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ट्रंप की बीजिंग यात्रा: ईरान संकट और व्यापारिक युद्ध के बीच शी जिनपिंग से महामुलाकात, क्या पिघलेगी रिश्तों की बर्फ?

बीजिंग/वाशिंगटन: वैश्विक कूटनीति के केंद्र में इस समय चीन की राजधानी बीजिंग है, जहाँ बुधवार को दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच एक ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे, जहाँ वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। पश्चिम एशिया में गहराते ईरान संकट, इजरायल-ईरान युद्ध की आहट और व्यापारिक टैरिफ को लेकर जारी खींचतान के बीच इस यात्रा को “दशक की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा” माना जा रहा है।

ट्रंप की यह यात्रा उनके दूसरे कार्यकाल की पहली और कुल दूसरी आधिकारिक चीन यात्रा है। 2017 के बाद यह पहला मौका होगा जब ट्रंप और जिनपिंग आमने-सामने बैठकर उन मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को अस्थिर कर रखा है।

एजेंडे पर ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया की सुरक्षा

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू ईरान संकट है। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप और जिनपिंग मिलकर इजरायल-ईरान तनाव को कम करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी को खत्म करने के लिए किसी साझा समझौते पर पहुंच सकते हैं। गौरतलब है कि ट्रंप की यात्रा से ठीक पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी, जो चीन की इस मध्यस्थता में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। अमेरिका चाहता है कि चीन अपने प्रभाव का उपयोग कर ईरान को संघर्ष बढ़ाने से रोके, वहीं चीन की चिंता ऊर्जा सुरक्षा और अपनी ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल को लेकर है।

व्यापारिक युद्ध और 525 अरब डॉलर का दांव

व्यापारिक मोर्चे पर, ट्रंप की इस यात्रा का उद्देश्य अमेरिका को होने वाले 525 अरब डॉलर से अधिक के चीनी निर्यात पर असर डालने वाले टैरिफ विवाद को सुलझाना है। अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना हमेशा से ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का मुख्य स्तंभ रहा है। इस बार उनके साथ अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी बीजिंग पहुँच रहा है। चर्चा के केंद्र में न केवल आयात-निर्यात शुल्क होंगे, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण जैसे भविष्यवादी मुद्दे भी शामिल रहेंगे।

स्वागत का विशेष कार्यक्रम: ‘टेम्पल ऑफ हेवन’ और द्विपक्षीय बैठकें

अमेरिकी उप प्रेस सचिव अन्ना केली के अनुसार, ट्रंप का स्वागत बीजिंग में अत्यंत भव्य तरीके से किया जाएगा। बुधवार शाम आगमन के बाद, बृहस्पतिवार को औपचारिक स्वागत समारोह और उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें होंगी। कूटनीतिक प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए दोनों नेता शुक्रवार को ‘चाय’ और ‘दोपहर के भोजन’ पर अनौपचारिक चर्चा भी करेंगे।

इस यात्रा का एक सांस्कृतिक पहलू भी है; ट्रंप बीजिंग के ऐतिहासिक ‘टेम्पल ऑफ हेवन’ (Temple of Heaven) का दौरा करेंगे। यह वही स्थान है जहाँ प्राचीन चीनी सम्राट अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे का उद्देश्य अमेरिका और चीन के बीच विश्वास बहाली का संदेश देना है।

ताइवान और रक्षा आपूर्ति पर तनातनी

भले ही बातचीत का माहौल सौहार्दपूर्ण बनाने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन ताइवान का मुद्दा मेज पर सबसे जटिल रहेगा। अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री और दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच पुराने मतभेद हैं। व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि ट्रंप क्षेत्रीय स्थिरता के लिए रेड-लाइन स्पष्ट करेंगे, जबकि बीजिंग इसे अपने आंतरिक मामले में हस्तक्षेप के रूप में देखता रहा है।

भविष्य की रणनीति और पारस्परिक मेजबानी

यह यात्रा केवल मौजूदा संकटों के समाधान तक सीमित नहीं है। अन्ना केली ने संकेत दिया है कि इस वार्ता के बाद अमेरिका भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पारस्परिक यात्रा की मेजबानी करेगा। यह संकेत देता है कि दोनों महाशक्तियाँ अब सीधे टकराव के बजाय ‘प्रतिस्पर्धी सह-अस्तित्व’ (Competitive Coexistence) की राह तलाश रही हैं। यदि ईरान और व्यापारिक टैरिफ पर कोई ठोस सहमति बनती है, तो यह न केवल ट्रंप की एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी, बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों और तेल की कीमतों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

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