्य के लिए तैनात किया जा रहा है, जिन्हें विशेष रूप से डिजिटल डेटा एंट्री का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

डिजिटल एंट्री का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि डेटा सीधे सेंट्रल सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे विश्लेषण में लगने वाले सालों के समय को कम किया जा सकेगा। हर मकान का भौगोलिक स्थान (Geo-location) भी मैप किया जाएगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि राज्य के किस हिस्से में शहरीकरण का दबाव बढ़ रहा है और कहाँ पलायन की स्थिति गंभीर है।

30 हजार डिजिटल मानचित्र: जनगणना की नई ‘रीढ़’

इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है—मकान सूचीकरण (Houselisting)। जनगणना के पहले चरण में राज्य के कोने-कोने को कवर करने के लिए 30,000 डिजिटल मानचित्रों का उपयोग किया जाएगा। ये मानचित्र न केवल कर्मियों को उनके कार्यक्षेत्र की पहचान करने में मदद करेंगे, बल्कि इनके माध्यम से हर संरचना की सटीक स्थिति, उसका उपयोग (आवासीय या व्यावसायिक) और निर्माण सामग्री जैसी सूक्ष्म जानकारियां भी संकलित की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये मानचित्र भविष्य में आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन के लिए भी मील का पत्थर साबित होंगे।

भौगोलिक चुनौतियां: बर्फबारी से पहले ‘ऊंचाई’ पर गणना

उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियां हमेशा से प्रशासन के लिए चुनौती रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, जनगणना निदेशालय ने एक रणनीतिक समय-सारिणी तैयार की है। राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों, जहाँ सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण रास्ते बंद हो जाते हैं, वहां गणना का कार्य देश के बाकी हिस्सों से पहले पूरा किया जाएगा।

  • लक्ष्य क्षेत्र: बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और ऊंचाई पर स्थित 131 गांव।

  • समय सीमा: अक्टूबर से नवंबर के बीच इन क्षेत्रों में डेटा संग्रह पूरा कर लिया जाएगा।

  • उद्देश्य: कड़ाके की ठंड और बर्फबारी से पहले हर नागरिक का डेटा सुरक्षित करना।

16 साल का अंतराल: विकास और बदलाव का विश्लेषण

आमतौर पर जनगणना हर 10 वर्ष में होती है, लेकिन वैश्विक महामारी और अन्य तकनीकी कारणों से इस बार यह अंतराल 16 साल (2011 से 2027) का हो गया है। यह 16 साल का रिकॉर्ड उत्तराखंड के लिए बेहद अहम है।

  • जनसांख्यिकीय बदलाव: इन वर्षों में उत्तराखंड की आबादी का स्वरूप कितना बदला है?

  • शिक्षा और रोजगार: साक्षरता दर में कितनी वृद्धि हुई और कार्यबल का रुझान किस ओर है?

  • पलायन: पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानी इलाकों की ओर हुए विस्थापन की स्पष्ट तस्वीर इस बार के हाउस होल्ड एन्यूमरेशन से साफ हो जाएगी।

अधिकारी इन आंकड़ों की तुलना 2011 के डेटा से करेंगे ताकि यह समझा जा सके कि बीते डेढ़ दशक में राज्य ने कितनी प्रगति की है।

2027 का मुख्य अभियान: 9 से 28 फरवरी तक की समय-सीमा

राज्य के मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मुख्य जनगणना अभियान 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच संचालित किया जाएगा। इस दौरान ‘एन्यूमरेशन’ प्रक्रिया के तहत प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जानकारी, आर्थिक स्थिति और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सटीक जानकारी साझा करें, क्योंकि यही डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुँचाने में मदद करेगा।

नीति निर्माण में डेटा की शक्ति

किसी भी राज्य के विकास के लिए ‘डेटा’ ही सबसे बड़ा हथियार होता है। डिजिटल जनगणना से प्राप्त आंकड़े सीधे तौर पर निम्नलिखित क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे:

  1. स्वास्थ्य सेवाएं: कहाँ नए अस्पतालों और सीएचसी की आवश्यकता है।

  2. शिक्षा: स्कूलों का सुदृढ़ीकरण और नए संस्थानों की स्थापना।

  3. बुनियादी ढांचा: सड़कों, पेयजल लाइनों और बिजली आपूर्ति का विस्तार।

  4. सामाजिक सुरक्षा: पेंशन और सब्सिडी योजनाओं का सटीक लक्ष्यीकरण।


उत्तराखंड में शुरू होने वाली यह डिजिटल जनगणना केवल एक गिनती नहीं है, बल्कि यह राज्य के पुनरुद्धार का खाका है। 34 हजार कर्मियों की मेहनत और डिजिटल मानचित्रों की सटीकता जब मिलेगी, तो उत्तराखंड के पास अपनी समस्याओं और संभावनाओं का एक वैज्ञानिक दस्तावेज होगा। 2027 की यह गणना निश्चित रूप से ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को सिद्ध करने में सहायक होगी।

You Might Also Like

उत्तराखंड दौरे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जन्मदिन पर प्रदेश को देंगी कई बड़ी सौगातें
बंगाल से गुजरात तक इन 9 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, जानें कैसा रहेगा मौसम
दिल्ली, देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने को लेकर नितिन गडकरी ने दी खुसखबरी
सत्ता में आते ही लोकायुक्त की स्थापना करेगी कांग्रेस, भ्रष्टाचारियों पर होगी सख्त कार्रवाई: गणेश गोदियाल
दिल्ली की हवा ‘जहरीली’ — लगातार 17वें दिन AQI 400 के पार, क्लाउड सीडिंग से मिली मामूली राहत
TAGGED:Digital CensusDigital MapHouse Hold EnumerationUttarakhand Census 2027Uttarakhand Statistics
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

दिल्ली में हाई-वोल्टेज ड्रामा: राहुल, प्रियंका और अखिलेश यादव पुलिस हिरासत में, पीएम आवास के बाहर धरना स्थल छावनी में तब्दील

The Hill India News
The Hill India News
July 21, 2026
हरिद्वार आम महोत्सव में मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान: किसान उत्तराखंड की असली ताकत, एप्पल मिशन पर 80% सब्सिडी और ‘हिमालय ब्रांड’ से ग्लोबल पहचान
उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को सख्त फटकार: प्रभात ध्यानी की ट्रेन से गिरफ्तारी पर पूछा- क्या नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई है?
राहुल गांधी का 7 लोक कल्याण मार्ग पर धरना: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक पर संसद से सड़क तक संग्राम
बारिश का महाअलर्ट: दिल्ली से हिमाचल और यूपी-बिहार तक मौसम का कहर, 20 राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी; प्रशासन अलर्ट पर
छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरी कांग्रेस: राहुल, प्रियंका और खड़गे का पीएम आवास तक मार्च, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
‘मेरी पीठ में खंजर घोंपा, सारे चोर भाजपा में चले गए’— ममता बनर्जी का बड़ा हमला, विपक्षी एकता की भी दोहराई अपील
मध्यप्रदेश में UCC को मिली विधानसभा की मंजूरी: हंगामे, ‘जय श्रीराम’ के नारों और तीखी बहस के बीच पास हुआ ऐतिहासिक विधेयक
पेपर लीक पर उत्तराखंड में उबाल: गैरसैंण से हल्द्वानी तक छात्रों का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
‘लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में…’ बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट में मतभेद, अब चीफ जस्टिस तय करेंगे कानूनी दिशा
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?