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निज़ाम के खजाने का झांसा: हैदराबाद में 50 करोड़ की ठगी, आभूषणों के नाम पर बिजनेसमैन से बड़ा खेल

हैदराबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कारोबारी को कथित तौर पर निज़ाम काल के दुर्लभ आभूषणों का लालच देकर 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया। यह मामला न केवल आर्थिक अपराध का बड़ा उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे लालच और भरोसे का फायदा उठाकर ठग बड़े स्तर पर लोगों को निशाना बनाते हैं।

पीड़ित कारोबारी राजेश अग्रवाल (उम्र करीब 50 वर्ष) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उन्हें साल 2016 में एक बेहद आकर्षक निवेश प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव के तहत उन्हें बताया गया कि कुछ लोग निज़ाम काल के बेहद कीमती और ऐतिहासिक आभूषणों के संपर्क में हैं, जो कथित तौर पर सरकारी कब्जे में सीलबंद बक्सों में रखे हुए हैं। आरोपियों ने दावा किया कि वे इन आभूषणों को छुड़ाने की प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं और इसके बदले निवेश करने वालों को इनकी हिस्सेदारी दी जाएगी।

कैसे शुरू हुआ पूरा खेल

राजेश अग्रवाल के मुताबिक, जौहरी मोहम्मद ज़ाकिर उस्मान और बिजनेसमैन सुकेश गुप्ता ने उनसे संपर्क किया और इस “गोल्डन अवसर” का हिस्सा बनने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि कुल पांच सीलबंद बक्सों में बेहद दुर्लभ और बहुमूल्य आभूषण हैं, जिनकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये हो सकती है। यह सुनकर राजेश अग्रवाल को इस डील में बड़ा मुनाफा दिखाई दिया।

आरोपियों ने उन्हें भरोसा दिलाने के लिए कई तरह के दस्तावेज, मौखिक आश्वासन और कथित कनेक्शन भी दिखाए। इसके बाद एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें निवेश और हिस्सेदारी की शर्तें तय की गईं।

करोड़ों रुपये की किस्तों में भुगतान

राजेश अग्रवाल ने जून 2016 से फरवरी 2018 के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 50.8 करोड़ रुपये आरोपियों की विभिन्न फर्मों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। यह भुगतान बैंकिंग चैनल के जरिए किया गया, जिससे उन्हें लगा कि सब कुछ वैध और सुरक्षित है।

लेकिन समय बीतने के साथ उन्हें एहसास हुआ कि न तो उन्हें किसी आभूषण का हिस्सा मिला और न ही डील को लेकर कोई ठोस प्रगति हुई। जब उन्होंने आरोपियों से जवाब मांगा तो उन्हें टालमटोल जवाब मिलने लगे। धीरे-धीरे यह साफ हो गया कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है।

आभूषण थे या सिर्फ कहानी?

अब इस मामले की सबसे अहम कड़ी यह है कि जिन आभूषणों का हवाला देकर यह पूरी डील की गई, वे वास्तव में मौजूद थे या नहीं। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या सच में कोई निज़ाम काल के आभूषण थे या यह पूरी कहानी सिर्फ पैसे ऐंठने के लिए गढ़ी गई थी।

जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या आरोपियों ने पहले भी इसी तरह की किसी और ठगी को अंजाम दिया है और क्या इस गिरोह में और लोग भी शामिल हैं।

पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद ज़ाकिर उस्मान और सुकेश गुप्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और धारा 34 (सामान्य इरादा) के तहत केस दर्ज किया है। यह मामला 9 अप्रैल को हैदराबाद के केंद्रीय अपराध केंद्र (CCS) में दर्ज किया गया।

फिलहाल इस केस की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी बैंक लेनदेन, कंपनियों के रिकॉर्ड, समझौते के दस्तावेज और सभी संबंधित सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है।

बैंक ट्रांजैक्शन और कंपनियों की पड़ताल

ईओडब्ल्यू की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रांसफर किए गए 50.8 करोड़ रुपये आखिर कहां गए। क्या इस पैसे का इस्तेमाल किसी अन्य निवेश, प्रॉपर्टी खरीद या व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया, इसकी भी जांच चल रही है।

इसके अलावा, आरोपियों की फर्मों और उनके वित्तीय लेनदेन का ऑडिट भी किया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह एक संगठित ठगी का मामला है या नहीं।

आगे क्या?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप साबित होते हैं तो आरोपियों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। साथ ही, पीड़ित को न्याय दिलाने और उसकी रकम की रिकवरी के प्रयास भी किए जाएंगे।

यह मामला निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के खतरों को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े निवेश से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है, खासकर जब मामला ऐतिहासिक या दुर्लभ वस्तुओं से जुड़ा हो।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि ठग अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं और ऐसे में सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।

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