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The Hill India > Blog > क्राइम > टीसीएस धर्मांतरण केस: आरोपी निदा खान को जमानत देने का विरोध, पुलिस ने कोर्ट में रखे गंभीर तर्क
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टीसीएस धर्मांतरण केस: आरोपी निदा खान को जमानत देने का विरोध, पुलिस ने कोर्ट में रखे गंभीर तर्क

The Hill India News
Last updated: April 28, 2026 8:27 am
The Hill India News
Published: April 28, 2026
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नासिक के चर्चित टीसीएस धर्मांतरण मामले में आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में पुलिस और एसआईटी (विशेष जांच दल) ने कोर्ट के सामने कई ऐसे गंभीर तर्क और तथ्य प्रस्तुत किए हैं, जिनके आधार पर उन्होंने आरोपी को जमानत न देने की मांग की है। मामला न सिर्फ धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़ा है, बल्कि इसमें यौन शोषण, धमकी, मानसिक उत्पीड़न और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन जैसी आशंकाएं भी सामने आई हैं, जिससे यह केस और अधिक संवेदनशील और जटिल बन गया है।

पुलिस के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी निदा खान पीड़िता को अपने घर ले जाती थी और वहां उसे इस्लाम धर्म से जुड़ी गतिविधियां करने के लिए प्रेरित ही नहीं, बल्कि दबाव भी डालती थी। पीड़िता को जबरन नमाज पढ़ने, हिजाब और बुर्का पहनने के लिए कहा जाता था। इतना ही नहीं, आरोपी ने पीड़िता को धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से धार्मिक किताबें भी दीं, जिनमें ‘मुहम्मद पैगंबर का पवित्र जीवन’ जैसी पुस्तक शामिल है, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है।

जांच एजेंसियों ने यह भी खुलासा किया है कि आरोपी ने पीड़िता के मोबाइल फोन में इस्लामिक ऐप इंस्टॉल किए थे और उसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए धार्मिक सामग्री भेजी जाती थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच बेहद जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये सामग्री कहां से प्राप्त की गई और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है।

इस मामले में पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि एक अन्य आरोपी ने उसे शादी का झांसा देकर यौन शोषण किया। आरोपी ने अपनी शादी की सच्चाई छिपाई और कार्यस्थल पर पीड़िता के धर्म का अपमान किया। इसके अलावा, दूसरे आरोपी द्वारा पीड़िता को धमकाकर उसके निजी संबंधों को उजागर करने की बात कहकर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव भी डाला गया। इन सभी आरोपों को देखते हुए कोर्ट ने भी माना है कि मामला बेहद गंभीर है और इसमें कई आपराधिक धाराएं लागू होती हैं।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस केस में केवल व्यक्तिगत स्तर पर अपराध नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क या समूह के शामिल होने की संभावना भी है। जांच के दौरान ‘मालेगांव पार्टी’ नामक एक संदिग्ध समूह का जिक्र सामने आया है, जिसके जरिए पीड़िता का नाम बदलने और दस्तावेजों में हेरफेर करने की योजना बनाई जा रही थी। इसके अलावा, पीड़िता को नौकरी के बहाने मलेशिया भेजने की साजिश का भी खुलासा हुआ है, जहां ‘इमरान’ नाम के व्यक्ति से संपर्क कराने की योजना थी। इस अंतरराष्ट्रीय एंगल की जांच अभी बाकी है।

पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता के शैक्षणिक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे, जिनका इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा सकता था। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि आरोपियों की मंशा सुनियोजित और आपराधिक थी।

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पीड़िता अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों को यह जानकारी थी, फिर भी उन्होंने अपराध किया, जिसके चलते इस केस में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी धाराएं लगाई गई हैं। यह कानून ऐसे मामलों में और अधिक सख्त प्रावधान लागू करता है।

पुलिस ने कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि यदि आरोपी को इस स्तर पर जमानत दे दी जाती है, तो इससे जांच प्रभावित हो सकती है। आरोपी गवाहों को डरा-धमका सकते हैं या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। अभी कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं, और जांच भी प्रारंभिक चरण में है।

सबसे अहम बात यह है कि इस मामले में अब तक 8 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें 7 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि यदि आरोपी को जमानत मिलती है, तो अन्य संभावित पीड़ित सामने आने से डर सकते हैं, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

इन्हीं सभी बिंदुओं को आधार बनाते हुए पुलिस ने कोर्ट से अपील की है कि आरोपी निदा खान को अग्रिम जमानत न दी जाए, ताकि निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, और अगली सुनवाई 2 मई को निर्धारित की गई है। इस मामले पर पूरे देश की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह न केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता से भी गहराई से संबंधित है।

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