
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर मचा बवाल अब कानूनी और जांच के चक्रव्यूह में फंस गया है। केंद्र सरकार के निर्देश पर मामला दर्ज करते ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने देशव्यापी कार्रवाई शुरू कर दी है। राजस्थान के जमवारामगढ़ से लेकर महाराष्ट्र के नासिक तक सीबीआई की छापेमारी ने इस पूरे नेटवर्क की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। जांच की आंच अब उन रसूखदार और प्रोफेशनल लोगों तक पहुँच रही है, जिन्होंने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
जमवारामगढ़ में पहली बड़ी कार्रवाई: रसूखदारों पर शिकंजा
सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करने के चंद घंटों के भीतर ही राजस्थान के जयपुर जिले के जमवारामगढ़ में बड़ी दबिश दी। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने यहाँ से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति के दोनों बेटे पेशे से डॉक्टर हैं। सीबीआई अब इस कोण से जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क में पहले से ही चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं, जो परीक्षा के पैटर्न और लूपहोल्स से वाकिफ थे।
BNS की सख्त धाराओं में FIR दर्ज
शिक्षा मंत्रालय की लिखित शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें शामिल हैं:
-
आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)
-
धोखाधड़ी और चोरी
-
आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust)
-
सबूतों को नष्ट करना
इसके अलावा, आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और नवनिर्मित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 (Public Examination Prevention of Unfair Means Act 2024) के तहत भी शिकंजा कसा गया है। यह नया कानून पेपर लीक जैसे मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान करता है।
नासिक से मेडिकल छात्र हिरासत में: ‘सॉल्वर गैंग’ का खुलासा
जांच की कड़ियाँ जोड़ते हुए सीबीआई ने महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनार नामक एक आरोपी को हिरासत में लिया है। शुभम खुद एक मेडिकल छात्र है और भोपाल के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से आयुर्वेदिक चिकित्सा (BAMS) के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। एक भावी डॉक्टर की इस तरह की संलिप्तता ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक संगठित ‘सॉल्वर गैंग’ का कारनामा है, जिसमें मेडिकल बैकग्राउंड वाले युवा ही ‘हैंडलर’ और ‘सॉल्वर’ की भूमिका निभा रहे थे।
03 मई की परीक्षा और ‘पवित्रता’ पर सवाल
गौरतलब है कि 03 मई 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित इस परीक्षा के शुरू होने से पहले ही पेपर लीक और दस्तावेजों के अनधिकृत प्रसार की खबरें आई थीं। सीबीआई को दी गई शिकायत में एनटीए ने स्वीकार किया है कि कुछ इनपुट्स के आधार पर परीक्षा की पवित्रता (Sanctity) और निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका है।
सीबीआई अब उन ‘डिजिटल फुटप्रिंट्स’ की तलाश कर रही है, जिनके जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी (Answer Key) को टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वायरल किया गया था।
देशभर में सीबीआई की विशेष टीमों का जाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने विशेष टास्क फोर्स गठित की हैं। ये टीमें दिल्ली, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं। जांच का मुख्य केंद्र वह ‘रूट’ है, जहाँ से पेपर लीक हुआ—चाहे वह प्रिंटिंग प्रेस हो, स्ट्रॉन्ग रूम हो या फिर ट्रांसपोर्टेशन के दौरान हुई कोई चूक। सीबीआई उन कोचिंग संस्थानों की भी कुंडली खंगाल रही है, जो कम समय में ‘गारंटीड सिलेक्शन’ का वादा करते हैं।
लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर
NEET-UG 2026 में हुई इस कथित अनियमितता ने न केवल सरकार और एनटीए की साख पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन 24 लाख से अधिक छात्रों को भी मानसिक तनाव में डाल दिया है, जिन्होंने कड़ी मेहनत से परीक्षा दी थी। अब सबकी नजरें सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या पूरी परीक्षा दोबारा कराई जाएगी या केवल प्रभावित केंद्रों पर ही कार्रवाई होगी।



