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आज से पीएम मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया का ऐतिहासिक दौरा; राफेल जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी पर टिकीं दुनिया की नजरें

The Hill India News
Last updated: June 13, 2026 2:19 am
The Hill India News
Published: June 13, 2026
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नई दिल्ली। भारत की वैश्विक कूटनीति और रक्षा आत्मनिर्भरता के लिहाज से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शनिवार) सुबह 10 बजे नई दिल्ली से करीब एक हफ्ते लंबे विदेश दौरे के लिए रवाना हो रहे हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री 13 जून से फ्रांस और स्लोवाकिया की उच्च स्तरीय यात्रा पर रहेंगे।

Contents
‘मेक-इन-इन-इंडिया’ के तहत राफेल MRFA प्रोजेक्ट को मिलेगी नई उड़ानसमुद्र में बढ़ेगी भारत की हनक: तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों पर बातचीत तेजइतिहास रचेंगे पीएम मोदी: स्लोवाकिया जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्रीनीस में गूंजेगा भारतीय स्टार्टअप्स का डंका: क्या है ‘भारत इनोवेट्स 2026’?G7 सम्मेलन में सुरक्षित AI और वैश्विक एकजुटता पर रहेगा फोकस

इस यात्रा का मुख्य आकर्षण फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित होने वाला जी7 (G7) शिखर सम्मेलन है, जहां पीएम मोदी वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष रखेंगे। हालांकि, इस रणनीतिक दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें भारत और फ्रांस के बीच होने जा रहे अरबों डॉलर के रक्षा समझौतों पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस पीएम मोदी का फ्रांस दौरा 2026 के दौरान भारतीय वायुसेना और नौसेना को अभेद्य बनाने के लिए राफेल फाइटर जेट्स और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों को लेकर ऐतिहासिक समझौतों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

‘मेक-इन-इन-इंडिया’ के तहत राफेल MRFA प्रोजेक्ट को मिलेगी नई उड़ान

राजनयिक और रक्षा सूत्रों से मिल रहे संकेतों के मुताबिक, इस यात्रा के दौरान भारतीय वायुसेना के बहुप्रतीक्षित मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा ब्रेकथ्रू मिल सकता है। फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत भारत को अपनी अत्याधुनिक तकनीक सौंपने को तैयार है।

प्रस्तावित रूपरेखा के अनुसार, डसॉल्ट एविएशन शुरुआती 18 राफेल लड़ाकू विमान पूरी तरह से तैयार यानी ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में भारतीय वायुसेना को सौंपेगी। वहीं, बाकी बचे विमानों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत पूरी तरह भारत में ही किया जाएगा, जिसमें भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत होगी। सबसे खास बात यह है कि फ्रांस इन जेट्स में भारत की अपनी स्वदेशी हथियार प्रणालियों (Astra मिसाइल आदि) को एकीकृत करने पर पूरी तरह सहमत हो गया है।

राफेल का बैकग्राउंड: मालूम हो कि साल 2015 में मोदी सरकार ने 36 राफेल जेट्स का ऑर्डर दिया था, जो इस समय वायुसेना की रीढ़ हैं। इसके बाद पिछले साल नौसेना के लिए 64,000 करोड़ रुपये की लागत से 26 राफेल मरीन वेरिएंट का सौदा किया गया था। अब इस नए दौरे से वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।

समुद्र में बढ़ेगी भारत की हनक: तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों पर बातचीत तेज

वायुसेना के साथ-साथ भारतीय नौसेना के लिए भी यह दौरा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दादागिरी को जवाब देने के लिए दोनों देश तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन (Scorpene) श्रेणी की पनडुब्बियों के फॉलो-ऑन ऑर्डर पर बातचीत को अंतिम रूप दे सकते हैं।

इस 36,000 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय ने दो साल पहले ही मंजूरी दे दी थी, लेकिन तकनीकी और कमर्शियल पेचों के कारण इसमें कुछ देरी हुई। अब पीएम मोदी के इस दौरे में फ्रांस के ‘नेवल ग्रुप’ और भारत की सरकारी कंपनी ‘मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड’ (MDL) के बीच इस सह-उत्पादन (Co-development) समझौते के आगे बढ़ने की पूरी उम्मीद है। MDL पहले ही प्रोजेक्ट-75 के तहत छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण सफलतापूर्वक कर चुका है।

इतिहास रचेंगे पीएम मोदी: स्लोवाकिया जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री

यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नया इतिहास रचेंगे। वह मध्य यूरोपीय देश स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर जाएंगे। साल 1993 में चेकोग्लोवाकिया से अलग होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद, पिछले 33 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली स्लोवाकिया यात्रा होगी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत की ‘यूरोप के साथ जुड़ाव’ की नीति का एक अहम हिस्सा है। स्लोवाकिया ऑटोमोबाइल, हैवी इंजीनियरिंग और रेलवे विनिर्माण का एक बड़ा वैश्विक हब है। भारत इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी हस्तांतरण के नए रास्ते खोलने के लिए प्रतिबद्ध है।

नीस में गूंजेगा भारतीय स्टार्टअप्स का डंका: क्या है ‘भारत इनोवेट्स 2026’?

अपनी यात्रा के शुरुआती चरण में पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों संयुक्त रूप से नीस शहर के ‘पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स’ में ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की इस अनूठी पहल का उद्देश्य भारत के ‘डीप टेक’ और नवाचार इकोसिस्टम को दुनिया के सामने प्रदर्शित करना है।

इस आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें:

  • भारत से चुने गए 120 शीर्ष डीप-टेक स्टार्टअप्स हिस्सा ले रहे हैं।

  • 15 प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थान और 500 से अधिक वैश्विक निवेशक व वेंचर कैपिटल फर्म शामिल हो रही हैं।

  • यह पूरा आयोजन सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, स्पेस टेक, बायोटेक, एआई और ग्रीन एनर्जी जैसे 13 उभरते हुए क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद की अध्यक्षता वाली समिति ने इन स्टार्टअप्स को शॉर्टलिस्ट किया है। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के भी शामिल होने की प्रबल संभावना है।

G7 सम्मेलन में सुरक्षित AI और वैश्विक एकजुटता पर रहेगा फोकस

16-17 जून को फ्रांस के एवियन में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी वैश्विक अर्थव्यवस्था के टिकाऊ विकास, सुरक्षित और कुशल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल तथा अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के पुनर्निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आयोजित सत्रों में हिस्सा लेंगे। इसके इतर दुनिया के कई शीर्ष राष्ट्राध्यक्षों के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकातें भी तय हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह विदेश दौरा सिर्फ बैठकों और प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की उस बदलती तस्वीर को बयां करता है, जहां भारत अब केवल रक्षा सामग्री का खरीदार नहीं, बल्कि सह-उत्पादक (Co-developer) बनकर उभर रहा है। चाहे वह राफेल का स्वदेशीकरण हो या भारतीय स्टार्टअप्स का फ्रांस की धरती पर जलवा, यह दौरा वैश्विक पटल पर भारत की मजबूत आर्थिक और सैन्य धमक को और गहरा करने वाला साबित होगा।

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