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देहरादून में भू-माफिया और बिल्डर्स पर DM सविन बंसल की बड़ी स्ट्राइक, फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्री पर FIR दर्ज

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सरकारी और न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित भूमि पर गिद्ध नजर गड़ाए बैठे भू-माफियाओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने निर्णायक जंग छेड़ दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने एक बड़े भूमि घोटाले का पर्दाफाश करते हुए कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर भूमि का क्रय-विक्रय करने वाले बिल्डर्स, क्रेता और विक्रेताओं के विरुद्ध थाना शहर कोतवाली में संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।

बाहरी राज्यों के भू-माफियाओं का सिंडिकेट सक्रिय

प्रशासनिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि चंडीगढ़, पंजाब और अन्य पड़ोसी राज्यों के बिल्डर्स व भू-माफिया उत्तराखंड की प्रतिबंधित जमीनों को निशाना बना रहे हैं। ये माफिया उन जमीनों पर नजर गड़ाए हुए हैं, जिन पर माननीय न्यायालय ने क्रय-विक्रय पर पूर्णतः रोक लगा रखी है। देहरादून भूमि घोटाला के इस ताजा मामले में यह स्पष्ट हुआ है कि फर्जी अभिलेखों के जरिए न केवल सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं, बल्कि पीएसीएल (PACL) जैसी प्रतिबंधित श्रेणी की संपत्तियों को भी खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की गई।

आमवाला तरला और गोल्डन फॉरेस्ट भूमि का मामला

जिलाधिकारी के संज्ञान में आया कि मौजा आमवाला तरला स्थित खसरा संख्या 94ख, 134, 135 एवं 136 की भूमि, जो कानूनी रूप से विवादित और प्रतिबंधित है, उसे कूटरचित तरीके से पंजीकृत कराया गया। शिकायतकर्ता ने विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

जांच में पाया गया कि उक्त भूमि पर्ल्स एग्रो टेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PACL) और गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी परिसंपत्तियों का हिस्सा है। इन संपत्तियों पर माननीय उच्चतम न्यायालय और अन्य विधिक निकायों के स्पष्ट प्रतिबंध लागू हैं। इसके बावजूद, विक्रेता ने तथ्यों को छिपाकर और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इसकी रजिस्ट्री करा दी।

सब-रजिस्ट्रार कार्यालय रडार पर: प्रशासनिक एक्शन तय

इस मामले में केवल भू-माफिया ही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की मिलीभगत की भी बू आ रही है। जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए सब-रजिस्ट्रार देहरादून की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं।

“न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि का लेन-देन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 83 के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।” – सविन बंसल, जिलाधिकारी देहरादून

प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में हुई पूर्व की कार्रवाई की तर्ज पर अब देहरादून रजिस्ट्रार कार्यालय का भी वृहद निरीक्षण और ऑडिट किया जा सकता है।

तहसीलदार को निर्देश: दाखिल-खारिज होंगे निरस्त

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि इन फर्जी विलेखों के आधार पर भूमि का दाखिल-खारिज (Mutation) हो चुका है, तो संबंधित तहसीलदार उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करें। इसके साथ ही, उप जिलाधिकारी (SDM) सदर को सभी संदिग्ध विलेखों की पुनः गहन जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है।

जिला प्रशासन की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति

भू-माफिया पर कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तराखंड की कृषि और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों की जगह जेल में है। बाहरी बिल्डर्स द्वारा स्थानीय कानूनों और न्यायालय के आदेशों को दरकिनार कर किए जा रहे निवेश पर अब प्रशासन की पैनी नजर है।

पुलिस कार्रवाई की मुख्य बातें:

  • थाना: शहर कोतवाली, देहरादून में एफआईआर दर्ज।

  • प्रमुख आरोपी: कूटरचित दस्तावेज तैयार करने वाले बिल्डर्स, क्रेता और विक्रेता।

  • कानूनी धाराएं: धोखाधड़ी, कूट रचना (Forgery) और रजिस्ट्रेशन अधिनियम की धारा 83।

  • जांच का दायरा: सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मचारियों की संलिप्तता की भी होगी जांच।

देहरादून का यह प्रकरण राज्य में भू-कानूनों की सख्ती और प्रशासनिक सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। गोल्डन फॉरेस्ट भूमि विवाद और PACL जैसी संपत्तियों का अवैध विक्रय न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह उन हजारों निवेशकों के साथ भी धोखा है जिनका पैसा इन संपत्तियों से जुड़ा है। जिलाधिकारी सविन बंसल की इस त्वरित स्ट्राइक ने जनता के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास बहाली का काम किया है।

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