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देवभूमि में मानवता शर्मसार: नैनीताल में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म, नशीला पदार्थ पिलाकर दरिंदों ने की हैवानियत

नैनीताल/काठगोदाम: उत्तराखंड के शांत वादियों वाले नैनीताल जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। काठगोदाम थाना क्षेत्र में एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता के परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर दोनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बाजार गई थी नाबालिग, हैड़ाखान रोड पर मिली बेसुध

घटनाक्रम के अनुसार, काठगोदाम क्षेत्र की रहने वाली एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की 24 फरवरी की देर शाम घर के पास ही बाजार में चाऊमीन लेने गई थी। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटी, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। अंधेरा होने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद पीड़िता हैड़ाखान रोड पर अत्यंत ही नाजुक और बेसुध हालत में मिली।

परिजनों का आरोप है कि जब वे मौके पर पहुंचे, तो वहां दो युवक मौजूद थे जो उनकी बेटी को हवस का शिकार बना चुके थे। पीड़िता ने होश में आने पर जो आपबीती सुनाई, वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाली थी।


नशीला पदार्थ पिलाकर कार में की दरिंदगी

पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने बताया कि पड़ोस में ही रहने वाले दो युवकों ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपनी कार में बैठा लिया था। इसके बाद आरोपी उसे सुनसान हैड़ाखान रोड की ओर ले गए। वहां आरोपियों ने नाबालिग को कोई नशीला पदार्थ पिला दिया, जिससे वह अर्धमूर्छित अवस्था में आ गई। इसी का फायदा उठाकर दोनों दरिंदों ने उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई:

  • पॉक्सो एक्ट: पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज किया है।

  • गिरफ्तारी: एसपी सिटी मनोज कत्याल के निर्देशन में टीम ने छापेमारी कर दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

  • न्यायिक हिरासत: पुलिस ने मेडिकल परीक्षण के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

“यह एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है। परिजनों की तहरीर मिलते ही तत्काल मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।” – मनोज कत्याल, एसपी सिटी, नैनीताल


रुद्रपुर में भी ‘हैवानियत’: देवर के सामने महिला से गैंगरेप

नैनीताल की यह घटना अभी शांत भी नहीं हुई थी कि ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर से भी एक डरावनी खबर ने राज्य को दहला दिया। रुद्रपुर में एक महिला के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस वारदात को महिला के देवर के सामने ही अंजाम दिया गया।

रुद्रपुर मामले की मुख्य बातें:

  1. मेले से वापसी: महिला अपने देवर के साथ ‘सरस मेले’ से घर लौट रही थी।

  2. पहचान का फायदा: रास्ते में दो बाइकों पर सवार तीन युवक मिले, जो कथित तौर पर देवर के परिचित या दोस्त थे।

  3. तमंचे के बल पर अगवा: सामान्य बातचीत के बाद अचानक आरोपियों ने तमंचा निकाला और महिला को जबरन बाइक पर बैठाकर सुनसान मैदान में ले गए।

  4. सामूहिक दुष्कर्म: दरिंदों ने देवर के सामने ही महिला के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया और मौके से फरार हो गए।


उत्तराखंड में बढ़ते अपराध: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

एक ही समय के अंतराल में नैनीताल और रुद्रपुर जैसी घटनाओं ने पुलिस प्रशासन और सरकार की ‘सुरक्षित उत्तराखंड’ की छवि को चुनौती दी है। स्थानीय लोगों में इन घटनाओं को लेकर भारी रोष है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि नशीले पदार्थों की बढ़ती प्रवृत्ति और सुनसान इलाकों में पुलिस गश्त की कमी के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

प्रशासन का रुख और एहतियात

इन घटनाओं के बाद डीजीपी कार्यालय से सभी जिलों के कप्तानों को निर्देश दिए गए हैं कि महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। विशेष रूप से:

  • शाम के समय बाजारों और सुनसान सड़कों पर एंटी-रोमियो स्क्वाड और पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।

  • पर्यटन क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता सुनिश्चित हो।

  • संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्थानीय मुखबिर तंत्र को मजबूत किया जाए।


क्या केवल गिरफ्तारी काफी है?

नैनीताल और रुद्रपुर की ये घटनाएं समाज के लिए एक बड़ा सबक हैं। जहाँ एक ओर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाई है, वहीं दूसरी ओर सवाल यह है कि आखिर देवभूमि की बेटियां घर से बाहर निकलने में डर क्यों रही हैं? काठगोदाम की घटना में नशीले पदार्थ का इस्तेमाल और रुद्रपुर में तमंचे के बल पर अपहरण यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन में कानून का खौफ खत्म होता जा रहा है। अब समय आ गया है कि इन मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बन सके।

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