नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी का रंग बदलते ही देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। वर्षों से ‘मैन इन ब्लू’ के नाम से पहचान बनाने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम अब मैदान पर केसरिया (सैफ्रन) रंग की जर्सी में नजर आएगी। हॉकी इंडिया द्वारा नई प्लेइंग किट जारी किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने इसे लेकर केंद्र सरकार और खेल प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे इतिहास और पहचान बदलने की कोशिश बताया, जबकि कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। दूसरी ओर हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला किसी राजनीतिक सोच के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी तरह तकनीकी कारणों और खिलाड़ियों की सलाह पर लिया गया है।
भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी बनी विवाद का केंद्र
भारतीय हॉकी टीम की पहचान लंबे समय से नीले रंग की जर्सी रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को ‘मैन इन ब्लू’ के नाम से जाना जाता रहा है। लेकिन इस बार टीम की नई प्लेइंग जर्सी का रंग केसरिया कर दिया गया है। जर्सी के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई।
जहां एक ओर कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से जुड़ा सकारात्मक कदम बताया, वहीं विपक्षी दलों ने इसे भगवाकरण से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। देखते ही देखते यह खेल का विषय राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया।
प्रियंका गांधी बोलीं— इतिहास बदलने की कोशिश की जा रही
संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल जर्सी बदलने से देश का इतिहास और उसकी पहचान नहीं बदली जा सकती।
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार चाहे यूनिफॉर्म बदले या शिक्षा नीति के जरिए इतिहास को नए तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश करे, देश का युवा सब समझ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई सत्य, अहिंसा और भाईचारे के सिद्धांतों पर आधारित थी और पूरा देश इस ऐतिहासिक सच्चाई को जानता है। उनके अनुसार युवाओं की आवाज ही देश की असली आवाज है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने जताई नाराजगी
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने भी नई जर्सी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि हॉकी इंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में कई अच्छे फैसले लिए हैं, लेकिन यह फैसला निराशाजनक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम की सबसे बड़ी पहचान उसकी नीली जर्सी रही है। वर्षों तक उसी जर्सी को पहनकर खिलाड़ियों ने देश के लिए खेला और अनेक ऐतिहासिक जीत दर्ज कीं। ऐसे में अचानक रंग बदलने का फैसला उन्हें समझ से परे लगता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केसरिया रंग चुनने का तर्क क्या है।
विपक्ष ने खेल और राजनीति को अलग रखने की दी सलाह
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि खेल को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए। उनके अनुसार खिलाड़ियों की मेहनत और खेल भावना किसी भी राजनीतिक विचारधारा से ऊपर होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर क्षेत्र में रंग विशेष को बढ़ावा देने की कोशिश उचित नहीं है।
वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने भी इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार हर चीज को भगवा रंग में रंगने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति रही तो एक दिन पेड़ों को भी हरे की जगह भगवा रंग में रंगने की कोशिश की जाएगी।
समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि वर्षों तक जिस जर्सी को पहनकर खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया, उससे भावनात्मक लगाव होना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि हॉकी इंडिया के पास इस बदलाव के पीछे कोई ठोस तकनीकी कारण है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सरकार समर्थक नेताओं ने किया फैसले का बचाव
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केसरिया रंग भारत की संस्कृति, परंपरा और त्याग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह रंग देश की पहचान का अभिन्न हिस्सा है और इसे किसी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत क्रांतिकारियों, संतों और त्याग की परंपरा वाला देश है, इसलिए केसरिया रंग पर आपत्ति जताना उचित नहीं है।
हॉकी इंडिया ने दी विस्तृत सफाई
बढ़ते विवाद के बीच हॉकी इंडिया ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। संगठन ने कहा कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला किसी राजनीतिक दबाव या विचारधारा के कारण नहीं लिया गया, बल्कि खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लंबी चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया।
हॉकी इंडिया के अनुसार आज अधिकांश अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच नीले रंग की सिंथेटिक टर्फ पर खेले जाते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों की नीली जर्सी कई बार मैदान की सतह के साथ मिल जाती है, जिससे खिलाड़ियों को पहचानने और खेल की गति समझने में दिक्कत आती है। यही कारण था कि टीम प्रबंधन ने अलग और अधिक स्पष्ट दिखाई देने वाले रंगों पर विचार किया।
संगठन ने बताया कि खिलाड़ियों और कोचों ने पीले तथा केसरिया रंग का सुझाव दिया था। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद केसरिया रंग को अंतिम रूप दिया गया क्योंकि यह न केवल मैदान पर बेहतर दृश्यता प्रदान करता है बल्कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के तीन प्रमुख रंगों में से एक भी है।
राष्ट्रीय ध्वज से भी जोड़ा गया रंग का महत्व
हॉकी इंडिया ने अपने बयान में कहा कि केसरिया रंग भारतीय तिरंगे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह साहस, त्याग, समर्पण और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है। इसलिए तकनीकी आवश्यकता पूरी होने के साथ-साथ यह रंग भारतीय पहचान का भी प्रतिनिधित्व करता है।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि जर्सी के रंग में बदलाव कोई नई परंपरा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में परिस्थितियों और तकनीकी जरूरतों के अनुसार विभिन्न रंगों की प्लेइंग किट का उपयोग पहले भी किया जाता रहा है।
पहले भी बदल चुकी है भारतीय टीम की जर्सी
हॉकी इंडिया ने उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2014 के एफआईएच हॉकी विश्व कप के दौरान भारतीय टीम ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी। इसके बाद 2018 विश्व कप में आसमानी नीले रंग की अलग डिजाइन वाली जर्सी का इस्तेमाल किया गया था। यानी यह पहली बार नहीं है जब भारतीय टीम की प्लेइंग किट का रंग बदला गया हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक खेलों में खिलाड़ियों की दृश्यता, टेलीविजन प्रसारण की गुणवत्ता और तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जर्सी के रंग समय-समय पर बदले जाते रहे हैं। फुटबॉल, क्रिकेट और हॉकी सहित कई अंतरराष्ट्रीय खेलों में ऐसी मिसालें पहले भी देखने को मिल चुकी हैं।
खेल या राजनीति? बहस अभी जारी
भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे पूरी तरह तकनीकी और खेल से जुड़ा फैसला बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक और वैचारिक नजरिए से देख रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोगों की राय बंटी हुई दिखाई दे रही है।
हालांकि इस पूरे विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय हॉकी टीम आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में अपने प्रदर्शन से देश का प्रतिनिधित्व करेगी। खेल प्रेमियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नई जर्सी में टीम मैदान पर कैसा प्रदर्शन करती है और क्या यह विवाद जल्द ही समाप्त होकर चर्चा फिर खिलाड़ियों के खेल और उपलब्धियों पर केंद्रित हो पाएगी।
