
नई दिल्ली/हैदराबाद: भारत में जनसंख्या और जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Shift) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। भाजपा नेता नवनीत राणा (Navneet Rana) द्वारा हिंदुओं को ‘चार बच्चे’ पैदा करने की सलाह देने के बाद, AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने तीखा पलटवार किया है। ओवैसी ने न केवल अपने परिवार का उदाहरण दिया, बल्कि देश की गिरती प्रजनन दर (TFR) को लेकर भी केंद्र सरकार और दक्षिणपंथी विचारकों को घेरा।
“आपको कौन रोक रहा है?” – ओवैसी का तंज
हैदराबाद में मीडिया से बात करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने नवनीत राणा के बयान पर चुटकी ली। उन्होंने कहा:
“आपको कौन रोक रहा है? मेरे खुद के छह बच्चे हैं। करो ना भाई, कोई रोक रहा है आपको?”
ओवैसी ने आगे कहा कि देश में बच्चों की संख्या को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग कानून हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि महाराष्ट्र में दो से अधिक बच्चे होने पर पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलती, जबकि तेलंगाना में इस नियम में ढील दी गई है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में चंद्रबाबू नायडू ने भी अधिक बच्चे पैदा करने की वकालत की थी।
मुसलमानों के TFR पर ओवैसी के आंकड़े
ओवैसी ने जनसंख्या नियंत्रण के दावों को आंकड़ों के जरिए चुनौती दी। उन्होंने विशेषज्ञों और सरकारी डेटा का हवाला देते हुए कहा:
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तेजी से गिरता TFR: भारत का टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) अब रिप्लेसमेंट लेवल से भी नीचे जा रहा है।
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मुसलमानों में गिरावट: ओवैसी ने दावा किया कि मुसलमानों की प्रजनन दर में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह अभी हिंदुओं के बराबर नहीं है, लेकिन जल्द ही वहां तक पहुंच जाएगी।
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ओवरटेक करने का डर: उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जाता है कि मुसलमान आबादी के मामले में हिंदुओं को पीछे छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि 2069-2070 तक हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों की जनसंख्या स्थिर (Stabilize) हो जाएगी।
‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ और बूढ़ा होता भारत
जनसंख्या बहस को आर्थिक सुरक्षा से जोड़ते हुए ओवैसी ने एक गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भारत के पास अगले 20-22 साल तक ही ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (युवा आबादी का लाभ) उठाने का मौका है।
“विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 30-40 साल में भारत की करीब 50 फीसदी आबादी बुजुर्ग हो जाएगी। हम सुपरपावर बनने का मौका खो रहे हैं क्योंकि हम इस युवा शक्ति का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।”
विवाद की जड़: नवनीत राणा का ‘हिंदुस्तान बनाम पाकिस्तान’ बयान
इस पूरे विवाद की शुरुआत भाजपा नेता नवनीत राणा के एक हालिया बयान से हुई थी। राणा ने एक मौलाना के कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा था:
“वे (मुसलमान) बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करके हिंदुस्तान को पाकिस्तान में बदलना चाहते हैं। अगर उनके पास 19-30 बच्चे और चार पत्नियां हो सकती हैं, तो हम सिर्फ एक बच्चे से क्यों संतुष्ट हो जाएं? हिंदुओं को भी कम से कम तीन से चार बच्चे पैदा करने चाहिए।”
राणा के इस बयान को विपक्षी दलों ने नफरत फैलाने वाला और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश बताया है।
विशेषज्ञों का क्या है कहना? (Technical Insight)
जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का राष्ट्रीय औसत $TFR$ अब 2.0 पर आ गया है, जो प्रतिस्थापन स्तर ($2.1$) से नीचे है। इसका मतलब है कि भविष्य में भारत की आबादी बढ़ने के बजाय कम होने लगेगी। ओवैसी का यह तर्क कि भारत ‘एजिंग सोसायटी’ (बूढ़ा समाज) की ओर बढ़ रहा है, चीन और जापान जैसे देशों के वर्तमान संकट से मेल खाता है।
मुख्य बिंदु: ओवैसी बनाम नवनीत राणा
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मुद्दा: जनसंख्या नियंत्रण और धार्मिक जनसांख्यिकी।
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नवनीत राणा का तर्क: अस्तित्व बचाने के लिए हिंदुओं को 4 बच्चे पैदा करने चाहिए।
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ओवैसी का पलटवार: प्रजनन दर गिर रही है, असली मुद्दा भविष्य में बढ़ती बुजुर्ग आबादी है।
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राजनीतिक मोड़: चंद्रबाबू नायडू और मोहन भागवत के बयानों का भी दिया गया हवाला।



