हल्द्वानी/नैनीताल: उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। कल यानी मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) इस संवेदनशील मुद्दे पर सुनवाई करने जा रही है। यह सुनवाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बनभूलपुरा की गलियों में बसे लगभग 4,365 परिवारों और 40 हजार से अधिक की आबादी के भविष्य का फैसला है।
अदालती कार्यवाही को देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह सतर्क है। हल्द्वानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए हैं कि पूरा क्षेत्र एक अभेद्य किले में तब्दील होता नजर आ रहा है।
क्या है पूरा विवाद? 30 हेक्टेयर भूमि और 40 हजार जिंदगियां
विवाद की जड़ रेलवे का वह दावा है, जिसमें विभाग ने बनभूलपुरा की लगभग 29-30 हेक्टेयर भूमि को अपनी संपत्ति बताया है। रेलवे के अनुसार, इस भूमि पर दशकों से अवैध कब्जा किया गया है। दूसरी ओर, वहां रह रहे हजारों लोगों का तर्क है कि वे यहां कई पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनके पास पट्टे व सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं।
आंकड़ों में बनभूलपुरा की स्थिति:
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प्रभावित घर: लगभग 4,365 भवन।
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प्रभावित जनसंख्या: 40,000 से अधिक।
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विवादित क्षेत्र: करीब 78 एकड़ (30 हेक्टेयर) भूमि।
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बुनियादी ढांचा: इस क्षेत्र में कई सरकारी स्कूल, मस्जिद, मंदिर और दशकों पुराने अस्पताल भी स्थित हैं।
छावनी में तब्दील हुआ शहर: चप्पे-चप्पे पर पहरा
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के मद्देनजर किसी भी अप्रिय घटना या विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा घेरा तैयार किया है। हल्द्वानी में पहले से तैनात पुलिस बल के अलावा, पड़ोसी जनपदों से भी अतिरिक्त कुमक बुलाई गई है।
सुरक्षा व्यवस्था का खाका:
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बाहरी सुरक्षा बल: आईआरबी (IRB) और पीएसी (PAC) की कई टुकड़ियां हल्द्वानी पहुंच चुकी हैं।
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हाई-टेक निगरानी: बनभूलपुरा की संकरी गलियों में ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।
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खुफिया अलर्ट: एलआईयू (LIU) और अन्य खुफिया एजेंसियां क्षेत्र में सक्रिय हैं ताकि किसी भी संभावित अशांति की सूचना समय रहते मिल सके।
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सोशल मीडिया पर नजर: पुलिस का साइबर सेल भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मॉनिटरिंग कर रहा है।
“कानून का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता”: प्रशासन की अपील
सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेई ने स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। बाजपेई ने स्पष्ट किया, “सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।”
वहीं, एसपी सिटी मनोज कत्याल ने सुरक्षा तैयारियों की पुष्टि करते हुए कहा कि अराजक तत्वों पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति शहर का माहौल खराब करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बनभूलपुरा में खामोश बेचैनी और उम्मीद
जैसे-जैसे सुनवाई का वक्त करीब आ रहा है, बनभूलपुरा के निवासियों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं। क्षेत्र के लोग सामूहिक दुआएं और प्रार्थनाएं कर रहे हैं। पिछली सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय पक्ष को ध्यान में रखते हुए बेदखली पर रोक लगाई थी, जिससे लोगों की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।
[Image Suggestion: Local residents gathering peacefully or discussing the case in a local tea shop]
राजनीतिक गलियारों में हलचल
उत्तराखंड की राजनीति में भी यह मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को मानवीय आधार पर इन परिवारों के पुनर्वास या नियमितीकरण की दिशा में काम करना चाहिए, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क है कि वह केवल न्यायालय के निर्देशों का पालन कर रहा है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले इस मामले का समाधान राज्य की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है।
फैसले पर टिकी हैं सबकी नजरें
कल सुप्रीम कोर्ट में होने वाली यह सुनवाई तय करेगी कि बनभूलपुरा के हजारों परिवारों के सिर पर छत रहेगी या रेलवे के विस्तार के लिए वहां बुलडोजर चलेंगे। क्या कोर्ट मानवीय संवेदनाओं और रेलवे के विकास के बीच कोई बीच का रास्ता निकालेगा? यह कल स्पष्ट हो जाएगा। तब तक के लिए हल्द्वानी प्रशासन ने कमर कस ली है और शहर में शांति बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।



