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उत्तराखंड में ‘हर घर नल’ योजना को मिली संजीवनी: केंद्रीय बजट 2026 से ठेकेदारों की भुगतान राह आसान, सीएम धामी ने जताया आभार

The Hill India News
Last updated: February 4, 2026 12:40 pm
The Hill India News
Published: February 4, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों में ‘हर घर नल-हर घर जल’ पहुंचाने का सपना अब पूर्णता की ओर अग्रसर है। लंबे समय से बजट की कमी और तकनीकी बाधाओं के कारण अधर में लटकी जल जीवन मिशन उत्तराखंड की योजनाओं को केंद्रीय बजट 2026 ने नई ऑक्सीजन दी है। केंद्र सरकार द्वारा इस मिशन के लिए 67,670 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किए जाने के बाद, राज्य में रुके हुए कार्यों और ठेकेदारों के लंबित भुगतानों का रास्ता साफ हो गया है।

Contents
बजट के अभाव में अंतिम चरण में अटकी थी योजनामुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का केंद्र को आभारराज्य की वित्तीय स्थिति और 90:10 का समीकरणठेकेदारों में जगी उम्मीद की किरणभविष्य की राह

बजट के अभाव में अंतिम चरण में अटकी थी योजना

उत्तराखंड में जल जीवन मिशन अपनी सफलता के करीब तो था, लेकिन ‘फिनिशिंग लाइन’ पर आकर इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई थी। केंद्र से अपेक्षित किश्तें जारी न होने के कारण योजनाओं का ‘कम्प्लिशन सर्टिफिकेट’ जारी नहीं हो पा रहा था। सबसे बड़ी चुनौती उन ठेकेदारों के सामने थी, जिन्होंने अपनी जमा-पूंजी लगाकर धरातल पर पाइपलाइन बिछाने और बुनियादी ढांचा तैयार करने का काम पूरा किया था।

आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार से उत्तराखंड को अभी 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि मिलना बाकी है। विडंबना यह रही कि राज्य सरकार ने अपने निर्धारित अंशदान से 650 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर दिए थे, ताकि काम न रुके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का केंद्र को आभार

केंद्रीय बजट में जल जीवन मिशन के लिए फंड आवंटित होने और योजना की समय सीमा बढ़ाए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बजट केवल एक वित्तीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद है जो शुद्ध पेयजल की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

“ठेकेदार लंबे समय से अपने बकाये को लेकर संपर्क कर रहे थे। हमने केंद्र को कई बार रिमांडर भेजे थे। अब बजट में प्रावधान और समय सीमा बढ़ने से न केवल काम पूरे होंगे, बल्कि राज्य द्वारा अग्रिम भुगतान की गई राशि भी वापस मिल पाएगी।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राज्य की वित्तीय स्थिति और 90:10 का समीकरण

उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के लिए जल जीवन मिशन के तहत केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 90:10 के अनुपात में है। यानी 90 प्रतिशत पैसा केंद्र को और 10 प्रतिशत राज्य को देना होता है। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों में राज्य ने अपनी वित्तीय सीमाओं से बाहर जाकर भुगतान किया। अब केंद्रीय बजट में की गई घोषणा से राज्य के खजाने पर पड़ा अतिरिक्त बोझ कम होने की उम्मीद है।

ठेकेदारों में जगी उम्मीद की किरण

राज्य के विकास में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले ठेकेदारों के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। देवभूमि कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने इस कदम का स्वागत किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि ठेकेदारों ने अपनी पूंजी लगाकर इस राष्ट्रीय मिशन को धरातल पर उतारा है।

ठेकेदारों की प्रमुख मांगें और स्थिति:

  • पिछले एक साल से रुके हुए भुगतानों का तत्काल निस्तारण।

  • कम्प्लिशन सर्टिफिकेट की प्रक्रिया में तेजी लाना।

  • जीएसटी और अन्य तकनीकी कटौतियों में पारदर्शिता।

अग्रवाल का मानना है कि यदि यह बजट समय पर उत्तराखंड के जल संस्थान और जल निगम तक पहुँचता है, तो उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है जो ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त कर लेगा।


भविष्य की राह

जल जीवन मिशन केवल पाइप बिछाने का अभियान नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की मातृशक्ति को मीलों दूर से पानी लाने के श्रम से मुक्ति दिलाने का संकल्प है। अब जबकि केंद्र ने अपनी तिजोरी खोल दी है, गेंद राज्य के विभागीय अधिकारियों के पाले में है।

समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना और गुणवत्ता सुनिश्चित करना अब बड़ी चुनौती होगी। क्या उत्तराखंड इस बजट का लाभ उठाकर 2026 के भीतर ‘पूर्ण सैचुरेशन’ हासिल कर पाएगा? यह आने वाले महीनों में विभागीय कार्यप्रणाली पर निर्भर करेगा।

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